क्या है पूरा मामला?
चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पिछले कई वर्षों से संकट का सामना कर रहा है। कभी देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन माने जाने वाले इस सेक्टर पर भारी कर्ज, डेवलपर्स की वित्तीय मुश्किलों और घटती मांग का दबाव रहा है। अब इसी संकट के बीच एक नया ट्रेंड सामने आया है। शंघाई और बीजिंग जैसे बड़े शहरों में किराए पर रहने वाले लोग छोटे फ्लैट खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि कई मामलों में मासिक EMI किराए से कम पड़ रही है।
रियल एस्टेट एजेंटों और स्थानीय बाजार रिपोर्टों के अनुसार, 2021 के बाद से छोटे अपार्टमेंट्स की कीमतों में भारी गिरावट आई है। वहीं चीन के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने से होम लोन सस्ते हुए हैं। इन दोनों कारणों ने मिलकर पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अवसर पैदा किया है।
किराए से सस्ती EMI कैसे हो गई?
आमतौर पर बड़े शहरों में घर खरीदना किराए पर रहने की तुलना में महंगा माना जाता है। लेकिन चीन में स्थिति बदल गई है।
उदाहरण के तौर पर, शंघाई निवासी पैन कोंगकियांग ने हाल ही में एक छोटा फ्लैट खरीदा। उनके अनुसार, नई EMI उनके पुराने किराए से लगभग 700 युआन कम है। ऐसे हजारों खरीदार अब यह गणित लगा रहे हैं कि यदि हर महीने किराए में बड़ी रकम खर्च करनी ही है तो बेहतर है कि उसी पैसे से अपनी संपत्ति बनाई जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव तीन कारणों से आया है:
- घरों की कीमतों में भारी गिरावट
- मॉर्गेज ब्याज दरों में कमी
- पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आसान नियम
छोटे फ्लैट्स की मांग अचानक क्यों बढ़ी?
चीन के बड़े शहरों में युवा पेशेवर और नए परिवार छोटे आकार के घर खरीदने पर फोकस कर रहे हैं। 50 वर्ग मीटर से कम आकार वाले फ्लैट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसका कारण यह है कि इनकी कीमत अपेक्षाकृत कम है और मासिक किस्तें भी संभालना आसान है।
पहले जहां लोग बड़े घरों में निवेश को प्राथमिकता देते थे, अब सुरक्षित और कम लागत वाले विकल्पों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में यह सोच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
सेकेंड-हैंड घरों की रिकॉर्ड बिक्री
चीन में पुराने घरों का बाजार अचानक सक्रिय हो गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मार्च और अप्रैल के दौरान लगभग 60,000 पुराने घर बिके। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13.6 प्रतिशत अधिक है।
शंघाई में सेकेंड-हैंड प्रॉपर्टी बिक्री पिछले पांच वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। बीजिंग में भी पुराने घरों की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, खरीदारों को लगता है कि मौजूदा कीमतें पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी आकर्षक हैं और लंबे समय के लिए बेहतर अवसर प्रदान करती हैं।
बैंकों को क्यों नहीं मिल रहा फायदा?
दिलचस्प बात यह है कि घरों की बिक्री बढ़ने के बावजूद बैंकों का होम लोन कारोबार अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा। कई खरीदार बड़ी डाउन पेमेंट कर रहे हैं। कुछ लोग 15 प्रतिशत की न्यूनतम अनिवार्यता के बजाय 50 प्रतिशत तक अग्रिम भुगतान कर रहे हैं।
इसके अलावा, पुराने होम लोन लेने वाले लोग भी तेजी से प्री-पेमेंट कर रहे हैं ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके। इससे बैंकिंग सेक्टर को उतना लाभ नहीं मिल रहा जितनी उम्मीद की जा रही थी।
क्या चीन का प्रॉपर्टी संकट खत्म हो रहा है?
पूरी तरह नहीं, लेकिन कुछ सकारात्मक संकेत जरूर दिखाई दे रहे हैं। मई में चीन के 100 प्रमुख शहरों में नए घरों की कीमतों में 0.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि छोटी है, लेकिन कई वर्षों की गिरावट के बाद इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, देश के शीर्ष 100 रियल एस्टेट डेवलपर्स की बिक्री में गिरावट की रफ्तार भी कम हुई है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
NewsJagran Analysis: क्या भारत में भी किराए से सस्ती EMI का ट्रेंड आ सकता है?
भारत में फिलहाल स्थिति चीन जैसी नहीं है। मुंबई, दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कई इलाकों में किराए और EMI का अंतर काफी बड़ा है। हालांकि कुछ उभरते शहरों और परिधीय क्षेत्रों में ऐसी स्थिति देखने को मिल सकती है जहां:
- होम लोन ब्याज दरें कम हों
- डेवलपर्स डिस्काउंट दे रहे हों
- प्रॉपर्टी कीमतों में स्थिरता हो
ऐसे इलाकों में EMI और किराए का अंतर कम हो सकता है, जिससे पहली बार घर खरीदने वालों की मांग बढ़ सकती है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन जैसी व्यापक स्थिति भारत में फिलहाल बनने की संभावना कम है क्योंकि यहां आवासीय मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
निष्कर्ष
चीन में किराए से सस्ती EMI का ट्रेंड रियल एस्टेट बाजार में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। घरों की कीमतों में गिरावट और सस्ते होम लोन ने हजारों किराएदारों को घर खरीदने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि यह ट्रेंड चीन के लंबे प्रॉपर्टी संकट की पृष्ठभूमि में उभरा है, लेकिन इससे यह जरूर साबित होता है कि जब कीमतें और ब्याज दरें सही स्तर पर पहुंचती हैं तो खरीदारों का व्यवहार तेजी से बदल सकता है।
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