दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। इस बार चर्चा आर्थिक विकास दर, शेयर बाजार या विदेशी निवेश की नहीं, बल्कि भरोसे (Trust) की है। Edelman Trust Index 2026 में भारत 74 अंकों के साथ दुनिया का तीसरा सबसे भरोसेमंद देश बनकर उभरा है। दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इस सूची में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है।
भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस रैंकिंग को साझा करते हुए बताया कि चीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 80 अंकों के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं, जबकि भारत 74 अंकों के साथ उनके ठीक पीछे है।
यह रैंकिंग केवल एक सर्वे नहीं है। वैश्विक निवेशक, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, नीति निर्माता और अर्थशास्त्री इसे किसी देश के सामाजिक और संस्थागत स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक मानते हैं।
क्या है Edelman Trust Barometer?
Edelman Trust Barometer दुनिया की प्रमुख जनसंपर्क और संचार सलाहकार कंपनी Edelman द्वारा हर साल जारी किया जाने वाला वैश्विक सर्वे है। यह सर्वे यह मापता है कि किसी देश के लोग चार प्रमुख संस्थानों पर कितना भरोसा करते हैं।
इन चार स्तंभों में शामिल हैं:
- सरकार (Government)
- बिजनेस (Business)
- मीडिया (Media)
- गैर-सरकारी संगठन यानी NGOs
सर्वे में लोगों से पूछा जाता है कि क्या वे इन संस्थानों पर “सही काम करने” के लिए भरोसा करते हैं। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर एक औसत स्कोर तैयार किया जाता है जिसे Trust Index Score कहा जाता है।
भारत को 74 अंक क्यों मिले?
भारत का 74 का स्कोर यह दर्शाता है कि देश में बड़ी संख्या में लोग सरकारी संस्थाओं, निजी कंपनियों, मीडिया और सामाजिक संगठनों पर भरोसा करते हैं। यह स्कोर केवल भावनात्मक विश्वास को नहीं दर्शाता बल्कि यह भी संकेत देता है कि लोग मानते हैं कि ये संस्थान उनकी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल गवर्नेंस, आधार आधारित सेवाओं, यूपीआई, जीएसटी नेटवर्क, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। कई विश्लेषक मानते हैं कि इन पहलों ने संस्थानों के प्रति जनता का विश्वास मजबूत किया है।
2026 Edelman Trust Index में कौन-कौन से देश शीर्ष पर रहे?
2026 की रैंकिंग में एशियाई देशों का दबदबा देखने को मिला।
| रैंक | देश | ट्रस्ट स्कोर |
|---|---|---|
| 1 | चीन | 80 |
| 1 | UAE | 80 |
| 2 | भारत | 74 |
| 3 | इंडोनेशिया | 73 |
| 3 | सऊदी अरब | 73 |
| 4 | नाइजीरिया | 72 |
| 5 | अमेरिका | 47 |
| 6 | स्पेन | 45 |
| 7 | जर्मनी | 44 |
| 8 | ब्रिटेन | 44 |
| 9 | फ्रांस | 42 |
| 10 | जापान | 38 |
रैंकिंग से स्पष्ट है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उभरती अर्थव्यवस्थाओं में संस्थानों के प्रति भरोसा अपेक्षाकृत अधिक है।
अमेरिका और यूरोप के स्कोर इतने कम क्यों हैं?
अमेरिका को केवल 47 अंक मिले हैं, जबकि ब्रिटेन और जर्मनी का स्कोर 44 रहा। फ्रांस 42 अंकों पर और जापान 38 अंकों के साथ सूची में सबसे नीचे रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- राजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि
- सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार
- पारंपरिक मीडिया पर घटता भरोसा
- सरकारी संस्थाओं को लेकर बढ़ती आलोचना
- आर्थिक असमानता और सामाजिक तनाव
Edelman की पिछली रिपोर्टों में भी यह बात सामने आती रही है कि कई विकसित देशों में नागरिकों का संस्थानों पर भरोसा लगातार कमजोर हुआ है।
चीन और UAE शीर्ष पर क्यों हैं?
चीन और UAE दोनों को 80 अंक प्राप्त हुए हैं। इन देशों में सरकार, व्यवसाय और सार्वजनिक संस्थानों के प्रति अपेक्षाकृत उच्च विश्वास दर्ज किया गया।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि विभिन्न देशों की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्थाएं अलग होती हैं। इसलिए ट्रस्ट स्कोर की तुलना करते समय स्थानीय परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।
चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि UAE ने पिछले दशक में खुद को वैश्विक निवेश, व्यापार और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया है। इन दोनों देशों में संस्थागत स्थिरता को उच्च स्कोर का एक कारण माना जा रहा है।
ट्रस्ट स्कोर का अर्थव्यवस्था से क्या संबंध है?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर किसी देश में भरोसे का स्तर ऊंचा होने से क्या फर्क पड़ता है?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भरोसा किसी भी अर्थव्यवस्था का अदृश्य लेकिन बेहद महत्वपूर्ण आधार होता है।
जब लोगों को सरकार पर भरोसा होता है तो वे नई नीतियों को अधिक आसानी से स्वीकार करते हैं। जब निवेशकों को बिजनेस वातावरण पर भरोसा होता है तो वे पूंजी निवेश बढ़ाते हैं। जब लोगों को मीडिया पर भरोसा होता है तो गलत सूचनाओं का प्रभाव कम होता है।
उच्च ट्रस्ट स्कोर वाले देशों में आमतौर पर:
- निवेश आकर्षित करने की क्षमता बेहतर होती है।
- आर्थिक सुधार लागू करना आसान होता है।
- संकट के समय सामाजिक सहयोग बढ़ता है।
- उपभोक्ता विश्वास मजबूत रहता है।
- उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
भारत के लिए इस रैंकिंग का क्या मतलब है?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ऐसे समय में ट्रस्ट इंडेक्स में तीसरा स्थान मिलना केवल एक प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं है।
यह रैंकिंग विदेशी निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत हो सकती है। जब किसी देश में संस्थानों पर जनता का भरोसा मजबूत होता है तो निवेशकों को भी दीर्घकालिक स्थिरता का संकेत मिलता है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ट्रस्ट इंडेक्स किसी देश की आर्थिक ताकत या प्रति व्यक्ति आय का प्रत्यक्ष मापदंड नहीं है। यह केवल लोगों के विश्वास के स्तर को दर्शाता है। इसलिए इसे अन्य आर्थिक संकेतकों के साथ मिलाकर देखना चाहिए।
क्या केवल भरोसा ही विकास की गारंटी है?
नहीं। भरोसा विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार जरूर है, लेकिन अकेले इससे आर्थिक सफलता सुनिश्चित नहीं होती।
किसी देश को मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के लिए निवेश, रोजगार, उत्पादकता, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी लगातार सुधार करना होता है। फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि किसी समाज में संस्थानों पर भरोसा मजबूत हो तो विकास की राह अपेक्षाकृत आसान हो जाती है।
निष्कर्ष
Edelman Trust Index 2026 में भारत का तीसरे स्थान पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि देश में सरकार, बिजनेस, मीडिया और सामाजिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा वैश्विक औसत से काफी बेहतर है। चीन और UAE संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसे विकसित देशों के स्कोर अपेक्षाकृत कम रहे।
यह रैंकिंग केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि किसी देश की सामाजिक और संस्थागत विश्वसनीयता आर्थिक विकास, निवेश और नीति निर्माण में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती है। भारत के लिए यह उपलब्धि सकारात्मक संकेत है, लेकिन इस भरोसे को बनाए रखना और मजबूत करना आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण होगा।


