नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में पैदा हुआ ऊर्जा संकट अब धीरे-धीरे खत्म होता दिख रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को बताया कि भारत ने इस चुनौतीपूर्ण दौर का सफलतापूर्वक सामना किया और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि भारत के 12 एलपीजी (LPG) जहाज बिना किसी टोल या रुकावट के होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं, जिससे देश में गैस की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
सरकार के मुताबिक, संकट के दौरान देश में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई आपातकालीन कदम उठाए गए। इनमें रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाने से लेकर अमेरिका समेत कई देशों से अतिरिक्त गैस की व्यवस्था करना शामिल रहा।
रिफाइनरियों में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया एलपीजी उत्पादन
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि जिन रिफाइनरियों में पहले कभी एलपीजी का उत्पादन नहीं होता था, वहां भी बेहद कम समय में तकनीकी बदलाव कर उत्पादन शुरू कराया गया। इसका बड़ा असर यह हुआ कि देश का एलपीजी उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन पहुंच गया। यानी उत्पादन में करीब 54 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार का कहना है कि इस फैसले ने घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ा।
अमेरिका समेत कई देशों से बढ़ाई गैस की सप्लाई
संकट के दौरान भारत ने सिर्फ घरेलू उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय आयात के स्रोतों को भी तेजी से विविधतापूर्ण बनाया। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत ने अल्जीरिया, जापान और कनाडा जैसे देशों के साथ एलपीजी की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की।
इसके अलावा, घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका से अतिरिक्त एलपीजी की खेप भी मंगाई गई। सरकार का कहना है कि इसी रणनीति की वजह से वैश्विक आपूर्ति संकट का असर भारतीय उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।
चार महीने तक बनी रही चुनौती
मंत्री ने बताया कि ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर जोखिम बढ़ गया था। करीब चार महीने तक बनी इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया।
हालांकि भारत ने पहले से तैयार रणनीति के तहत ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखा। कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता, ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था ने इस संकट से उबरने में मदद की।
कालाबाजारी रोकने के लिए अपनाए डिजिटल उपाय
सरकार ने संकट के दौरान सिर्फ आपूर्ति बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि एलपीजी की कालाबाजारी रोकने पर भी विशेष ध्यान दिया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड को अनिवार्य बनाया गया, ताकि गैस की चोरी और हेराफेरी पर रोक लगाई जा सके।
इसके साथ ही मार्च में ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की गई, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम करने का प्रयास किया गया।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री का कहना है कि भारत ने इस संकट से यह साबित किया है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल आयात पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात के नए स्रोत विकसित करने और मजबूत ऊर्जा अवसंरचना तैयार करने की रणनीति भविष्य में भी देश को वैश्विक संकटों से बचाने में मदद करेगी।
सरकार का दावा है कि इन सभी उपायों की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद देश में रसोई गैस और ईंधन की आपूर्ति बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रही।


