नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के शेयरों में सोमवार 1 जून को जबरदस्त हलचल देखने को मिली। दिलचस्प बात यह रही कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में घाटा दर्ज किया, इसके बावजूद निवेशकों ने शेयरों में खरीदारी दिखाई और कई ब्रोकरेज फर्मों ने अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए।
HighLights
- चौथी तिमाही में घाटे के बावजूद इंडिगो के शेयरों में जोरदार तेजी
- कई ब्रोकरेज हाउस ने BUY रेटिंग बरकरार रखी
- मोतीलाल ओसवाल ने ₹5,600 तक का टारगेट प्राइस दिया
- एक्सपर्ट्स को कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ पर भरोसा
आमतौर पर किसी कंपनी के घाटे में जाने पर उसके शेयरों पर दबाव देखने को मिलता है, लेकिन इंडिगो के मामले में तस्वीर अलग नजर आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक और ब्रोकरेज हाउस कंपनी के एक तिमाही के नतीजों से ज्यादा उसके भविष्य की कमाई और ग्रोथ क्षमता को महत्व दे रहे हैं।
शेयर में दिनभर रही तेजी
सोमवार को इंडिगो का शेयर करीब ₹4,525 पर खुला और कारोबार के दौरान लगभग 5 प्रतिशत तक उछलकर ₹4,633 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद शेयर बढ़त के साथ ₹4,453 के आसपास बंद हुआ।
शेयर में यह तेजी ऐसे समय आई है जब कंपनी ने मार्च तिमाही में घाटा दर्ज किया है। यही वजह है कि निवेशकों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि आखिर घाटे के बावजूद ब्रोकरेज फर्में इंडिगो पर इतनी सकारात्मक क्यों हैं।
चौथी तिमाही में क्यों हुआ घाटा?
मार्च तिमाही के दौरान कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा (Forex) से जुड़ा नुकसान माना जा रहा है। एयरलाइन सेक्टर में विमान लीज, मेंटेनेंस और कई अन्य खर्च डॉलर में होते हैं। ऐसे में रुपये में कमजोरी आने पर कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।
इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कुछ रूट्स पर परिचालन संबंधी चुनौतियां और लागत दबाव भी कंपनी के नतीजों पर असर डालने वाले प्रमुख कारक रहे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इनमें से कई समस्याएं अस्थायी हैं और आने वाली तिमाहियों में इनका असर कम हो सकता है।
फिर भी ब्रोकरेज क्यों हैं बुलिश?
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि मार्च तिमाही के नतीजे कमजोर जरूर रहे, लेकिन कंपनी का मुख्य बिजनेस मजबूत बना हुआ है। इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी, बढ़ता नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय विस्तार और बेहतर लागत नियंत्रण भविष्य में कंपनी की कमाई को मजबूत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार एयरलाइन इंडस्ट्री में कई बार एक या दो तिमाहियों के कमजोर नतीजे लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलते। यही कारण है कि ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस ने BUY रेटिंग बरकरार रखी है।
मोतीलाल ओसवाल ने दिया सबसे बड़ा टारगेट
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इंडिगो पर सकारात्मक रुख बनाए रखते हुए ₹5,600 प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा स्तरों से करीब 25 प्रतिशत से अधिक की संभावित तेजी का संकेत देता है।
ब्रोकरेज का मानना है कि भारत में हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है और इंडिगो इस बढ़ती मांग का सबसे बड़ा लाभार्थी बन सकती है।
आनंद राठी रिसर्च की क्या राय?
आनंद राठी रिसर्च ने भी इंडिगो पर BUY रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹5,550 का टारगेट प्राइस तय किया है।
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति और नेटवर्क विस्तार आने वाले वर्षों में उसकी आय और लाभप्रदता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
जेफरीज ने क्या कहा?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इंडिगो पर अपनी BUY रेटिंग बनाए रखी है। हालांकि उसने टारगेट प्राइस को घटाकर ₹5,380 कर दिया है।
ब्रोकरेज का कहना है कि जनवरी-मार्च तिमाही कमजोर रही, लेकिन परिणाम बड़े पैमाने पर बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे। जेफरीज का मानना है कि कंपनी अब केवल क्षमता विस्तार पर नहीं बल्कि लाभप्रदता सुधारने पर भी ध्यान दे रही है।
गोल्डमैन सैक्स का भरोसा बरकरार
गोल्डमैन सैक्स ने ₹5,200 के टारगेट प्राइस के साथ BUY रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि बेहतर लागत प्रबंधन और राजस्व में सुधार के कारण कंपनी का घाटा अनुमान से कम रहा।
फर्म का मानना है कि आने वाले समय में लागत नियंत्रण कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।
बैंक ऑफ अमेरिका ने भी जताया भरोसा
बैंक ऑफ अमेरिका ने इंडिगो पर ₹5,100 का टारगेट प्राइस बनाए रखा है। ब्रोकरेज के अनुसार ईरान से जुड़े व्यवधानों और अन्य वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कंपनी का प्रदर्शन उम्मीदों के करीब रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून तिमाही के लिए कंपनी के संकेत लागत वसूली और बेहतर राजस्व वृद्धि की संभावना दिखाते हैं।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की राय
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी इंडिगो पर BUY रेटिंग बरकरार रखी है और ₹5,400 का टारगेट प्राइस दिया है।
ब्रोकरेज का मानना है कि विदेशी मुद्रा में भारी नुकसान के बावजूद कंपनी का रिपोर्ट किया गया घाटा अनुमान से कम रहा, जो उसके मूल कारोबार की मजबूती को दर्शाता है।
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन होने का फायदा
इंडिगो वर्तमान में भारतीय घरेलू विमानन बाजार की सबसे बड़ी एयरलाइन है। कंपनी की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक के आसपास बनी हुई है।
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल है। बढ़ती आय, पर्यटन में वृद्धि, बेहतर एयर कनेक्टिविटी और छोटे शहरों से हवाई यात्रा की मांग बढ़ने का सीधा फायदा इंडिगो को मिल सकता है।
यही वजह है कि कई विश्लेषक कंपनी को भारतीय एविएशन सेक्टर का सबसे मजबूत खिलाड़ी मानते हैं।
निवेशकों को किन जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए?
हालांकि ब्रोकरेज फर्में सकारात्मक हैं, लेकिन कुछ जोखिम ऐसे हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
- रुपये में कमजोरी
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
- एयरलाइन सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- परिचालन लागत में वृद्धि
इन कारकों का सीधा असर एयरलाइन कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है।
क्या अभी भी है खरीदारी का मौका?
ब्रोकरेज हाउस के टारगेट प्राइस को देखें तो अधिकांश संस्थानों को मौजूदा स्तरों से 15-25 प्रतिशत तक की संभावित तेजी दिखाई दे रही है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
इंडिगो के मार्च तिमाही नतीजे पहली नजर में कमजोर दिखाई देते हैं, लेकिन बाजार और ब्रोकरेज फर्में कंपनी की लंबी अवधि की कहानी पर भरोसा जता रही हैं। विदेशी मुद्रा नुकसान और अन्य चुनौतियों को अस्थायी मानते हुए अधिकांश विश्लेषकों ने BUY रेटिंग बरकरार रखी है।
भारत में तेजी से बढ़ते एविएशन बाजार, मजबूत मार्केट शेयर, अंतरराष्ट्रीय विस्तार और बेहतर लागत प्रबंधन की उम्मीदों के चलते इंडिगो अभी भी ब्रोकरेज की पसंदीदा एविएशन कंपनी बनी हुई है। यही वजह है कि घाटे के बावजूद शेयर में तेजी देखने को मिली और कई संस्थानों ने ₹5,100 से ₹5,600 तक के टारगेट प्राइस दिए हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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