पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को नई प्राथमिकता दी है। सरकार अब देशभर में पांच नए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves – SPR) बनाने की तैयारी कर रही है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की आपातकालीन कच्चे तेल भंडारण क्षमता मौजूदा 9.5 दिनों से बढ़कर करीब 40 दिनों तक पहुंच सकती है।
Highlights
- भारत की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता 9.5 दिन से बढ़कर करीब 40 दिन होगी।
- ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में बनेंगे पांच नए SPR।
- बीकानेर में पहली बार नमक गुफा (Salt Cavern) तकनीक से बनेगा तेल भंडार।
- पश्चिम एशिया संकट के बाद ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का बड़ा फोकस।
- IEA के 90 दिन के लक्ष्य की दिशा में भारत का बड़ा कदम।
नई दिल्ली:
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया के कई देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। तेल आयात पर बड़ी निर्भरता रखने वाला भारत अब भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता का तेजी से विस्तार करने जा रहा है।
सरकार की योजना देश में पांच नए Strategic Petroleum Reserve (SPR) विकसित करने की है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की आपातकालीन कच्चे तेल भंडारण क्षमता लगभग चार गुना तक बढ़ जाएगी। इससे युद्ध, प्रतिबंध, समुद्री मार्गों में बाधा या वैश्विक तेल संकट जैसी परिस्थितियों में देश को बड़ी राहत मिलेगी।
कहां बनेंगे पांच नए रणनीतिक तेल भंडार?
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार जिन पांच स्थानों पर नए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित करने की तैयारी कर रही है, उनमें शामिल हैं—
- ओडिशा का चांदीखोल
- मध्य प्रदेश का बीना
- राजस्थान का बीकानेर
- कर्नाटक का मंगलुरु
- कर्नाटक का पादुर
इन परियोजनाओं का उद्देश्य देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षित तेल भंडारण नेटवर्क तैयार करना है ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भी आपूर्ति प्रभावित न हो।
FY27 तक चांदीखोल परियोजना का ठेका देने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक चांदीखोल परियोजना के निर्माण का ठेका जारी करना है। इसके अलावा बीना और बीकानेर में बनने वाले नए भंडारों के लिए आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन (Detailed Feasibility Study) शुरू किया जाएगा।
इन परियोजनाओं पर अंतिम निवेश निर्णय अध्ययन और पर्यावरणीय मंजूरियों के बाद लिया जाएगा।
बीकानेर में बनेगा भारत का पहला Salt Cavern Oil Storage
राजस्थान का बीकानेर इस योजना का सबसे खास हिस्सा होगा। यहां भारत का पहला रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार Salt Cavern Technology यानी नमक की प्राकृतिक गुफाओं में बनाया जाएगा।
दुनिया के कई विकसित देशों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि—
- निर्माण लागत अपेक्षाकृत कम होती है।
- सुरक्षा अधिक रहती है।
- रखरखाव आसान होता है।
- लंबे समय तक तेल सुरक्षित रखा जा सकता है।
यह तकनीक भारत की ऊर्जा अवसंरचना में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
कितनी होगी नई भंडारण क्षमता?
प्रस्तावित परियोजनाओं की अनुमानित क्षमता इस प्रकार है—
| परियोजना | अनुमानित क्षमता |
|---|---|
| चांदीखोल | लगभग 40 लाख टन |
| बीना | लगभग 50 लाख टन |
| बीकानेर | लगभग 5.6 लाख टन |
| मंगलुरु विस्तार | 17.5 लाख टन |
| अन्य विस्तार | अंतिम मंजूरी के बाद तय होगी |
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
अभी कितनी है भारत की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता?
भारत के पास फिलहाल तीन प्रमुख रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं—
- मंगलुरु (कर्नाटक) – 1.5 मिलियन टन
- पादुर (कर्नाटक) – 2.5 मिलियन टन
- विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) – 1.33 मिलियन टन
इन सभी सुविधाओं का संचालन Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) करती है। यह कंपनी युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति संकट जैसी परिस्थितियों के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
ONGC को भी मिला बड़ा जिम्मा
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ONGC को मंगलुरु में 1.75 मिलियन टन क्षमता वाला नया भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित करने का निर्देश दिया है।
यह पहली बार होगा जब किसी सरकारी तेल कंपनी द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का विकास किया जाएगा। इससे सरकारी कंपनियों की भूमिका भी इस क्षेत्र में मजबूत होगी।
IEA का मानक क्या कहता है?
International Energy Agency (IEA) का मानना है कि प्रत्येक सदस्य देश के पास कम से कम 90 दिनों के शुद्ध तेल आयात के बराबर रणनीतिक भंडार होना चाहिए।
भारत की नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भी उसकी क्षमता लगभग 40 दिनों तक पहुंचेगी। यानी भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से कितना पीछे है भारत?
रणनीतिक तेल भंडारण के मामले में भारत अभी कई एशियाई देशों से पीछे है।
- चीन के पास रणनीतिक और वाणिज्यिक मिलाकर लगभग 1.3 अरब बैरल तेल भंडार है।
- जापान के पास सरकारी रणनीतिक भंडार लगभग 263 मिलियन बैरल है और वाणिज्यिक भंडार जोड़ने पर वह 250 दिनों से अधिक की जरूरत पूरी कर सकता है।
- दक्षिण कोरिया के पास करीब 100 मिलियन बैरल रणनीतिक भंडार है, जबकि कुल आपातकालीन स्टॉक लगभग 200 दिनों के लिए पर्याप्त माना जाता है।
इन देशों की तुलना में भारत अभी शुरुआती विस्तार चरण में है।
पड़ोसी देशों की स्थिति क्या है?
भारत के पड़ोसी देशों में फिलहाल किसी के पास औपचारिक रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व कार्यक्रम नहीं है।
इन देशों में शामिल हैं—
- पाकिस्तान
- बांग्लादेश
- श्रीलंका
- नेपाल
- भूटान
- म्यांमार
ये देश मुख्य रूप से सीमित वाणिज्यिक ईंधन भंडार पर निर्भर रहते हैं और बड़े वैश्विक संकट की स्थिति में उनकी ऊर्जा सुरक्षा अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि पश्चिम एशिया, होर्मुज जलडमरूमध्य या अन्य प्रमुख समुद्री मार्गों में किसी कारण से आपूर्ति बाधित होती है, तो देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
नई रणनीतिक तेल भंडारण परियोजनाएं न केवल ऐसे संकटों के दौरान देश को राहत देंगी बल्कि तेल कीमतों में अचानक उछाल आने पर भी सरकार को बेहतर प्रबंधन का विकल्प उपलब्ध कराएंगी। आने वाले वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।


