नई दिल्ली: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने और चांदी के निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार सुबह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सोना करीब ₹2,000 प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी में ₹6,500 प्रति किलोग्राम की तेज गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रही कीमती धातुओं में अचानक आई इस कमजोरी ने निवेशकों को चौंका दिया है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे केवल घरेलू नहीं बल्कि कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जबकि अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने यह आशंका बढ़ा दी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेगा। इन दोनों कारकों का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
MCX पर कितना टूटा सोना और चांदी?
सोमवार सुबह एमसीएक्स पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में तेज बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सोने का भाव लगभग ₹2,000 तक फिसल गया। इसी तरह चांदी के जुलाई वायदा अनुबंध में भी भारी दबाव देखने को मिला और कीमत करीब ₹6,500 प्रति किलोग्राम तक नीचे आ गई।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से सोना और चांदी लगातार तेजी के दौर में थे। ऐसे में निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली भी गिरावट का एक बड़ा कारण बनी है। जब बाजार में कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर पहुंचती हैं तो कई निवेशक अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर देते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
कच्चे तेल की तेजी ने कैसे बिगाड़ा खेल?
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में सोमवार को मजबूत उछाल देखने को मिला। तेल महंगा होने का सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ता है क्योंकि परिवहन, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाती है।
जब निवेशकों को लगता है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को कम करने में जल्दबाजी नहीं करते। यही वजह है कि तेल की कीमतों में आई तेजी ने सोने और चांदी के बाजार में दबाव पैदा किया है।
अमेरिकी आंकड़ों ने बढ़ाई ब्याज दरों की चिंता
हाल ही में अमेरिका से जारी रोजगार और सेवा क्षेत्र से जुड़े कई आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। मजबूत आर्थिक गतिविधि यह संकेत देती है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती की तत्काल जरूरत कम हो जाती है।
ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है। इसकी वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता, जबकि ऊंची ब्याज दरों के दौर में निवेशकों को बॉन्ड और अन्य निश्चित आय वाले साधनों में बेहतर रिटर्न मिलता है। परिणामस्वरूप सोने में निवेश की मांग कुछ समय के लिए कमजोर पड़ सकती है।
डॉलर की मजबूती का भी दिखा असर
अमेरिकी आंकड़ों के मजबूत रहने से डॉलर इंडेक्स में भी मजबूती देखने को मिली है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है और कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल डॉलर की दिशा और फेडरल रिजर्व की आगामी टिप्पणियां सोने और चांदी की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
क्या निवेशकों को घबराने की जरूरत है?
बाजार जानकारों के अनुसार मौजूदा गिरावट को लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारक अभी भी सोने को समर्थन दे रहे हैं।
हालांकि अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने की बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।
शादी-ब्याह के सीजन के लिए राहत
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है जो शादी-ब्याह या अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों के कारण मांग पर असर पड़ रहा था। अब कीमतों में आई नरमी से ज्वेलरी बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि यदि कीमतें कुछ दिनों तक इन स्तरों पर बनी रहती हैं तो खुदरा मांग में सुधार देखने को मिल सकता है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की नीति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी। यदि तेल की कीमतों में और तेजी आती है या वैश्विक तनाव बढ़ता है तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
दूसरी ओर यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक से ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं तो सोने और चांदी में फिर से खरीदारी लौट सकती है। इसलिए निवेशकों को वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।
कुल मिलाकर सोमवार को सोने और चांदी में आई तेज गिरावट ने बाजार का रुख बदल दिया है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमती धातुओं की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है और बाजार की अगली दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी।


