Market Mantra: वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही (Q1) के नतीजों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी निवेश करना चाहिए या कुछ समय इंतजार करना बेहतर रहेगा। इस पर LIC म्यूचुअल फंड के CIO (इक्विटी) सुधांशु अस्थाना ने निवेशकों के लिए अहम सलाह दी है। उनका मानना है कि 3 से 6 महीने के निवेश नजरिए के साथ बाजार में बने रहना बेहतर रणनीति हो सकती है।
बाजार पर मंडरा रहे हैं कई बड़े जोखिम
भारतीय शेयर बाजार इस समय कई घरेलू और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए जोखिम पैदा कर रही है। इसके अलावा कमजोर मॉनसून, पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे और कंपनियों का भविष्य का आउटलुक भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हालांकि, इन तमाम चुनौतियों के बावजूद विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय अनुशासित निवेश जारी रखने की सलाह दे रहे हैं।
US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं
सुधांशु अस्थाना का कहना है कि फिलहाल US-ईरान संघर्ष को लेकर अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच भविष्य में शांति की दिशा में प्रयास बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहती हैं तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर भविष्य के कॉर्पोरेट नतीजों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
सरकार के कदमों से बढ़ रही है अर्थव्यवस्था की रफ्तार
अस्थाना के मुताबिक सरकार की नीतियों का असर अब अर्थव्यवस्था में दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि—
- देश में डिमांड धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।
- प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर (Private Capex) में सुधार देखने को मिल रहा है।
- बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ बेहतर हो रही है।
- कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में लगभग 15% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- आने वाले समय में डॉलर का फ्लो भी मजबूत होने की उम्मीद है।
इन संकेतों से भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई दिखाई देती है।
3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा बेहतर
सुधांशु अस्थाना ने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में 3 से 6 महीने के निवेश दृष्टिकोण के साथ बाजार में बने रहना समझदारी होगी।
उन्होंने बताया कि कंपनियों की ओर से अब तक मिली जानकारी के अनुसार युद्ध का असर डिमांड पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा दिसंबर तिमाही के बाद कई कंपनियों की आय (Earnings) में अपग्रेड देखने को मिल सकता है।
उनका यह भी मानना है कि अगले वर्ष 8वें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों के हाथ में अतिरिक्त पैसा आएगा, जिससे उपभोक्ता मांग (Consumer Demand) को मजबूती मिलेगी।
Q1 नतीजों और मैनेजमेंट कमेंट्री पर रहेगी बाजार की नजर
विशेषज्ञों के अनुसार पहली तिमाही के नतीजों में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में केवल नतीजों पर ही नहीं बल्कि कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री और भविष्य के आउटलुक पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
यदि कंपनियां आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
इन सेक्टर्स में बढ़ाया एक्सपोजर
LIC Mutual Fund के CIO ने बताया कि उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में कुछ प्रमुख सेक्टर्स पर फोकस बढ़ाया है।
प्रमुख पसंदीदा सेक्टर
- बैंकिंग सेक्टर
- प्राइवेट बैंक
- NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां)
- कैपिटल मार्केट कंपनियां
- हेल्थकेयर सेक्टर
- प्रीसिजन इंजीनियरिंग
- डाटा सेंटर से जुड़ी कंपनियां
उनका मानना है कि इन सेक्टर्स में आने वाले महीनों में बेहतर ग्रोथ और अर्निंग अपग्रेड की संभावना बनी हुई है।
कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
यदि कोई निवेशक कम जोखिम लेना चाहता है तो सुधांशु अस्थाना ने मल्टीकैप फंड को बेहतर विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि फ्लेक्सीकैप फंड भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
उनके अनुसार पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश बढ़ा है और आने वाले समय में यह दोनों सेगमेंट बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि निवेशकों को अपने जोखिम प्रोफाइल के अनुसार ही निवेश करना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है, लेकिन मजबूत आर्थिक संकेत, सरकारी सुधार और कॉर्पोरेट आय में संभावित सुधार को देखते हुए विशेषज्ञ फिलहाल घबराने की बजाय अनुशासित निवेश जारी रखने की सलाह दे रहे हैं। यदि आपका निवेश का लक्ष्य मध्यम अवधि यानी 3 से 6 महीने या उससे अधिक का है, तो बाजार की अस्थिरता को अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त विचार बाजार विशेषज्ञ के निजी विचार हैं। NewsJagran.in किसी भी निवेश सलाह की जिम्मेदारी नहीं लेता। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


