नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत भारत सरकार के लिए एक राहत भरी खबर लेकर आई है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह के ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में देश का कुल GST संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। हालांकि यह अप्रैल 2026 में दर्ज 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड संग्रह से कम है, लेकिन पिछले साल मई की तुलना में शुद्ध GST संग्रह में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि GST संग्रह किसी भी अर्थव्यवस्था में खपत और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। ऐसे में मई महीने के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोग गतिविधियां जारी हैं, हालांकि अप्रैल के मुकाबले कुछ नरमी जरूर देखने को मिली है।
GST संग्रह के आंकड़े क्या कहते हैं?
वित्त मंत्रालय के अनुसार मई 2026 में कुल GST संग्रह 1,94,184 करोड़ रुपये रहा। इसमें विभिन्न कर मदों का योगदान इस प्रकार रहा:
| कर मद | संग्रह |
|---|---|
| CGST | ₹37,397 करोड़ |
| SGST | ₹45,143 करोड़ |
| IGST | ₹1,11,644 करोड़ |
| कुल GST संग्रह | ₹1,94,184 करोड़ |
रिफंड जारी करने के बाद सरकार का शुद्ध GST संग्रह 1,66,904 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष मई महीने की तुलना में 3.3 प्रतिशत अधिक है।
अप्रैल से कम क्यों रहा GST संग्रह?
अप्रैल महीने में GST संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। आमतौर पर मार्च के कारोबारी लेन-देन और वित्तीय वर्ष के समापन का असर अप्रैल के संग्रह में दिखाई देता है।
मई में संग्रह का कम होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बाजार में वस्तुओं की बिक्री अप्रैल के मुकाबले कुछ धीमी रही। हालांकि सरकार का दावा है कि जिन वस्तुओं पर पिछले वर्ष GST दरों में कटौती की गई थी, उनकी बिक्री में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है।
किन राज्यों में बढ़ा GST राजस्व?
मई महीने में कुछ बड़े राज्यों ने GST संग्रह में सकारात्मक प्रदर्शन किया।
- उत्तर प्रदेश में 13% वृद्धि
- हरियाणा में 8% वृद्धि
- मध्य प्रदेश में 1% वृद्धि
- गुजरात में 1% वृद्धि
- कर्नाटक में 1% वृद्धि
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जो राज्य में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और व्यापार विस्तार का संकेत माना जा रहा है।
किन राज्यों में आई गिरावट?
दूसरी ओर कई राज्यों में GST संग्रह कमजोर रहा।
- दिल्ली में 17% गिरावट
- हिमाचल प्रदेश में 27% गिरावट
- उत्तराखंड में 19% गिरावट
- तमिलनाडु में 15% गिरावट
- असम में 13% गिरावट
- बिहार में 7% गिरावट
- पंजाब में 5% गिरावट
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी संग्रह पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहा।
अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत?
GST संग्रह को अक्सर आर्थिक गतिविधियों का बैरोमीटर माना जाता है। लगातार 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मासिक GST संग्रह यह दिखाता है कि देश में उपभोग और व्यापारिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
हालांकि अप्रैल की तुलना में गिरावट यह संकेत भी देती है कि आने वाले महीनों में सरकार और उद्योग जगत को खपत बढ़ाने पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद GST संग्रह मजबूत बना रहता है, तो यह भारत की आर्थिक मजबूती का बड़ा संकेत होगा।
आगे क्या रहेगा नजर में?
अब बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर जून और जुलाई के GST संग्रह आंकड़ों पर रहेगी। यदि अगले कुछ महीनों में भी GST संग्रह 1.8 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बना रहता है, तो यह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार के राजस्व लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी मदद करेगा।
फिलहाल मई के आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद स्थिर बनी हुई है और सरकार के खजाने में GST के जरिए लगातार मजबूत राजस्व आ रहा है।


