नई दिल्ली, 17 जुलाई। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 18 जुलाई का दिन ऐतिहासिक साबित हो सकता है। प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 की टेस्ट फ्लाइट-1 लॉन्च करने जा रही है। इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा ‘वंदे मातरम’ पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष की यात्रा करेगा।
यह सिर्फ एक यादगार वस्तु नहीं, बल्कि भारत के तेजी से आगे बढ़ते निजी अंतरिक्ष अभियान और देश के वैज्ञानिक आत्मविश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।
विक्रम-1 मिशन के साथ जाएगा पीएम मोदी का खास संदेश
स्काईरूट एयरोस्पेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी देते हुए बताया कि विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 के विशेष पेलोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा पोस्टकार्ड शामिल किया गया है, जिस पर “वंदे मातरम” लिखा हुआ है।
कंपनी के अनुसार, इस मिशन में केवल प्रधानमंत्री का संदेश ही नहीं, बल्कि स्काईरूट की टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हाथ से लिखे संदेश भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे।
‘मिशन आगमन’ का हिस्सा है यह खास पहल
स्काईरूट ने बताया कि यह विशेष पहल “मिशन आगमन” के तहत की जा रही है। कंपनी के मुताबिक यह अभियान उन लाखों लोगों के सहयोग और विश्वास का प्रतीक है, जिन्होंने भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया है।
कंपनी ने कहा कि हाथ से लिखे ये संदेश भारत के बढ़ते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के प्रति सामूहिक समर्थन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के प्रति विश्वास को दर्शाते हैं।
विक्रम-1 में होंगे कई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड
इस ऐतिहासिक मिशन में कई महत्वपूर्ण तकनीकी पेलोड भी शामिल किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- कॉस्मोसर्व (CosmoServe) का टेक्नोलॉजी पेलोड
- डी-क्यूब्ड (D-Cubed) का डेमोंस्ट्रेशन पेलोड
- स्काईरूट की अपनी स्कोप (SCOPE) तकनीक
- कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा तैयार किया गया ‘कॉस्मिक ब्लूम’ आर्टवर्क
- एक विशेष माइक्रो-आर्ट पेलोड
इनका उद्देश्य भविष्य के वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई तकनीकों का परीक्षण करना है।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा मील का पत्थर
विक्रम-1 स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसकी सफल उड़ान भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यह मिशन दिखाएगा कि भारतीय निजी कंपनियां भी अब उपग्रह प्रक्षेपण जैसे जटिल अंतरिक्ष अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने की क्षमता रखती हैं। इससे भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
18 जुलाई को होगा ऐतिहासिक लॉन्च
स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि 18 जुलाई को आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR) के पहले लॉन्च पैड से विक्रम-1 की पहली टेस्ट फ्लाइट लॉन्च करने का प्रयास किया जाएगा।
यदि यह मिशन सफल रहता है, तो यह भारतीय धरती से किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की पहली उड़ान होगी।
सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं
कंपनी के मुताबिक मिशन के लिए आवश्यक एयरस्पेस और समुद्री मंजूरियां पहले ही प्राप्त हो चुकी हैं। संबंधित अधिकारियों ने रॉकेट के उड़ान मार्ग (Ascent Corridor) और संभावित प्रभाव क्षेत्र (Impact Corridor) के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करते हुए आवश्यक नोटिस भी जारी कर दिए हैं।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह मिशन?
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में हाल के वर्षों में निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने के बाद स्काईरूट जैसी कंपनियां नई तकनीकों और कम लागत वाले लॉन्च समाधान विकसित कर रही हैं।
विक्रम-1 मिशन की सफलता भविष्य में छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों के लिए भारत को वैश्विक लॉन्च हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


