भारत में डीजल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। 24 मई 2026 को मुंबई में डीजल का रेट ₹95.02 प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जबकि देश के कई बड़े शहरों में कीमतों में मामूली बदलाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट के कारण अलग-अलग शहरों में डीजल के दाम अलग हैं।
पिछले कुछ दिनों से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, सप्लाई चेन की चिंताएं और OPEC+ देशों की उत्पादन नीति का असर भारतीय ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि आम लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर और उद्योग जगत तक सभी की नजर डीजल कीमतों पर बनी हुई है।
भारत में डीजल की कीमतें रोज क्यों बदलती हैं?
भारत में 15 जून 2017 से डीजल की कीमतों में रोजाना संशोधन (Daily Price Revision) लागू किया गया था। इससे पहले हर 15 दिन में कीमतें बदली जाती थीं। सरकार और तेल कंपनियों का मानना था कि दैनिक संशोधन से अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंचेगा और अचानक बड़ा झटका नहीं लगेगा।
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां हर सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। इन कीमतों में शामिल होते हैं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकारों का वैट, डीलर कमीशन यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में डीजल की कीमतें अलग-अलग रहती हैं।
देश के प्रमुख शहरों में आज का डीजल रेट
भारतीय महानगरों और राज्य राजधानियों में डीजल की कीमत
| शहर | डीजल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹92.49 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹97.02 | कोई बदलाव नहीं |
| मुंबई | ₹95.02 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹97.08 | +₹0.08 |
| गुरुग्राम | ₹92.73 | -₹0.20 |
| नोएडा | ₹92.84 | -₹0.19 |
| बेंगलुरु | ₹95.99 | कोई बदलाव नहीं |
| भुवनेश्वर | ₹97.73 | -₹0.07 |
| चंडीगढ़ | ₹86.94 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹100.94 | कोई बदलाव नहीं |
| जयपुर | ₹95.05 | कोई बदलाव नहीं |
| लखनऊ | ₹92.64 | -₹0.06 |
| पटना | ₹96.53 | -₹0.50 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹101.55 | कोई बदलाव नहीं |
ऊपर दिए गए आंकड़ों से साफ है कि दक्षिण भारत के कुछ शहरों में डीजल की कीमतें ₹100 प्रति लीटर के पार बनी हुई हैं। इसकी बड़ी वजह वहां का उच्च वैट और परिवहन लागत मानी जाती है।
डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा असर कहां पड़ता है?
भारत में डीजल सिर्फ वाहन चलाने का ईंधन नहीं है, बल्कि यह पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ट्रक, बस, कृषि उपकरण, फैक्ट्री मशीनें और कई औद्योगिक इकाइयां डीजल पर निर्भर हैं। इसलिए डीजल की कीमत बढ़ने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
1. ट्रांसपोर्ट महंगा होता है
जब डीजल महंगा होता है तो ट्रक ऑपरेटर और लॉजिस्टिक्स कंपनियां किराया बढ़ाती हैं। इससे सब्जियां, दूध, राशन, FMCG सामान, दवाइयां सबकी कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
2. किसानों की लागत बढ़ती है
खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, पंपसेट और हार्वेस्टर बड़े पैमाने पर डीजल पर चलते हैं। कीमत बढ़ने से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ती है।
3. महंगाई पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी खुदरा महंगाई (Retail Inflation) को ऊपर धकेल सकती है। RBI भी अपने मौद्रिक नीति फैसलों में ईंधन कीमतों पर नजर रखता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का कितना असर पड़ता है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमतों का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
हाल के दिनों में इन वजहों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है: पश्चिम एशिया तनाव, ईरान और अमेरिका के बीच टकराव, रूस-यूक्रेन सप्लाई चिंता, OPEC+ उत्पादन नीति, डॉलर इंडेक्स में मजबूती अगर कच्चा तेल महंगा होता है और रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या सरकार टैक्स कम कर सकती है?
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और कई राज्य सरकारों ने समय-समय पर एक्साइज ड्यूटी और वैट में कटौती की है। हालांकि फिलहाल सरकार की तरफ से किसी बड़े टैक्स कट की घोषणा नहीं हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल लंबे समय तक $100 प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो सरकार पर टैक्स घटाने का दबाव बढ़ सकता है।
आने वाले दिनों में क्या सस्ता होगा डीजल?
ऊर्जा बाजार के जानकारों के मुताबिक अगले कुछ हफ्तों में डीजल की कीमतें इन कारकों पर निर्भर करेंगी कच्चे तेल की वैश्विक कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपया, मानसून और घरेलू मांग, भू-राजनीतिक हालात, सरकारी टैक्स नीति यदि वैश्विक बाजार में राहत मिलती है तो भारतीय ग्राहकों को भी कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो डीजल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
आम लोगों के लिए क्या सलाह?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन लोगों का दैनिक खर्च ईंधन पर अधिक है, उन्हें वाहन की नियमित सर्विसिंग करानी चाहिए अनावश्यक ड्राइविंग कम करनी चाहिए कार पूलिंग अपनानी चाहिए माइलेज बढ़ाने वाली ड्राइविंग तकनीक इस्तेमाल करनी चाहिए इससे बढ़ती ईंधन कीमतों का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
देश में डीजल की कीमतें फिलहाल ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई में डीजल ₹95.02 प्रति लीटर पर है, जबकि हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में यह ₹100 के पार पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में आम जनता, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और उद्योग जगत सभी की नजर अब तेल कंपनियों और सरकार के अगले कदम पर रहेगी।
Source: GoodReturns, International Crude Oil Market Data, Oil Marketing Companies (OMCs)
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