Security Deposit Report 2026: भारत के बड़े शहरों में किराए पर घर लेना लगातार महंगा होता जा रहा है। मासिक किराए के अलावा भारी-भरकम सिक्योरिटी डिपॉजिट भी किराएदारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। नोब्रोकर रेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार देश के छह प्रमुख महानगरों में किराएदारों के करीब ₹1.3 लाख करोड़ मकान मालिकों के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसे हुए हैं। सबसे ज्यादा राशि मुंबई और बेंगलुरु में जमा है, जबकि सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने के मामले में चेन्नई का रिकॉर्ड सबसे खराब पाया गया है।
Highlights
- छह बड़े शहरों में किराएदारों के ₹1.3 लाख करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसे
- मुंबई में सबसे ज्यादा ₹41,156 करोड़ और बेंगलुरु में ₹31,628 करोड़ जमा
- कुल सिक्योरिटी डिपॉजिट का 58% हिस्सा केवल मुंबई और बेंगलुरु में
- चेन्नई में 11% किराएदारों को सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं मिला
- दिल्ली-एनसीआर में रिफंड का रिकॉर्ड सबसे बेहतर, 58% लोगों को पूरा पैसा वापस मिला
- बेंगलुरु में 75% किराएदार भारी डिपॉजिट के कारण पसंद का घर नहीं ले पाए
क्यों बढ़ रही है सिक्योरिटी डिपॉजिट की समस्या?
भारत में किराए पर घर लेते समय मकान मालिक आमतौर पर दो से तीन महीने के किराए के बराबर सिक्योरिटी डिपॉजिट लेते हैं। हालांकि कई शहरों, खासकर आईटी हब और मेट्रो शहरों में यह राशि कई महीनों के किराए के बराबर भी हो सकती है।
यह रकम मकान छोड़ने के समय वापस मिलनी चाहिए, लेकिन कई मामलों में मकान मालिक पेंटिंग, मरम्मत, सफाई या अन्य खर्चों का हवाला देकर पूरी राशि लौटाने से इनकार कर देते हैं। इससे किराएदारों की बड़ी पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती है।
छह शहरों में कितना सिक्योरिटी डिपॉजिट फंसा?
नोब्रोकर रेंट रिपोर्ट 2026 के मुताबिक छह प्रमुख शहरों में सिक्योरिटी डिपॉजिट की स्थिति इस प्रकार है:
| शहर | सिक्योरिटी डिपॉजिट (₹ करोड़) |
|---|---|
| मुंबई | 41,156 |
| बेंगलुरु | 31,628 |
| दिल्ली-एनसीआर | 24,054 |
| चेन्नई | 17,346 |
| हैदराबाद | 6,843 |
| पुणे | 5,015 |
इन छह शहरों में कुल मिलाकर करीब ₹1.26 लाख करोड़ से अधिक की राशि सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में मकान मालिकों के पास जमा है, जिसे रिपोर्ट में लगभग ₹1.3 लाख करोड़ बताया गया है।
मुंबई और बेंगलुरु में सबसे ज्यादा बोझ
रिपोर्ट बताती है कि अकेले मुंबई और बेंगलुरु में ही करीब ₹72,784 करोड़ का सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा है। यानी कुल राशि का लगभग 58% हिस्सा इन दो शहरों में केंद्रित है।
मुंबई में पहले से ही देश का सबसे महंगा रेंटल मार्केट माना जाता है। ऐसे में ऊंचे किराए के साथ भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट भी किराएदारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालता है।
रिफंड के मामले में चेन्नई सबसे पीछे
सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने के मामले में चेन्नई का प्रदर्शन सबसे खराब पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार:
- 11% किराएदारों ने कहा कि उन्हें सिक्योरिटी डिपॉजिट कभी वापस नहीं मिला।
- केवल 44% लोगों को पूरा डिपॉजिट वापस मिला।
- बाकी लोगों को आंशिक रिफंड मिला या कटौती का सामना करना पड़ा।
यह आंकड़े बताते हैं कि किराएदारों और मकान मालिकों के बीच पारदर्शिता की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
दिल्ली-एनसीआर का रिकॉर्ड सबसे बेहतर
दिल्ली-एनसीआर में कुल ₹24,054 करोड़ का सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा है, लेकिन रिफंड के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
सर्वे के मुताबिक:
- 58% किराएदारों को पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिला।
- इससे संकेत मिलता है कि राजधानी क्षेत्र में किराएदारों और मकान मालिकों के बीच रिफंड विवाद अन्य शहरों की तुलना में कम हैं।
बेंगलुरु में पसंद का घर लेना भी मुश्किल
आईटी प्रोफेशनल्स के सबसे बड़े केंद्र बेंगलुरु में भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट लोगों के लिए बड़ी बाधा बन गया है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- 75% किराएदारों ने कहा कि अधिक सिक्योरिटी डिपॉजिट के कारण वे अपनी पसंद का मकान किराए पर नहीं ले सके।
- कई लोगों को बजट के कारण लोकेशन बदलनी पड़ी।
- कुछ ने छोटे घर या कम सुविधाओं वाले मकान चुनने पड़े क्योंकि शुरुआती डिपॉजिट की व्यवस्था करना संभव नहीं था।
इसका असर खासकर नौकरी के लिए नए शहर में आने वाले युवाओं और आईटी कर्मचारियों पर अधिक पड़ रहा है।
किराएदारों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार किराए पर घर लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- सिक्योरिटी डिपॉजिट और रिफंड की शर्तें लिखित रेंट एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से दर्ज कराएं।
- मकान की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग पहले से सुरक्षित रखें।
- भुगतान हमेशा बैंकिंग माध्यम से करें।
- मकान छोड़ते समय हैंडओवर का लिखित रिकॉर्ड लें।
- किसी भी कटौती का लिखित विवरण मांगें।
निष्कर्ष
देश के बड़े शहरों में किराए पर घर लेना केवल बढ़ते किराए की वजह से ही नहीं, बल्कि भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट के कारण भी महंगा होता जा रहा है। नोब्रोकर रेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार छह प्रमुख शहरों में किराएदारों के करीब ₹1.3 लाख करोड़ मकान मालिकों के पास जमा हैं। मुंबई और बेंगलुरु में सबसे अधिक राशि फंसी हुई है, जबकि रिफंड के मामले में चेन्नई सबसे कमजोर और दिल्ली-एनसीआर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर बनकर सामने आया है।


