नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल संघर्ष से पैदा हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक (Anarock) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q2 FY26) में देश के सात प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों (Residential Units) की बिक्री घटकर 90,715 यूनिट रह गई। यह जनवरी 2023 के बाद सबसे कम बिक्री का आंकड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता, सप्लाई चेन में व्यवधान और निवेशकों के कमजोर होते भरोसे ने घर खरीदने वाले ग्राहकों के फैसलों को प्रभावित किया है। हालांकि, दूसरी ओर डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने की रफ्तार धीमी नहीं की और इस अवधि में नई लॉन्चिंग में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एनारॉक रिपोर्ट में क्या सामने आया?
एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में देश के शीर्ष सात शहरों में कुल 90,715 आवासीय यूनिट्स की बिक्री हुई। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई 96,285 यूनिट्स की बिक्री की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम है।
अगर तिमाही आधार (Quarter-on-Quarter) पर देखें तो बिक्री में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन पिछले दो वर्षों के मुकाबले कमजोर माना जा रहा है और जनवरी 2023 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
पूरे वित्त वर्ष के दौरान कुल 4,04,005 रेजिडेंशियल यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई, जो FY23 के बाद सबसे कम आंकड़ा है।
युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता ने बिगाड़ा माहौल
एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने रियल एस्टेट बाजार के माहौल को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक सप्लाई चेन की दिक्कतें और आईटी-आईटीईएस सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी अनिश्चितताओं ने संभावित खरीदारों को सतर्क बना दिया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रीमियम हाउसिंग, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) आधारित रोजगार केंद्रों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर वाले क्षेत्रों में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
मुंबई और बेंगलुरु बने सबसे बड़े बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और बेंगलुरु ने इस तिमाही में सबसे अधिक आवासीय बिक्री दर्ज की।
दोनों शहरों में मिलाकर 43,995 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो देश के शीर्ष सात शहरों की कुल बिक्री का 48 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।
सालाना आधार पर केवल तीन शहरों में बिक्री बढ़ी—
- कोलकाता – 10% वृद्धि
- हैदराबाद – 2% वृद्धि
- बेंगलुरु – 1% वृद्धि
वहीं पुणे में सबसे अधिक 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
नए प्रोजेक्ट लॉन्च में दिखी मजबूती
जहां एक ओर मकानों की बिक्री घटी, वहीं दूसरी ओर डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने की रफ्तार बरकरार रखी।
Q2 FY26 में लगभग 1,06,000 नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह संख्या 98,625 यूनिट्स थी। यानी नई लॉन्चिंग में 7 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई।
नई सप्लाई में भी MMR और बेंगलुरु सबसे आगे रहे। दोनों शहरों ने मिलकर कुल नई इन्वेंट्री का करीब 53 प्रतिशत योगदान दिया।
- MMR में नई सप्लाई सालाना आधार पर 23% बढ़ी।
- बेंगलुरु में नई लॉन्चिंग में 41% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि तिमाही आधार पर दोनों शहरों में नई सप्लाई में कुछ गिरावट भी देखने को मिली।
घरों की कीमतें लगातार बढ़ रहीं
बिक्री में गिरावट के बावजूद मकानों की कीमतों में नरमी नहीं आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सात शहरों में औसत आवासीय कीमतों में तिमाही आधार पर लगभग 1 प्रतिशत और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे अधिक सालाना मूल्य वृद्धि दिल्ली-एनसीआर में हुई, जहां औसत कीमतें करीब 13 प्रतिशत बढ़ीं। वहीं बेंगलुरु में आवासीय कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में देखने वाली दोहरे अंक (Double Digit) की मूल्य वृद्धि की तुलना में इस बार कीमतों की रफ्तार कुछ धीमी रही।
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और वैश्विक आर्थिक माहौल स्थिर रहता है तो आने वाली तिमाहियों में रियल एस्टेट सेक्टर में मांग दोबारा मजबूत हो सकती है।
इसके अलावा ब्याज दरों में संभावित नरमी, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो विस्तार, एक्सप्रेसवे परियोजनाएं और प्रीमियम हाउसिंग की बढ़ती मांग आने वाले महीनों में बाजार को सहारा दे सकती हैं।
निष्कर्ष
एनारॉक की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के रियल एस्टेट बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। घरों की बिक्री में गिरावट जरूर आई है, लेकिन डेवलपर्स का भरोसा अभी भी कायम है और नए प्रोजेक्ट लगातार लॉन्च किए जा रहे हैं। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो आने वाले समय में आवासीय बाजार दोबारा गति पकड़ सकता है।


