सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की जलविद्युत कंपनी NHPC में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस कदम के तहत सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए कंपनी के शेयर निवेशकों को बाजार भाव से करीब 8 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध करा रही है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों में सरकार समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी कम करती है और इसी क्रम में NHPC का यह OFS निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
मंगलवार से शुरू हुए इस ऑफर के तहत सरकार पहले चरण में 3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। यदि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग आती है तो ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 3 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है। इस तरह कुल 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में उतारी जाएगी।
कितनी कीमत पर मिल रहे हैं शेयर?
सरकार ने NHPC OFS के लिए न्यूनतम मूल्य 71 रुपये प्रति शेयर तय किया है। सोमवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 77.19 रुपये पर बंद हुआ था। इस हिसाब से निवेशकों को लगभग 8 प्रतिशत का डिस्काउंट मिल रहा है।
हालांकि केवल डिस्काउंट देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं माना जाता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, भविष्य की संभावनाओं और सेक्टर की स्थिति को भी समझना चाहिए।
सरकारी खजाने में आएंगे 4,200 करोड़ रुपये
OFS के जरिए सरकार 60 करोड़ से अधिक शेयर बेचने जा रही है। यदि पूरा इश्यू सब्सक्राइब हो जाता है तो सरकार को लगभग 4,200 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं। यह राशि सीधे सरकार को जाएगी, कंपनी को नहीं।
सरकार की विनिवेश रणनीति का मुख्य उद्देश्य संसाधन जुटाना और सूचीबद्ध कंपनियों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना है। इसके साथ ही सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जाता है।
NHPC क्या करती है?
NHPC देश की प्रमुख जलविद्युत उत्पादन कंपनियों में से एक है। कंपनी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन का काम करती है। हाल के वर्षों में कंपनी ने सौर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी विस्तार शुरू किया है।
भारत में स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए NHPC जैसी कंपनियां ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यही कारण है कि कई निवेशक इसे लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से भी देखते हैं।
रिटेल निवेशकों के लिए कब खुला है OFS?
OFS प्रक्रिया में पहले दिन गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद दूसरे दिन खुदरा (Retail) निवेशकों के लिए ऑफर खुलता है।
- 2 जून: गैर-खुदरा निवेशकों के लिए
- 3 जून: खुदरा निवेशकों के लिए
जो निवेशक इस ऑफर में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें अपने ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म के OFS सेक्शन के माध्यम से आवेदन करना होगा।
OFS और IPO में क्या अंतर है?
कई निवेशक OFS और IPO को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है।
IPO के जरिए कंपनी पहली बार जनता से पूंजी जुटाती है और पैसा कंपनी के पास जाता है। दूसरी तरफ OFS में प्रमोटर या सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और बिक्री से प्राप्त राशि उन्हें मिलती है, कंपनी को नहीं।
इसलिए OFS का कंपनी की बैलेंस शीट पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से शेयर की लिक्विडिटी में सुधार हो सकता है।
निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
NHPC का OFS डिस्काउंट पर जरूर उपलब्ध है, लेकिन निवेशकों को केवल कम कीमत देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। कंपनी की आय, लाभप्रदता, डिविडेंड रिकॉर्ड, भविष्य की परियोजनाएं और बिजली क्षेत्र की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशक किसी भी OFS को कंपनी के मूलभूत पक्षों के आधार पर ही देखें। डिस्काउंट केवल अतिरिक्त लाभ का अवसर हो सकता है, निवेश का एकमात्र आधार नहीं।
निष्कर्ष
NHPC OFS निवेशकों को बाजार भाव से कम कीमत पर शेयर खरीदने का मौका दे रहा है। सरकार की इस हिस्सेदारी बिक्री से करीब 4,200 करोड़ रुपये जुटने की उम्मीद है। हालांकि निवेशकों को आवेदन करने से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन और अपने निवेश लक्ष्यों का मूल्यांकन जरूर करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।


