नई दिल्ली: कभी सिर्फ घरेलू उपयोग तक सीमित माने जाने वाले इलेक्ट्रिक चूल्हे अब होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। कुछ महीने पहले तक इसे केवल आपातकालीन विकल्प माना जाता था, लेकिन एलपीजी सिलेंडरों की कमी और बढ़ती लागत ने आतिथ्य उद्योग को नई दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अब हालात ऐसे हैं कि कई होटल और रेस्टोरेंट मालिक बिजली से चलने वाले स्टोव, इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक ग्रिडल और फ्रायर को अपने नियमित संचालन का हिस्सा बना चुके हैं।
दरअसल, वर्ष 2026 की शुरुआत में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े व्यवधानों के कारण भारत में एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई। कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी आने लगी और उनकी कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। इसका सबसे अधिक असर होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ा, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में गैस की आवश्यकता होती है।
एलपीजी संकट के दौरान शुरू हुआ बदलाव
जब एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई तो कई कारोबारियों के सामने उत्पादन जारी रखने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे में उन्होंने अस्थायी समाधान के तौर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का इस्तेमाल शुरू किया। शुरुआत में इसे केवल संकट के समय का विकल्प माना गया, लेकिन धीरे-धीरे इसके फायदे सामने आने लगे।
दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने इंडक्शन आधारित कुकिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक ओवन और हाई-पावर इलेक्ट्रिक स्टोव का उपयोग बढ़ा दिया। इससे उन्हें गैस आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिली।
कारोबारियों को क्यों पसंद आने लगा इलेक्ट्रिक स्टोव?
रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि आधुनिक इलेक्ट्रिक स्टोव पहले की तुलना में काफी उन्नत हो चुके हैं। हाई-पावर इंडक्शन यूनिट्स और कमर्शियल इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम तेजी से गर्म होते हैं और तापमान को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
दिल्ली के एक रेस्टोरेंट मालिक के अनुसार, शुरुआत में उन्हें लगा था कि इलेक्ट्रिक स्टोव बड़े पैमाने की कुकिंग के लिए उपयुक्त नहीं होंगे। हालांकि कुछ महीनों के उपयोग के बाद उन्होंने पाया कि उचित क्षमता वाले उपकरणों के साथ खाना बनाने की गति और गुणवत्ता पर कोई विशेष असर नहीं पड़ता।
लागत में भी दिख रहा फायदा
होटल उद्योग के कई प्रतिनिधियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बिजली आधारित कुकिंग सिस्टम कई मामलों में कॉमर्शियल एलपीजी से सस्ते साबित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती निवेश जरूर अधिक होता है क्योंकि इंडक्शन रेंज, इलेक्ट्रिक फ्रायर, ग्रिडल और वायरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना पड़ता है। लेकिन लंबे समय में परिचालन लागत कम हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बिजली की दरें अपेक्षाकृत स्थिर हैं।
इसके अलावा गैस सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी और स्टोरेज से जुड़ी परेशानियां भी काफी हद तक समाप्त हो जाती हैं।
40% से 80% तक बिजली पर निर्भरता
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कई होटल और रेस्टोरेंट अब अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 40% से 80% हिस्सा बिजली आधारित उपकरणों से पूरा कर रहे हैं। कुछ प्रतिष्ठानों ने हाइब्रिड मॉडल अपनाया है, जहां गैस और बिजली दोनों का उपयोग किया जाता है।
इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी एक ऊर्जा स्रोत में बाधा आने पर व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित नहीं होता। यही वजह है कि कई कारोबारी इसे भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित रणनीति मान रहे हैं।
पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहतर विकल्प
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली का उत्पादन स्वच्छ स्रोतों से हो रहा हो तो इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद कर सकते हैं। भारत में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक किचन का महत्व और बढ़ सकता है।
इसके अलावा रसोई में खुली आग की अनुपस्थिति से सुरक्षा जोखिम भी कम होते हैं। गैस रिसाव और सिलेंडर दुर्घटनाओं की आशंका घटने के कारण कई होटल मालिक इसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
क्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी एलपीजी पर निर्भरता?
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में एलपीजी पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। बड़े होटल, औद्योगिक किचन और भारी उत्पादन वाली इकाइयों में गैस की भूमिका बनी रहेगी। हालांकि बिजली आधारित उपकरणों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा, लागत नियंत्रण और तकनीकी प्रगति को देखते हुए यह बदलाव केवल अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक ट्रेंड बन सकता है।
निष्कर्ष
एलपीजी संकट के दौरान मजबूरी में अपनाया गया इलेक्ट्रिक स्टोव अब होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए एक व्यवहारिक और किफायती विकल्प बनता जा रहा है। बढ़ती गैस कीमतों, आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं और आधुनिक इलेक्ट्रिक उपकरणों की उपलब्धता ने इस बदलाव को गति दी है। आने वाले वर्षों में भारत के आतिथ्य उद्योग में बिजली आधारित कुकिंग सिस्टम की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।


