नई दिल्ली: ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी के दौर में लोग जन्मदिन, सालगिरह और दूसरे खास मौकों पर दूर बैठे अपने परिवार वालों को गिफ्ट और केक भेजते हैं। लेकिन अगर ऐसी सेवाएं समय पर पूरी न हों तो उसका असर केवल पैसों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भावनाओं पर भी पड़ता है। दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (दक्षिण-II) का हालिया फैसला इसी बात को मजबूती से सामने लाता है। आयोग ने ऑनलाइन बेकरी कंपनी इंडिया केक्स प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मामला एक ऐसे केक ऑर्डर से जुड़ा था, जो नानी के जन्मदिन के लिए भेजा गया था, लेकिन तय समय पर डिलीवर ही नहीं हुआ। आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा कि जन्मदिन जैसे खास मौकों से जुड़े ऑर्डर केवल व्यावसायिक लेनदेन नहीं होते, बल्कि उनसे लोगों की भावनाएं और रिश्ते जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही उपभोक्ता के मानसिक कष्ट का कारण बनती है।
क्या था पूरा मामला?
दिल्ली निवासी प्रियंका भारद्वाज और स्मिता कुमारी ने 9 फरवरी 2024 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में रहने वाली अपनी नानी के जन्मदिन पर केक और फूल भेजने के लिए ऑनलाइन ऑर्डर किया था। यह ऑर्डर कंपनी की वेबसाइट के जरिए किया गया था। वेबसाइट पर दावा किया गया था कि देशभर में “फ्री सेम-डे डिलीवरी” की सुविधा उपलब्ध है।
हालांकि भुगतान करने के तुरंत बाद कंपनी की ओर से ग्राहकों से अतिरिक्त 275 रुपये डिलीवरी चार्ज के नाम पर मांगे गए। शिकायतकर्ताओं ने यह रकम भी जमा कर दी ताकि जन्मदिन पर समय से केक पहुंच सके। लेकिन इसके बावजूद न तो केक पहुंचा और न ही फूल डिलीवर हुए।
जब परिवार वालों ने इंतजार किया और ऑर्डर नहीं पहुंचा तो शिकायतकर्ताओं ने कंपनी से संपर्क किया। आरोप है कि कंपनी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
कंपनी ने क्या दलील दी?
रिफंड मांगने पर कंपनी ने दावा किया कि डिलीवरी की कोशिश की गई थी, लेकिन रिसीवर ने ऑर्डर लेने से इनकार कर दिया। कंपनी ने अपनी वेबसाइट की शर्तों और नियमों का हवाला देते हुए पैसे लौटाने से भी मना कर दिया।
यहीं से मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। शिकायतकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान कंपनी के कर्मचारियों के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग आयोग के सामने पेश की। इन रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर कंपनी के दावों और वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आया। आयोग ने रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों की जांच के बाद कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया।
आयोग ने क्या कहा?
दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ऑनलाइन कंपनियां आकर्षक विज्ञापन देकर ग्राहकों को लुभाती हैं। “फ्री डिलीवरी” जैसे दावे करने के बाद अतिरिक्त शुल्क मांगना और फिर सेवा न देना अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
आयोग ने यह भी कहा कि जन्मदिन जैसे अवसरों पर भेजे गए उपहार और केक का महत्व केवल आर्थिक नहीं होता। समय पर डिलीवरी न होने से उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा और भावनात्मक नुकसान भी होता है। आयोग ने साफ शब्दों में कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्रचार और वास्तविक सेवा के बीच पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
कितना जुर्माना लगाया गया?
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह ग्राहकों को 1031 रुपये की पूरी राशि वापस करे इस रकम पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे मानसिक पीड़ा के लिए 2000 रुपये अलग से दे, मुकदमेबाजी खर्च के लिए 2000 रुपये और दे आयोग ने यह भुगतान 60 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया। यदि तय समय के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़ाकर 8 प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह मामला केवल एक केक डिलीवरी तक सीमित नहीं है। तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स बाजार में उपभोक्ता अक्सर ऑनलाइन दावों और वास्तविक सेवा के बीच अंतर का सामना करते हैं। कई बार ग्राहक छोटे मामलों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह फैसला दिखाता है कि यदि उपभोक्ता सबूत संभालकर रखें तो बड़ी कंपनियों को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कारोबार में पारदर्शिता और भरोसा सबसे महत्वपूर्ण चीज है। अगर कंपनियां विज्ञापन में बड़े-बड़े वादे करती हैं तो उन्हें उन्हें पूरा भी करना होगा। अन्यथा उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए बड़ा संदेश
हाल के वर्षों में ऑनलाइन फूड, गिफ्ट और केक डिलीवरी का कारोबार तेजी से बढ़ा है। खास मौकों पर लोग इन सेवाओं पर भरोसा करते हैं। लेकिन कई बार अतिरिक्त चार्ज, गलत जानकारी और डिलीवरी में देरी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।
उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। आयोग ने संकेत दिया है कि केवल वेबसाइट पर आकर्षक ऑफर दिखाना काफी नहीं है, बल्कि सेवा की गुणवत्ता और वादों को निभाना भी जरूरी है।
डिजिटल दौर में उपभोक्ताओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
ऑनलाइन खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए भुगतान और ऑर्डर की रसीद सुरक्षित रखें चैट, कॉल या ईमेल का रिकॉर्ड संभालकर रखें वेबसाइट की शर्तों को ध्यान से पढ़ें किसी विवाद की स्थिति में स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखें जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करें उपभोक्ता मामलों के जानकारों के अनुसार अब डिजिटल लेनदेन में सबूत जुटाना आसान हो गया है और अदालतें भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को महत्व दे रही हैं।
बढ़ रही हैं ऑनलाइन डिलीवरी से जुड़ी शिकायतें
देशभर में ऑनलाइन फूड और गिफ्ट डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायतों की संख्या बढ़ रही है। इनमें देरी, गलत उत्पाद, अतिरिक्त चार्ज और रिफंड न मिलने जैसे मामले प्रमुख हैं। उपभोक्ता आयोग लगातार ऐसे मामलों में कंपनियों को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल कारोबार में उपभोक्ता अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और कंपनियां केवल नियमों की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।
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