नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई हैं। हर बार की तरह इस बार भी लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RBI रेपो रेट में बदलाव करेगा और इसका असर उनकी मासिक EMI पर पड़ेगा या नहीं।
इसी बीच CareEdge Ratings की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसने बाजार की उम्मीदों को लेकर बड़ा संकेत दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, RBI फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता और केंद्रीय बैंक “पॉलिसी पॉज” की रणनीति अपनाने की संभावना है। इसका मतलब यह होगा कि रेपो रेट वर्तमान स्तर पर बरकरार रह सकता है और मौजूदा लोन धारकों की EMI में तत्काल कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।
आखिर क्यों महत्वपूर्ण है RBI MPC की बैठक?
RBI की मौद्रिक नीति समिति देश की ब्याज दरों को लेकर फैसला करती है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए फंड महंगा हो जाता है और इसका असर आम लोगों के लोन पर पड़ता है। वहीं रेपो रेट घटने पर होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।
यही कारण है कि हर MPC बैठक के फैसले का असर शेयर बाजार से लेकर बैंकिंग सेक्टर और आम उपभोक्ताओं तक दिखाई देता है।
महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा रहीं चिंता
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है। इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। पिछले एक महीने में देश के कई हिस्सों में ईंधन कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
WPI और CPI के संकेत क्या कहते हैं?
अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। आमतौर पर WPI में बढ़ोतरी कुछ समय बाद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर भी असर डालती है।
RBI का मुख्य लक्ष्य खुदरा महंगाई यानी CPI को नियंत्रित रखना होता है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।
CareEdge ने FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 4.6 से 5 प्रतिशत के बीच रखा है, जो RBI के लक्ष्य के करीब तो है लेकिन पूरी तरह आरामदायक स्थिति नहीं मानी जा सकती।
GDP ग्रोथ को लेकर भी बढ़ी चिंता
रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर भी सावधानी बरती गई है। CareEdge ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है।
हालांकि यह विकास दर अभी भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मजबूत मानी जा रही है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो भारत की विकास दर 6 प्रतिशत तक फिसल सकती है।
रुपये पर क्या होगा असर?
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है। CareEdge के अनुसार संकट शुरू होने के बाद रुपया करीब 4.9 प्रतिशत कमजोर हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हो सकता है। हालांकि RBI के पास लगभग 690 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो मुद्रा बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
बैंकिंग सेक्टर की स्थिति कैसी है?
रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी की स्थिति कुछ कमजोर हुई है। अप्रैल में जहां लिक्विडिटी सरप्लस 3.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं मई में यह घटकर 1.9 लाख करोड़ रुपये रह गया।
इसके बावजूद बैंकिंग सेक्टर में कर्ज वितरण मजबूत बना हुआ है। अप्रैल में क्रेडिट ग्रोथ 16.3 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 10 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर है।
यह संकेत देता है कि देश में निवेश और खपत गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं।
आम लोगों की EMI पर क्या होगा असर?
यदि RBI आगामी बैठक में रेपो रेट को यथावत रखता है तो मौजूदा होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट लोन की EMI में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा।
हालांकि यदि महंगाई बढ़ती है और भविष्य में RBI को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं तो नए और मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन धारकों की EMI बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, यदि वैश्विक हालात सुधरते हैं और महंगाई नियंत्रण में रहती है तो आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन सकती है, जिससे EMI पर राहत मिल सकती है।
आगे क्या देखना होगा?
बाजार की नजर अब RBI MPC के आधिकारिक फैसले पर टिकी है। फिलहाल ज्यादातर अर्थशास्त्री और रेटिंग एजेंसियां यही मान रही हैं कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगा और महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों तथा वैश्विक हालात पर नजर बनाए रखेगा।
ऐसे में मौजूदा संकेत यही बताते हैं कि इस बार EMI में न तो बड़ी राहत मिलने की संभावना है और न ही तत्काल बढ़ोतरी की। लेकिन आने वाले महीनों में महंगाई और वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा RBI के अगले फैसलों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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