भोपाल के रहने वाले अमित निगम की कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो पारिवारिक दबाव, सीमित संसाधनों या छोटे करियर स्टार्ट के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेते हैं। कभी महज ₹10,000 महीने की नौकरी से करियर शुरू करने वाले अमित निगम आज 150 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली डिजिटल पेमेंट कंपनी के मालिक हैं। उनकी यह सफलता दिखाती है कि सही विजन, कॉर्पोरेट अनुभव और जोखिम लेने का साहस किसी भी इंसान की किस्मत बदल सकता है।
आज उनकी कंपनी ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने का काम कर रही है। खास बात यह है कि अमित निगम ने उस क्षेत्र में अवसर तलाशा, जहां बड़े खिलाड़ी लंबे समय तक पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाए थे।
पारिवारिक दबाव के बावजूद चुना अलग रास्ता

अमित निगम मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले हैं। उनका परिवार प्रशासनिक और कानूनी क्षेत्र से जुड़ा रहा है। परिवार में कई नौकरशाह, जज और वकील रहे हैं। उनके पिता इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता थे। ऐसे माहौल में अमित पर भी सिविल सर्विस या न्यायिक सेवा में जाने का दबाव था।
लेकिन अमित की रुचि शुरू से बिजनेस और मैनेजमेंट में थी। उन्होंने पारंपरिक करियर विकल्प चुनने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाने का फैसला किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने आईआईपीएम, नोएडा से मार्केटिंग में पीजीडीएम किया। यहीं से उनका कॉर्पोरेट सफर शुरू हुआ।
₹10,000 की नौकरी से की शुरुआत
अमित निगम ने साल 1993 में दिल्ली की ‘इंडियन रेयान लिमिटेड’ में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में काम शुरू किया। उस समय उनकी सैलरी केवल ₹10,000 प्रति माह थी। आज के दौर में यह रकम भले छोटी लगे, लेकिन उसी नौकरी ने उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया की बुनियादी समझ दी।
इसके बाद उन्होंने एस्कोटेल मोबाइल कम्युनिकेशन और ऊषा जैसी कंपनियों में भी काम किया। इन कंपनियों में उन्होंने सेल्स, मार्केटिंग और बिजनेस डेवलपमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वह टेलिकॉम कंपनी एयरटेल से जुड़े।
एयरटेल में मिला बड़ा अनुभव

एयरटेल में अमित निगम ने करीब आठ वर्षों तक काम किया। इस दौरान उन्होंने सेल्स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें एयरटेल के संस्थापक Sunil Bharti Mittal के साथ करीब से काम करने का मौका मिला।
कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करते हुए अमित ने यह समझा कि भारत के छोटे शहरों और गांवों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच अभी भी सीमित है। डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर में बड़ी संभावनाएं मौजूद थीं। यही अनुभव आगे चलकर उनके बिजनेस आइडिया की नींव बना।
‘स्पाइस मनी’ से शुरू हुआ एंटरप्रेन्योरशिप सफर
लंबे कॉर्पोरेट अनुभव के बाद अमित निगम ने नौकरी छोड़कर खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला लिया। साल 2011 में उन्होंने ‘स्पाइस मनी’ नाम की फिनटेक कंपनी की सह-स्थापना की।
उस समय देश में डिजिटल पेमेंट और ग्रामीण बैंकिंग का विस्तार शुरुआती दौर में था। अमित ने देखा कि गांवों और छोटे कस्बों में लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें बैंकिंग सुविधाओं तक आसान पहुंच नहीं मिल पा रही। उन्होंने इसी समस्या को बिजनेस अवसर में बदला।
2017 में शुरू की FindiBANKIT

साल 2017 में अमित निगम ने अपनी खुद की डिजिटल पेमेंट कंपनी ‘FindiBANKIT’ की शुरुआत की। उन्होंने यह स्टार्टअप लगभग 10 लाख रुपये के शुरुआती निवेश के साथ शुरू किया।
कंपनी का मुख्य उद्देश्य था ग्रामीण इलाकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना डिजिटल पेमेंट को आसान बनाना वित्तीय रूप से पिछड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना उस समय भारत में डिजिटल ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे थे। नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों की जागरूकता भी बढ़ी थी। अमित निगम ने इसी बदलाव का फायदा उठाया।
कैसे बढ़ा कारोबार?
FindiBANKIT ने छोटे दुकानदारों, ग्रामीण एजेंटों और लोकल नेटवर्क का इस्तेमाल कर अपनी पहुंच बढ़ाई। कंपनी ने उन इलाकों पर फोकस किया जहां बड़े बैंक या डिजिटल प्लेटफॉर्म आसानी से नहीं पहुंच पा रहे थे।
कंपनी की रणनीति थी लोकल एजेंट नेटवर्क बनाना, आसान डिजिटल पेमेंट सुविधा देना, ग्रामीण ग्राहकों को भरोसा दिलाना, कम लागत में सेवा उपलब्ध कराना धीरे-धीरे कंपनी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैल गया।
आज 150 करोड़ रुपये का टर्नओवर

सिर्फ 10 लाख रुपये से शुरू हुआ यह स्टार्टअप आज करीब 150 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि कंपनी ने अपनी पहचान ग्रामीण और वंचित वर्ग को वित्तीय सेवाओं से जोड़कर बनाई। फिनटेक सेक्टर में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद कंपनी ने अपनी अलग जगह बनाई है।
युवाओं के लिए क्या सीख?
अमित निगम की सफलता कई महत्वपूर्ण बातें सिखाती है:
1. छोटा स्टार्ट मायने नहीं रखता
₹10,000 की नौकरी से शुरुआत करने वाला व्यक्ति भी बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकता है।
2. अनुभव सबसे बड़ा निवेश है
कॉर्पोरेट सेक्टर में वर्षों का अनुभव बाद में बिजनेस बनाने में काम आया।
3. समस्या में अवसर खोजिए
उन्होंने ग्रामीण बैंकिंग की समस्या को बिजनेस मॉडल में बदला।
4. पारिवारिक दबाव के बावजूद अपना रास्ता चुनना जरूरी
अगर अमित पारंपरिक करियर चुन लेते, तो शायद यह सफलता कहानी नहीं बनती।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है फिनटेक सेक्टर
भारत का डिजिटल पेमेंट बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। यूपीआई, डिजिटल वॉलेट और ग्रामीण इंटरनेट पहुंच बढ़ने से फिनटेक कंपनियों के लिए बड़े अवसर बने हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में ग्रामीण डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ेगी छोटे शहरों में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ेगा फिनटेक कंपनियों की भूमिका और मजबूत होगी इसी वजह से FindiBANKIT जैसी कंपनियों के लिए आगे भी विकास की बड़ी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
निष्कर्ष
अमित निगम की कहानी सिर्फ बिजनेस सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह जोखिम लेने, अलग सोच रखने और लगातार मेहनत करने की मिसाल भी है। एक साधारण नौकरी से शुरुआत कर उन्होंने ऐसा कारोबार खड़ा किया जिसने लाखों लोगों तक डिजिटल वित्तीय सेवाएं पहुंचाईं।
उनकी यात्रा यह साबित करती है कि अगर विजन स्पष्ट हो और सही समय पर सही निर्णय लिए जाएं, तो छोटी शुरुआत भी बड़े मुकाम तक पहुंचा सकती है।
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