नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीजन शुरू हो चुका है और देशभर में लाखों टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। हालांकि, कई लोग यह मान लेते हैं कि ITR सबमिट करने के बाद उनका काम पूरा हो गया। लेकिन हकीकत इससे अलग है। ITR फाइल करना सिर्फ पहला चरण है। जब तक आप उसका e-Verification नहीं करते, तब तक आपका रिटर्न अधूरा माना जाता है और आयकर विभाग उसे प्रोसेस नहीं करता।
अगर आपने समय रहते ITR का वेरिफिकेशन नहीं किया, तो आपका रिटर्न अमान्य माना जा सकता है। इसका असर टैक्स रिफंड, टैक्स रिकॉर्ड और भविष्य की टैक्स फाइलिंग पर भी पड़ सकता है। इसलिए ITR भरने के बाद यह जरूरी स्टेप समय पर पूरा करना बेहद आवश्यक है।
30 दिनों के भीतर करना होता है e-Verification
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, ITR फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होता है। यदि तय समय सीमा के अंदर e-Verification नहीं किया जाता, तो रिटर्न वैध नहीं माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में आपका रिटर्न प्रोसेस नहीं होगा और यदि टैक्स रिफंड बनता है तो वह भी जारी नहीं किया जाएगा। कई बार टैक्सपेयर्स को पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ जाती है, जिससे समय और मेहनत दोनों बढ़ जाते हैं।
ITR Verification क्या होता है?
ITR Verification एक सुरक्षा और पहचान पुष्टि (Identity Confirmation) प्रक्रिया है। इसके जरिए आयकर विभाग यह सुनिश्चित करता है कि जिस व्यक्ति के नाम से ITR दाखिल किया गया है, उसी ने उसे अधिकृत रूप से सबमिट किया है।
यह प्रक्रिया टैक्स फ्रॉड को रोकने और टैक्सपेयर्स की पहचान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी होती है।
घर बैठे ऐसे करें ITR e-Verification
आयकर विभाग टैक्सपेयर्स को कई आसान विकल्प उपलब्ध कराता है, जिनकी मदद से घर बैठे कुछ ही मिनटों में e-Verification किया जा सकता है।
1. Aadhaar OTP
यह सबसे आसान और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है।
- आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी है।
- मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करें।
- OTP सत्यापित होते ही ITR तुरंत e-Verified हो जाएगा।
2. Net Banking
यदि आपका बैंक आयकर पोर्टल से जुड़ा है, तो नेट बैंकिंग के जरिए भी वेरिफिकेशन किया जा सकता है।
- नेट बैंकिंग में लॉगिन करें।
- Income Tax या e-Verify विकल्प चुनें।
- निर्देशों का पालन करते हुए प्रक्रिया पूरी करें।
3. Electronic Verification Code (EVC)
आप EVC के माध्यम से भी ITR सत्यापित कर सकते हैं। यह कोड कई माध्यमों से प्राप्त किया जा सकता है।
- बैंक अकाउंट
- डिमैट अकाउंट
- ATM
EVC दर्ज करने के बाद वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है।
4. Digital Signature Certificate (DSC)
यह विकल्प मुख्य रूप से निम्न लोगों के लिए होता है—
- कंपनियां
- चार्टर्ड अकाउंटेंट
- ऑडिट के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स
डिजिटल सिग्नेचर के जरिए ITR तुरंत सत्यापित किया जा सकता है।
5. ITR-V भेजकर ऑफलाइन Verification
यदि आप ऑनलाइन वेरिफिकेशन नहीं करना चाहते, तो ऑफलाइन तरीका भी उपलब्ध है।
- ITR-V फॉर्म डाउनलोड करें।
- उस पर हस्ताक्षर करें।
- इसे आयकर विभाग के Central Processing Centre (CPC), Bengaluru भेज दें।
हालांकि, ऑनलाइन e-Verification की तुलना में इस प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है।
e-Verification के बाद क्या होता है?
जैसे ही आपका ITR सफलतापूर्वक Verify हो जाता है, उसके बाद आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है।
इसके बाद—
- आपका ITR प्रोसेस किया जाता है।
- यदि टैक्स रिफंड बनता है तो उसे जारी किया जाता है।
- आपका टैक्स रिकॉर्ड अपडेट होता है।
- ITR फाइलिंग प्रक्रिया पूरी मानी जाती है।
Verification न करने पर क्या नुकसान हो सकता है?
यदि आपने ITR फाइल करने के बाद वेरिफिकेशन नहीं किया, तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- ITR अमान्य माना जा सकता है।
- टैक्स रिफंड अटक सकता है।
- भविष्य में टैक्स रिकॉर्ड प्रभावित हो सकता है।
- दोबारा ITR दाखिल करने की जरूरत पड़ सकती है।
- अनावश्यक देरी और परेशानी बढ़ सकती है।
टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी सलाह
ITR फाइल करने के बाद आयकर पोर्टल पर लॉगिन करके यह जरूर जांच लें कि आपके रिटर्न का स्टेटस “Successfully e-Verified” दिख रहा है या नहीं। यदि ऐसा नहीं है, तो 30 दिनों की समय सीमा समाप्त होने से पहले तुरंत वेरिफिकेशन पूरा करें।
निष्कर्ष
ITR फाइल करना टैक्स प्रक्रिया का केवल पहला चरण है। असली प्रक्रिया तब पूरी होती है, जब उसका e-Verification सफलतापूर्वक हो जाता है। यदि आपने अभी तक यह जरूरी स्टेप पूरा नहीं किया है, तो बिना देर किए इसे पूरा करें। छोटी-सी लापरवाही आपके रिटर्न, टैक्स रिफंड और पूरी फाइलिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।


