नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों को पीछे छोड़ते हुए भारत फिर से दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बन गया है। खास बात यह है कि सोमवार को सेंसेक्स में करीब 380 अंकों की गिरावट के बावजूद बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर बना रहा।
हाल के महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों में जबरदस्त तेजी के बाद ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में मुनाफावसूली देखने को मिली। इसका सीधा फायदा भारतीय बाजार को मिला और वह एक बार फिर वैश्विक रैंकिंग में पांचवें स्थान पर पहुंच गया।
भारत ने फिर बनाई टॉप-5 में जगह
ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल शेयर बाजार मार्केटकैप 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। इसके मुकाबले ताइवान का मार्केटकैप करीब 4.97 ट्रिलियन डॉलर और दक्षिण कोरिया का 4.66 ट्रिलियन डॉलर रह गया है।
हालांकि अमेरिका और चीन की वैश्विक रैंकिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन एशिया के अन्य प्रमुख बाजारों में गिरावट ने भारत को आगे निकलने का मौका दिया।
क्यों गिरे ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजार?
विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में रिकॉर्ड तेजी आई थी। निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे दोनों देशों के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली।
इसी दौरान भारतीय बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही, जिससे भारत की वैश्विक रैंकिंग बेहतर हो गई।
जून में भारत का प्रदर्शन सबसे मजबूत
जून महीने में दुनिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई।
प्रमुख बाजारों का प्रदर्शन
| देश | मार्केटकैप में बदलाव |
|---|---|
| भारत | +2.75% |
| दक्षिण कोरिया | -4.7% |
| ताइवान | -2.3% |
| जापान | -1% |
| हांगकांग | -8.3% |
| कनाडा | -3% |
| ब्रिटेन | -2% |
| फ्रांस | -1.1% |
| जर्मनी | -5.6% |
इन आंकड़ों से साफ है कि जहां अधिकांश वैश्विक बाजार दबाव में रहे, वहीं भारतीय बाजार ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।
भारतीय शेयर बाजार में मजबूती की वजह
विश्लेषकों के अनुसार भारतीय बाजार में तेजी के पीछे कई अहम कारण हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होता है, जिसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ता है।
2. वैल्यूएशन हुआ आकर्षक
निफ्टी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पहले करीब 24 गुना तक पहुंच गया था, जो अब घटकर लगभग 18 गुना रह गया है। इससे भारतीय शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक नजर आने लगे हैं।
3. विदेशी निवेशकों की वापसी
एफआईआई (Foreign Institutional Investors) लगातार भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं। मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर राजनीतिक माहौल और बेहतर कॉरपोरेट आय भारतीय बाजार को वैश्विक निवेशकों के लिए पसंदीदा बना रही है।
4. मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था
भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ता उपभोग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और कॉरपोरेट सेक्टर की मजबूत बैलेंस शीट भी बाजार को समर्थन दे रही है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
भारत का फिर से दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बनना केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत भी है। हालांकि बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं, लेकिन मजबूत आर्थिक आधार और दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं भारतीय इक्विटी बाजार को अन्य उभरते बाजारों की तुलना में बेहतर स्थिति में रखती हैं।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर साबित किया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी उसकी स्थिति मजबूत बनी हुई है। ताइवान और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़कर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बनना भारत की आर्थिक मजबूती और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत है। यदि विदेशी निवेश का प्रवाह और घरेलू आर्थिक गतिविधियां इसी तरह मजबूत बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में भारतीय बाजार नई ऊंचाइयों को छू सकता है।


