GSTAT Appeal Last Date Extended: केंद्र सरकार ने जीएसटी से जुड़े विवादों में अपील करने वाले करदाताओं को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है। पहले यह समयसीमा 30 जून 2026 तक थी। सरकार ने यह फैसला तकनीकी दिक्कतों और विभिन्न हितधारकों के अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए लिया है।
Highlights
- GSTAT में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि अब 31 जुलाई 2026।
- तकनीकी समस्याओं और पोर्टल पर अधिक लोड के चलते लिया गया फैसला।
- सरकार ने करदाताओं से आखिरी दिन का इंतजार न करने की अपील की।
- देशभर में 31 राज्य पीठ और दिल्ली में प्रिंसिपल बेंच अधिसूचित।
वित्त मंत्रालय ने क्यों बढ़ाई GSTAT की समयसीमा?
वित्त मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हाल के दिनों में GSTAT पोर्टल पर अपील दाखिल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अधिक ट्रैफिक के कारण कई करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 जून 2026 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है, ताकि किसी भी करदाता का अपील करने का अधिकार प्रभावित न हो।
पिछले 15 दिनों में रिकॉर्ड संख्या में दाखिल हुई अपीलें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- पिछले 15 दिनों में 30,000 से अधिक अपीलें दर्ज की गईं।
- एक ही दिन में 5,500 अपीलें दाखिल होने का रिकॉर्ड बना।
- बढ़ते दबाव के कारण पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें सामने आईं।
इसी वजह से सरकार ने अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है।
4.80 लाख से ज्यादा मामले अभी भी लंबित
सरकार के मुताबिक वर्तमान में अपीलीय प्राधिकरण (Appellate Authority) के समक्ष 4.80 लाख से अधिक जीएसटी विवाद लंबित हैं। आने वाले समय में इन मामलों के GSTAT में स्थानांतरित होने की संभावना है।
सरकार अब तक:
- 31 राज्य पीठों (State Benches) को अधिसूचित कर चुकी है।
- दिल्ली में एक प्रिंसिपल बेंच भी स्थापित की जा चुकी है।
मई 2024 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा को GSTAT की प्रिंसिपल बेंच का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
GSTAT बनने से क्या बदलेगा?
1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं और जीएसटी विभाग के बीच अधिकांश विवादों का निपटारा उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच जाता था, जिससे मामलों के समाधान में काफी समय लगता था।
सितंबर 2025 से GSTAT के संचालन के बाद:
- जीएसटी विवादों का तेजी से निपटारा होगा।
- करदाताओं को विशेष अपीलीय मंच मिलेगा।
- अदालतों पर मामलों का बोझ कम होगा।
- विवाद समाधान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।
विशेषज्ञों ने फैसले का किया स्वागत
AMRG ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय व्यावहारिक है। उनके अनुसार, इससे GSTAT पूरी तरह सक्रिय होने तक करदाताओं के अपील करने के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हालांकि उन्होंने सलाह दी कि अतिरिक्त समय मिलने के बावजूद अंतिम दिन तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
वहीं KPMG में इनडायरेक्ट टैक्स प्रमुख एवं साझेदार अभिषेक जैन का कहना है कि समयसीमा बढ़ने से करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को नए GSTAT सिस्टम के अनुरूप खुद को तैयार करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। इससे केवल समयसीमा समाप्त होने के कारण वास्तविक अपीलें खारिज होने से बच सकेंगी और नई व्यवस्था में सुचारु बदलाव संभव होगा।
टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?
अगर आपका कोई जीएसटी विवाद लंबित है और आपको GSTAT में अपील दाखिल करनी है, तो अतिरिक्त समय का लाभ जरूर उठाएं। हालांकि विशेषज्ञों की सलाह है कि:
- अंतिम तारीख का इंतजार न करें।
- सभी दस्तावेज पहले से तैयार रखें।
- पोर्टल पर भीड़ बढ़ने से पहले अपील दाखिल कर दें।
- तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए समय रहते प्रक्रिया पूरी करें।
निष्कर्ष
GSTAT में अपील दाखिल करने की समयसीमा 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाना लाखों करदाताओं के लिए बड़ी राहत है। इससे तकनीकी दिक्कतों के कारण अपील दाखिल न कर पाने वाले लोगों को अतिरिक्त मौका मिलेगा। साथ ही, GSTAT के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद जीएसटी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी होने की उम्मीद है.


