एशिया के चावल बाजार में एक बार फिर मौसम सबसे बड़ा खिलाड़ी बनता नजर आ रहा है। संभावित अल नीनो (El Nino) प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं ने प्रमुख चावल उत्पादक देशों के बाजारों में हलचल बढ़ा दी है। वियतनाम में निर्यात कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जबकि बांग्लादेश में भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन घटनाओं ने वैश्विक चावल बाजार को सतर्क कर दिया है क्योंकि एशिया दुनिया के अधिकांश चावल उत्पादन और निर्यात का केंद्र है।
हालांकि फिलहाल भारत में चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन यदि मौसम संबंधी चुनौतियां लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या एशिया में शुरू हुई यह समस्या आगे चलकर वैश्विक खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती है?
एशिया में मौसम बना चिंता का कारण, चावल बाजार पर बढ़ा दबाव
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने हाल ही में संकेत दिया है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना काफी अधिक है। संगठन के अनुसार इस अवधि में इसके बनने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत और नवंबर तक बने रहने की संभावना करीब 90 प्रतिशत है।
अल नीनो एक ऐसी मौसमीय स्थिति है जो दुनिया के कई हिस्सों में वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करती है। एशिया में इसका असर अक्सर कम बारिश, सूखे और कृषि उत्पादन में गिरावट के रूप में दिखाई देता है। चावल जैसी पानी पर निर्भर फसलों के लिए यह विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है।
इसी आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापारी पहले से ही सतर्क हो गए हैं और संभावित उत्पादन संकट को ध्यान में रखते हुए कीमतों में तेजी दिखाई देने लगी है।
वियतनाम में चावल की कीमतों में आई तेजी
दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल वियतनाम में इस सप्ताह चावल की निर्यात कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वियतनाम के 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल की कीमत बढ़कर 415 से 420 डॉलर प्रति टन पहुंच गई है, जबकि पिछले सप्ताह यह 405 से 410 डॉलर प्रति टन के बीच थी।
यह बढ़ोतरी केवल मांग के कारण नहीं बल्कि भविष्य में संभावित आपूर्ति जोखिम को लेकर बाजार की चिंता को भी दर्शाती है। वियतनाम पहले भी सूखे और मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना कर चुका है, इसलिए वहां के व्यापारी अल नीनो के प्रभाव को लेकर अधिक संवेदनशील हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई महीने में वियतनाम ने लगभग 9.25 लाख टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। वहीं जनवरी से मई के बीच कुल निर्यात 43 लाख टन तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य नहीं रहा तो आने वाले महीनों में वियतनाम के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है और इससे वैश्विक कीमतों में और तेजी आ सकती है।
बांग्लादेश में गर्मी और बारिश ने बढ़ाई परेशानी
वियतनाम के विपरीत बांग्लादेश पहले से ही मौसम संबंधी नुकसान का सामना कर रहा है। देश के कई हिस्सों में चल रही हीटवेव ने धान की कटाई प्रक्रिया को प्रभावित किया है। किसानों का कहना है कि अत्यधिक तापमान के कारण पौधों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे पैदावार पर असर पड़ रहा है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब प्री-मानसून की भारी बारिश ने खेतों को नुकसान पहुंचाया। स्थानीय कृषि अधिकारियों के अनुसार दो लाख टन से अधिक चावल की फसल प्रभावित हुई है। यह नुकसान ऐसे समय हुआ है जब देश पहले से खाद्य सुरक्षा और महंगाई की चुनौतियों का सामना कर रहा है।
बांग्लादेश में उत्पादन घटने का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है। यदि आने वाले महीनों में स्थिति नहीं सुधरती है तो सरकार को आयात बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है।
भारत में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
एशिया के अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति फिलहाल काफी मजबूत दिखाई दे रही है। पर्याप्त सरकारी भंडार, बेहतर आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत उत्पादन आधार के कारण घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
भारतीय 5 प्रतिशत ब्रोकन परबॉयल्ड चावल की कीमत 337 से 345 डॉलर प्रति टन के बीच बनी हुई है। वहीं 5 प्रतिशत ब्रोकन व्हाइट राइस का भाव 338 से 344 डॉलर प्रति टन के आसपास है।
निर्यातकों का कहना है कि भारत के पास अन्य प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में अधिक उपलब्ध स्टॉक है। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय कीमतों पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
इसके अलावा भारत में खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं और मानसून की प्रगति पर सभी की नजर है। यदि मानसून सामान्य रहता है तो भारत आने वाले समय में भी वैश्विक बाजार को स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
थाईलैंड में भी मजबूत बने हुए हैं दाम
दुनिया के दूसरे बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल थाईलैंड में भी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वहां 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल का भाव लगभग 450 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है।
बैंकॉक के व्यापारियों के अनुसार टूटे चावल का उपयोग पशु आहार उद्योग में भी होता है। इस क्षेत्र में मांग बढ़ने से उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है, जिसका असर चावल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
हालांकि थाईलैंड के बाजार की नजर अब नई फसल पर है। अगले कुछ महीनों में उत्पादन की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अल नीनो का असर कितना गंभीर रहने वाला है।
क्या भारत में भी बढ़ सकते हैं चावल के दाम?
फिलहाल भारत में चावल की कीमतों को लेकर घबराने की कोई बड़ी वजह नहीं दिखाई देती। सरकारी भंडार पर्याप्त है और निर्यात भी संतुलित स्तर पर बना हुआ है। लेकिन वैश्विक बाजार में यदि वियतनाम, बांग्लादेश और थाईलैंड जैसे देशों में उत्पादन प्रभावित होता है तो अंतरराष्ट्रीय मांग का दबाव भारत पर बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में भारतीय निर्यातकों को बेहतर कीमत मिलने लगेगी, जिससे घरेलू बाजार पर भी कुछ असर देखने को मिल सकता है। हालांकि सरकार के पास खाद्यान्न प्रबंधन और निर्यात नीति के माध्यम से कीमतों को नियंत्रित करने के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।
आगे क्या रहेगा सबसे बड़ा फैक्टर?
विशेषज्ञों के अनुसार अगले तीन से चार महीने चावल बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। इस दौरान मानसून की स्थिति, अल नीनो की तीव्रता और प्रमुख उत्पादक देशों की फसल की वास्तविक स्थिति तय करेगी कि कीमतें किस दिशा में जाएंगी।
यदि अल नीनो का प्रभाव अनुमान से अधिक गंभीर हुआ तो वैश्विक चावल बाजार में आपूर्ति संकट पैदा हो सकता है। वहीं यदि मौसम सामान्य रहा तो वर्तमान तेजी सीमित रह सकती है।
फिलहाल भारत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है, लेकिन वैश्विक कृषि बाजार में होने वाले बदलावों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा क्योंकि चावल केवल एक फसल नहीं बल्कि एशिया के अरबों लोगों की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।


