Jio IPO: भारत के सबसे बड़े आईपीओ की तैयारी में रिलायंस ने अपनाई सीक्रेट रणनीति
नई दिल्ली: देश के सबसे चर्चित और बहुप्रतीक्षित IPO में शामिल जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) की लिस्टिंग अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लेकिन इस IPO की तैयारी सिर्फ वित्तीय या कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इसके लिए एक बेहद गोपनीय आंतरिक अभियान चलाया, जिसका कोडनेम ‘प्रोजेक्ट जुपिटर (Project Jupiter)’ रखा गया था।
इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ Jio Platforms को शेयर बाजार में उतारना नहीं था, बल्कि इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO बनाने की तैयारी करना भी था। पूरी प्रक्रिया को इस तरह संचालित किया गया कि इसकी जानकारी बेहद सीमित लोगों तक ही रहे।
हाईलाइट्स
- जियो IPO की तैयारी का कोडनेम था ‘प्रोजेक्ट जुपिटर’
- रिलायंस ने महीनों तक पूरी प्रक्रिया को रखा गोपनीय
- ईमेल के बजाय प्रिंटेड दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया
- IPO संरचना और नियामकीय नियमों में बदलाव पर भी साथ-साथ काम हुआ
- Jio Platforms की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से अधिक रहने का अनुमान
AGM में संकेत, लेकिन पर्दे के पीछे चल रहा था बड़ा ऑपरेशन
रिलायंस इंडस्ट्रीज की पिछले वर्ष हुई वार्षिक आम बैठक (AGM) में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पहली बार संकेत दिया था कि Jio Platforms को 2026 की पहली छमाही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा।
हालांकि सार्वजनिक घोषणा के साथ-साथ कंपनी के भीतर एक अलग स्तर पर तैयारी चल रही थी। अगले करीब नौ महीनों तक रिलायंस ने नियामकीय मंजूरियों, निवेशकों की सहमति और IPO की संरचना पर एक साथ काम किया।
इसके बाद हालिया AGM में मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms अब पब्लिक लिस्टिंग के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके कुछ समय बाद ही कंपनी ने अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर दिया।
आखिर क्या था ‘प्रोजेक्ट जुपिटर’?
‘प्रोजेक्ट जुपिटर’ रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक इंटरनल कोडनेम था, जिसके तहत Jio Platforms की IPO तैयारी को संचालित किया गया।
इस परियोजना में कंपनी का लक्ष्य था—
- IPO की पूरी रणनीति को गोपनीय रखना
- नियामकीय मंजूरियां समय पर प्राप्त करना
- मौजूदा निवेशकों के साथ हिस्सेदारी को लेकर सहमति बनाना
- IPO के स्ट्रक्चर को अंतिम रूप देना
इस पूरे अभियान की जानकारी केवल रिलायंस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और चुनिंदा इन्वेस्टमेंट बैंकर्स तक ही सीमित रखी गई।
ईमेल से भी बची कंपनी, प्रिंटेड दस्तावेजों का लिया सहारा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रिलायंस ने इस प्रोजेक्ट में डिजिटल रिकॉर्ड बनने से बचने की रणनीति अपनाई।
- ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस
- इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन
- इंटरनल मेमो
- रणनीतिक दस्तावेज
इन सभी को मुख्य रूप से प्रिंटेड कॉपी में साझा किया गया। ईमेल के जरिए संवाद को जानबूझकर बेहद सीमित रखा गया ताकि किसी भी प्रकार की जानकारी समय से पहले सार्वजनिक न हो सके।
किन अधिकारियों ने संभाली कमान?
‘प्रोजेक्ट जुपिटर’ की निगरानी रिलायंस के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने की। इनमें प्रमुख नाम शामिल रहे—
- CFO वी. श्रीकांत
- के.आर. राजा
- जियो के एग्जीक्यूटिव अंशुमान ठाकुर
इनके साथ प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंकर्स भी लगातार इस प्रक्रिया से जुड़े रहे।
निवेशकों की सहमति सबसे बड़ी चुनौती
Jio Platforms में पहले से निवेश कर चुके कई वैश्विक निवेशकों की सहमति हासिल करना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार—
- KKR
- Meta
- Alphabet (Google)
- Abu Dhabi Investment Authority (ADIA)
सहित अन्य निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी में आनुपातिक आधार पर लगभग 8% तक कमी करने पर सहमति दी।
इससे कंपनी को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिली।
SEBI के नियमों में बदलाव से मिली राहत
IPO प्रक्रिया के दौरान नियामकीय स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 5 ट्रिलियन रुपये से अधिक वैल्यूएशन वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों में राहत दी।
नए नियमों के तहत आवश्यक सार्वजनिक हिस्सेदारी की सीमा 5% से घटाकर 2.5% कर दी गई। सरकार ने बाद में इन नियमों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित भी कर दिया, जिससे Jio IPO की राह और आसान हो गई।
IPO की रणनीति भी बदली
शुरुआती योजना के अनुसार यह IPO पूरी तरह Offer For Sale (OFS) मॉडल पर आधारित था।
इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचने वाले थे जबकि कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करती।
लेकिन बाद में बाजार की परिस्थितियों और विदेशी निवेशकों की चिंताओं को देखते हुए रणनीति बदली गई।
अब IPO में Fresh Issue को शामिल किया गया ताकि करीब 4 अरब डॉलर की पूंजी सीधे कंपनी के पास आए और उसका उपयोग भारत में निवेश एवं विस्तार के लिए किया जा सके।
कितनी हो सकती है Jio Platforms की वैल्यूएशन?
19 जून 2026 को कंपनी ने 19 सलाहकारों के साथ अपना DRHP दाखिल किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार Jio Platforms की संभावित वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।
यदि ऐसा होता है तो—
- यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।
- Jio देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
- मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में भी गिनी जाएगी।
आगे निवेशकों की नजर किस पर रहेगी?
अब बाजार की नजर IPO के प्राइस बैंड, इश्यू साइज, सब्सक्रिप्शन डेट और लिस्टिंग टाइमलाइन पर रहेगी। Jio Platforms की मजबूत डिजिटल मौजूदगी, टेलीकॉम कारोबार, AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं में विस्तार को देखते हुए यह IPO भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक घटना माना जा रहा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


