देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले प्रमोटर ग्रुप ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान खुले बाजार से बड़े पैमाने पर शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। अनुमान है कि इस खरीद पर ₹8,500 करोड़ से ₹9,000 करोड़ तक खर्च किए गए हैं।
शेयरहोल्डिंग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़कर 50.48% हो गई है, जबकि पिछली तिमाही में यह करीब 50% थी। बाजार विशेषज्ञ इसे कंपनी के भविष्य और लंबे समय की ग्रोथ पर प्रमोटरों के मजबूत भरोसे का संकेत मान रहे हैं।
0.5% बढ़ी प्रमोटर हिस्सेदारी
अप्रैल से जून 2026 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमोटर ग्रुप ने करीब 0.5% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदी। यह खरीद SEBI के ‘क्रीपिंग एक्विजिशन’ नियमों के तहत की गई है।
इन नियमों के अनुसार, प्रमोटर तय सीमा के भीतर रहते हुए धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं और इसके लिए उन्हें अनिवार्य ओपन ऑफर लाने की जरूरत नहीं होती।
मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस हिस्सेदारी को बढ़ाने में करीब ₹8,500 करोड़ से ₹9,000 करोड़ का निवेश किया गया है।
किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के नवीनतम शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार—
- मुकेश अंबानी के पास लगभग 1.61 करोड़ शेयर (0.12%)
- नीता अंबानी के पास लगभग 1.61 करोड़ शेयर (0.12%)
- ईशा अंबानी के पास लगभग 1.61 करोड़ शेयर (0.12%)
- आकाश अंबानी के पास लगभग 1.61 करोड़ शेयर (0.12%)
- अनंत अंबानी के पास लगभग 1.61 करोड़ शेयर (0.12%)
- के.डी. अंबानी के पास 3.14 करोड़ शेयर (0.24%)
इसके अलावा प्रमोटर ग्रुप की कई एलएलपी और कंपनियों के पास बड़ी हिस्सेदारी मौजूद है।
इन संस्थाओं के पास सबसे ज्यादा हिस्सेदारी
प्रमोटर ग्रुप की प्रमुख संस्थाओं में—
- श्रीचक्र कमर्शियल्स LLP – 10.93%
- देवरर्षि कमर्शियल्स LLP – 8.06%
- करुणा कमर्शियल LLP – 8.06%
- तत्त्वम एंटरप्राइजेज LLP – 8.06%
इन संस्थाओं के माध्यम से प्रमोटर ग्रुप रिलायंस में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बनाए हुए है।
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
शेयर बाजार में आम तौर पर जब किसी कंपनी के प्रमोटर खुले बाजार से अपने ही शेयर खरीदते हैं, तो इसे सकारात्मक संकेत माना जाता है। इसका अर्थ होता है कि कंपनी का मैनेजमेंट अपने बिजनेस मॉडल, भविष्य की कमाई और विकास की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त है।
हालांकि प्रमोटर हिस्सेदारी बढ़ने का मतलब यह नहीं होता कि शेयर तुरंत तेज़ी से ऊपर जाएगा, लेकिन इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
रिलायंस किन क्षेत्रों में कर रही है बड़ा निवेश?
रिलायंस इंडस्ट्रीज फिलहाल कई हाई-ग्रोथ सेक्टरों पर फोकस कर रही है, जिनमें शामिल हैं—
- रिटेल बिजनेस
- जियो और डिजिटल सर्विसेज
- न्यू एनर्जी और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट
- एफएमसीजी और कंज्यूमर बिजनेस
- एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
विश्लेषकों का मानना है कि इन क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में कंपनी की आय बढ़ाने की मजबूत क्षमता है।
क्या अब रिलायंस के शेयर में आएगी तेजी?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ना निश्चित रूप से सेंटिमेंट पॉजिटिव खबर है। यदि आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजे मजबूत रहते हैं और रिटेल, जियो तथा नई ऊर्जा कारोबार से बेहतर प्रदर्शन देखने को मिलता है, तो शेयर को समर्थन मिल सकता है।
हालांकि किसी भी स्टॉक की चाल केवल प्रमोटर खरीद से तय नहीं होती। वैश्विक बाजार, कंपनी के नतीजे, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और आर्थिक परिस्थितियां भी शेयर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


