Skill Development News: भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में स्टेनलेस स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन इस तेजी से बढ़ते उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित (Skilled) कार्यबल की कमी है। प्राइसवाटरहाउस कूपर्स (PwC) की नई Training Need Assessment (TNA) रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेनलेस स्टील फैब्रिकेशन सेक्टर में काम करने वाले हर तीन में से केवल एक व्यक्ति ही पूरी तरह प्रशिक्षित है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि जिन कामगारों के पास उचित कौशल है, उनकी आय अप्रशिक्षित कर्मचारियों की तुलना में औसतन 14 फीसदी अधिक है।
तेजी से बढ़ रही है स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत
पिछले कुछ वर्षों में भारत में हाईवे, मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक परियोजनाओं और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं पर बड़े पैमाने पर काम हुआ है। इन परियोजनाओं में स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
इसके बावजूद इस सेक्टर में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता मानकों और सुरक्षा प्रक्रियाओं का व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं मिला है। इसका असर उत्पादकता, गुणवत्ता और कामगारों की आय तीनों पर पड़ रहा है।
PwC ने जारी की पहली व्यापक रिपोर्ट
मल्टीनेशनल प्रोफेशनल सर्विसेज कंपनी PwC (PricewaterhouseCoopers) ने हाल ही में Training Need Assessment (TNA) रिपोर्ट जारी की है। जिंदल स्टेनलेस द्वारा प्रायोजित इस अध्ययन को भारत के स्टेनलेस स्टील फैब्रिकेशन सेक्टर का पहला व्यापक स्किल सर्वे माना जा रहा है।
इस अध्ययन में कुल 1,904 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें—
- 629 फैब्रिकेटर
- 575 कर्मचारी
- 250 नियोक्ता
- 450 छात्र
शामिल थे।
यह सर्वे देश के नौ राज्यों—गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और झारखंड—में किया गया। इसे इस क्षेत्र के कर्मचारियों पर अब तक का सबसे व्यापक भौगोलिक अध्ययन बताया गया है।
हर तीन में सिर्फ एक ही प्रशिक्षित
रिपोर्ट के अनुसार स्टेनलेस स्टील फैब्रिकेशन सेक्टर में केवल लगभग 33 फीसदी कामगार ही पूरी तरह प्रशिक्षित हैं। यानी हर तीन कर्मचारियों में सिर्फ एक व्यक्ति के पास आवश्यक तकनीकी कौशल मौजूद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान नहीं दिया गया तो उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
संगठित और असंगठित क्षेत्र में बड़ा अंतर
अध्ययन में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया।
- संगठित क्षेत्र में लगभग 65% कर्मचारी प्रशिक्षित पाए गए।
- वहीं स्वतंत्र रूप से काम करने वाले फैब्रिकेटरों में यह आंकड़ा केवल 33% रहा।
इससे स्पष्ट होता है कि असंगठित क्षेत्र में व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
स्किल्ड कर्मचारियों की कमाई 14% ज्यादा
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि कौशल का सीधा असर आय पर पड़ता है।
PwC के अनुसार प्रशिक्षित फैब्रिकेटर, अप्रशिक्षित कर्मचारियों की तुलना में औसतन 14 प्रतिशत अधिक कमाई करते हैं। इसका मतलब है कि स्किल ट्रेनिंग केवल बेहतर काम करने का माध्यम नहीं बल्कि आय बढ़ाने का भी प्रभावी तरीका है।
आधे से ज्यादा कामगार सीखना चाहते हैं नई तकनीक
रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया।
करीब 52 फीसदी फैब्रिकेटरों ने भविष्य में प्रशिक्षण लेने की इच्छा जताई। इससे स्पष्ट है कि यदि उद्योग और सरकार मिलकर बेहतर स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू करें तो बड़ी संख्या में कामगार इसका लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।
क्यों बढ़ रही है स्टेनलेस स्टील की मांग?
भारत में स्टेनलेस स्टील का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इसका इस्तेमाल अब केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि कई रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है, जैसे—
- रेलवे और मेट्रो परियोजनाएं
- रिन्यूएबल एनर्जी
- समुद्री और तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर
- आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग
- औद्योगिक संयंत्र
- फूड प्रोसेसिंग और हेल्थकेयर उपकरण
इसी वजह से उद्योग को अधिक प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत महसूस हो रही है।
जिंदल स्टेनलेस ने क्या कहा?
जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि भारत का स्टेनलेस स्टील उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से पहली बार जमीनी स्तर पर यह स्पष्ट हुआ है कि कर्मचारियों के कौशल में सबसे बड़ी कमियां कहां हैं। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने ‘स्टेनलेस एकेडमी’ पहल शुरू की है, जिसके माध्यम से उद्योग, शिक्षण संस्थानों और सरकार के सहयोग से प्रशिक्षित कार्यबल तैयार किया जाएगा।
निष्कर्ष
PwC की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत का स्टेनलेस स्टील उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी इसकी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि उद्योग, सरकार और शिक्षण संस्थान मिलकर स्किल डेवलपमेंट पर निवेश करते हैं, तो न केवल उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि लाखों युवाओं की आय और रोजगार के अवसर भी बेहतर होंगे। आने वाले वर्षों में भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत बनाने के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स सबसे अहम आधार साबित हो सकती है।


