भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (EFC) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। यह राशि पहले चरण के 76,000 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है और इसका उद्देश्य देश में चिप निर्माण, सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई गति देना है।
अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। यदि कैबिनेट की स्वीकृति मिल जाती है तो भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार का दूसरा और सबसे बड़ा चरण शुरू हो जाएगा।
Highlights
- ISM 2.0 को ₹1.25 लाख करोड़ के बजट की मंजूरी
- अब केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी का इंतजार
- 2030 तक घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75% भारत में पूरा करने का लक्ष्य
- चिप निर्माण के साथ पूरी सप्लाई चेन को मिलेगा बढ़ावा
- इलेक्ट्रॉनिक्स, AI, EV और डेटा सेंटर सेक्टर को होगा फायदा
पहले चरण से कहीं बड़ा होगा ISM 2.0
सरकार ने वर्ष 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 1.0) की शुरुआत 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ की थी। इस योजना के तहत देश में चिप फैब्रिकेशन, ATMP (Assembly, Testing, Marking & Packaging) और डिजाइन से जुड़ी 10 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी।
अब ISM 2.0 का बजट बढ़ाकर 1.25 लाख करोड़ रुपये किए जाने का मतलब है कि सरकार इस सेक्टर में निवेश की गति को और तेज करना चाहती है। नए चरण में केवल चिप फैक्ट्री ही नहीं बल्कि उससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने पर जोर रहेगा।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
सरकार का मानना है कि सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप फैक्ट्री तक सीमित नहीं होता। इसके साथ दर्जनों अन्य उद्योग भी विकसित होते हैं।
ISM 2.0 के तहत इन क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है—
- इंडस्ट्रियल गैस निर्माता
- स्पेशलिटी केमिकल कंपनियां
- कैपिटल इक्विपमेंट निर्माता
- MSME सप्लायर्स
- इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माता
- पैकेजिंग और टेस्टिंग यूनिट्स
- डिजाइन और रिसर्च कंपनियां
इससे हजारों नई कंपनियों और लाखों रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
2030 तक घरेलू मांग का 75% भारत में पूरा करने का लक्ष्य
भारत अभी अपनी अधिकांश सेमीकंडक्टर जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का लगभग 75% हिस्सा खुद पूरा करे।
यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो—
- आयात पर निर्भरता घटेगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण की लागत कम होगी।
- भारत वैश्विक सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनेगा।
क्यों बढ़ रही है सेमीकंडक्टर की मांग?
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल हो चुका है। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
वर्तमान में—
- भारत में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वार्षिक उत्पादन करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
- AI आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर, 5G नेटवर्क और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
- हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में सेमीकंडक्टर चिप की आवश्यकता होती है।
इसी वजह से सरकार घरेलू चिप निर्माण क्षमता को रणनीतिक प्राथमिकता दे रही है।
तेजी से आगे बढ़ रही हैं सेमीकंडक्टर परियोजनाएं
सरकार के अनुसार ISM 1.0 के तहत स्वीकृत 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
इनमें—
- गुजरात के साणंद में एक यूनिट में पायलट प्रोडक्शन लाइन शुरू हो चुकी है।
- अगले एक वर्ष के भीतर चार और यूनिट्स में उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
इससे भारत में व्यावसायिक स्तर पर चिप निर्माण की शुरुआत और तेज हो सकती है।
वैश्विक कंपनियां भी कर रही हैं निवेश
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कई बड़ी वैश्विक कंपनियां भी निवेश कर रही हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- Applied Materials
- Lam Research
- Merck
- Linde
ये कंपनियां उपकरण, तकनीक, केमिकल्स और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में सहयोग कर रही हैं। इससे भारत को वैश्विक स्तर की तकनीक और निवेश दोनों का लाभ मिलेगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?
हाल के वर्षों में दुनिया ने चिप की कमी का असर ऑटोमोबाइल, मोबाइल, लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में देखा है। ऐसे में किसी भी देश के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
ISM 2.0 के जरिए भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी करना चाहता है बल्कि भविष्य में वैश्विक कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के बजट को मिली मंजूरी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। यदि कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति मिल जाती है तो आने वाले वर्षों में देश में चिप निर्माण, रोजगार, निवेश और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति मिल सकती है। यह पहल भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।

