मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। जिस संकट को पाकिस्तान ने शुरुआती दौर में अस्थायी मानकर नजरअंदाज किया था, वही अब उसके लिए बड़ा ऊर्जा संकट बन चुका है। कतर से मिलने वाली नियमित LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति बाधित होने के बाद पाकिस्तान को मजबूरी में स्पॉट मार्केट से बेहद महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है।
HighLights
- मध्य पूर्व तनाव से पाकिस्तान की LNG सप्लाई पर बड़ा असर।
- कतर से नियमित गैस आपूर्ति बाधित होने से बढ़ा ऊर्जा संकट।
- पाकिस्तान को अब रिकॉर्ड ऊंचे दामों पर स्पॉट मार्केट से LNG खरीदनी पड़ रही है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव ने वैश्विक गैस सप्लाई चेन को प्रभावित किया।
ऊर्जा संकट पहले से झेल रहे पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि देश की बिजली उत्पादन व्यवस्था काफी हद तक आयातित LNG पर निर्भर करती है। सप्लाई बाधित होने से बिजली उत्पादन, उद्योगों और घरेलू गैस आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
कतर से सप्लाई बाधित, बढ़ी मुश्किलें
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान इस सप्ताह तत्काल डिलीवरी के लिए LNG कार्गो खरीदने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े सैन्य तनाव और हमलों के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसी वजह से पाकिस्तान को समय पर नियमित गैस नहीं मिल पा रही है।
सरकारी कंपनी Pakistan LNG Limited (PLL) ने 30 जून से 4 जुलाई के बीच डिलीवरी के लिए LNG कार्गो खरीदने हेतु नया टेंडर जारी किया है। कंपनियों से सोमवार तक बोली मांगी गई है ताकि देश में गैस की कमी को जल्द पूरा किया जा सके।
चार साल की सबसे महंगी LNG खरीद
इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान ने लगभग चार वर्षों में अपनी सबसे महंगी LNG खेप खरीदी। रिपोर्ट के अनुसार, BP Plc से 6-7 जून की डिलीवरी के लिए पाकिस्तान ने 19.1337 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) की दर से LNG खरीदी।
यह 2022 के बाद पाकिस्तान द्वारा की गई सबसे महंगी LNG खरीद मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने और सीमित उपलब्धता के कारण पाकिस्तान को सामान्य से कहीं अधिक भुगतान करना पड़ा।
क्यों बढ़ा ऊर्जा संकट?
पाकिस्तान की LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर के साथ हुए दीर्घकालिक समझौतों के जरिए पूरा होता है। लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने लगी।
इसके बाद पाकिस्तान के सामने दो विकल्प थे—
- स्पॉट मार्केट से तुरंत महंगी LNG खरीदना।
- या फिर इंतजार करना कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे।
सरकार ने दूसरा विकल्प चुना और महंगी गैस खरीदने से बचने की कोशिश की। लेकिन यह रणनीति उलटी पड़ गई क्योंकि तनाव कम होने के बजाय और बढ़ गया। अब पाकिस्तान को पहले से कहीं अधिक कीमत चुकाकर इमरजेंसी LNG खरीदनी पड़ रही है।
आयात में 69% की भारी गिरावट
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, मार्च महीने में देश का LNG आयात केवल 70.2 मिलियन डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 226 मिलियन डॉलर था।
यानी एक साल में LNG आयात मूल्य में करीब 69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण क्षेत्रीय तनाव, सप्लाई में रुकावट और महंगी गैस खरीदने से बचने की नीति रही।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। वैश्विक LNG और कच्चे तेल की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से होकर गुजरती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया की कुल LNG सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या अवरोध वैश्विक ऊर्जा बाजार को तुरंत प्रभावित करता है।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर?
महंगी LNG खरीदने से पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। साथ ही बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं पर भी बोझ बढ़ सकता है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो पाकिस्तान को ऊर्जा संकट, महंगाई और चालू खाते के घाटे जैसी आर्थिक चुनौतियों का और अधिक सामना करना पड़ सकता है।


