नई दिल्ली। जून महीने के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को निराशा हाथ लगी। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और आगामी आर्थिक घटनाक्रमों के बीच बाजार दबाव में रहा। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 74,267.34 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 165.15 अंक यानी 0.70 प्रतिशत टूटकर 23,382.60 के स्तर पर आ गया।
बाजार की यह गिरावट केवल लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। इससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
आखिर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव बाजार की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। अमेरिका द्वारा हालिया सैन्य कार्रवाई और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक इक्विटी बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की आक्रामक बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में 21,106 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इतनी बड़ी बिकवाली ने घरेलू निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव दिखा?
सोमवार के कारोबार में अधिकांश सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। सबसे अधिक कमजोरी एफएमसीजी, डिफेंस, पीएसयू बैंक, रियल्टी, ऑटो, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में देखने को मिली।
हालांकि बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच आईटी और मेटल सेक्टर ने कुछ मजबूती दिखाई। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक जैसे आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। डॉलर में मजबूती और विदेशी बाजारों से संभावित मांग के कारण आईटी शेयरों को समर्थन मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में क्यों आई बड़ी गिरावट?
पिछले कई महीनों से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। कई कंपनियों के वैल्यूएशन ऐतिहासिक स्तरों तक पहुंच गए थे। ऐसे में जैसे ही वैश्विक जोखिम बढ़ा, निवेशकों ने इन शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.45 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग 1 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित और मजबूत बैलेंस शीट वाली बड़ी कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं।
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि वैश्विक तनाव के कारण बाजार में ‘रिस्क ऑफ’ भावना बनी हुई है। हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और संभावित अंतरिम व्यापार समझौता आने वाले दिनों में बाजार के लिए सकारात्मक ट्रिगर साबित हो सकता है।
उनके अनुसार, आगामी आरबीआई मौद्रिक नीति समीक्षा और जीडीपी आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
वहीं एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी विश्लेषक सुदीप शाह के अनुसार निफ्टी के लिए 23,250-23,230 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि यह स्तर टूटता है तो निफ्टी 23,100 तक फिसल सकता है। दूसरी ओर 23,530-23,550 का क्षेत्र तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में काम करेगा।
RBI नीति बैठक पर क्यों टिकी है बाजार की नजर?
इस सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक होने वाली है। निवेशकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर कोई बड़ा संकेत दे सकता है।
यदि आरबीआई महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है तो बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं विकास दर को समर्थन देने वाले संकेत मिलने पर बाजार को राहत मिल सकती है।
खुदरा निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट को घबराने की बजाय सतर्कता के साथ देखने की जरूरत है। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश जारी रखा जा सकता है, लेकिन अत्यधिक वैल्यूएशन वाले शेयरों में सावधानी बरतनी चाहिए।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट अवसर भी साबित हो सकती है, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को तकनीकी स्तरों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
आने वाले दिनों में बाजार की चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें आरबीआई की नीति बैठक, अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता, एफआईआई की निवेश रणनीति, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं।
यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और वैश्विक तनाव में नरमी आती है तो भारतीय बाजार फिर से मजबूती दिखा सकता है। लेकिन फिलहाल निवेशकों को उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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