भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर में तेजी के बीच आई-केयर चेन चलाने वाली Dr. Agarwal’s Health Care को लेकर ब्रोकरेज हाउस काफी बुलिश नजर आ रहे हैं। 360 ONE CM Research ने कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए इसे ‘BUY’ रेटिंग दी है और मौजूदा स्तर से करीब 20 फीसदी से ज्यादा अपसाइड की संभावना जताई है। तेजी से बढ़ते आई-केयर मार्केट, आक्रामक विस्तार और मजबूत बिजनेस मॉडल को कंपनी की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
₹460 के शेयर पर ₹555 का टारगेट
ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का मौजूदा बाजार भाव (CMP) करीब ₹460 है, जबकि इसके लिए ₹555 का टारगेट प्राइस तय किया गया है। यानी निवेशकों को प्रति शेयर करीब ₹95 तक का संभावित फायदा मिल सकता है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह लगभग 20.7% का संभावित रिटर्न बनता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आई-केयर सेक्टर अभी शुरुआती ग्रोथ फेज में है और आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में तेज विस्तार देखने को मिल सकता है। ऐसे में संगठित खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा आई-केयर मार्केट
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां आंखों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती उम्र, मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, शहरी जीवनशैली और जागरूकता बढ़ने से आई-केयर सेवाओं की मांग लगातार मजबूत हो रही है।
360 ONE CM Research के मुताबिक: FY24 में भारतीय आई-केयर मार्केट का आकार करीब ₹378 अरब था, FY28 तक यह बढ़कर ₹550-650 अरब तक पहुंच सकता है, इस दौरान सेक्टर में 12-14% CAGR की ग्रोथ संभव है.
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी की ऑर्गेनाइज्ड आई-केयर मार्केट में लगभग 25% हिस्सेदारी है, जो इसे इस सेक्टर का प्रमुख खिलाड़ी बनाती है।
आक्रामक विस्तार से बढ़ रही कंपनी की ताकत
कंपनी ने पिछले एक दशक में काफी तेज विस्तार किया है। साल 2010 के बाद से कंपनी का नेटवर्क करीब 13 गुना तक बढ़ चुका है। वर्तमान में भारत और अफ्रीका में इसके कुल 272 सेंटर और सुविधाएं हैं।
कंपनी ‘Hub-and-Spoke’ मॉडल पर काम करती है। इसका फायदा यह होता है कि बड़े शहरों में एडवांस सेंटर बनाए जाते हैं, जबकि छोटे शहरों में कम लागत वाले नेटवर्क के जरिए ज्यादा मरीजों तक पहुंच बनाई जाती है। इससे ऑपरेटिंग कॉस्ट कंट्रोल में रहती है और स्केलेबिलिटी बढ़ती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी के नए ग्रीनफील्ड सेंटर केवल 12-15 महीनों में EBITDA Break-even तक पहुंच जाते हैं। यानी नए सेंटर जल्दी कमाई शुरू कर देते हैं।
कंपनी के वित्तीय आंकड़े क्या कहते हैं?
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
| वित्त वर्ष | नेट सेल्स (₹ मिलियन) | EBITDA (₹ मिलियन) | नेट प्रॉफिट (₹ मिलियन) |
|---|---|---|---|
| FY24 | 13,322 | 3,623 | 830 |
| FY25 | 17,110 | 4,564 | 864 |
| FY26E | 20,565 | 5,566 | 1,258 |
| FY27E | 25,339 | 6,936 | 1,907 |
| FY28E | 30,768 | 8,419 | 2,629 |
स्रोत: 360 ONE CM Research
इन आंकड़ों से साफ है कि ब्रोकरेज कंपनी अगले कुछ वर्षों में मजबूत Revenue Growth और Profit Expansion की उम्मीद कर रही है।
किन वजहों से बढ़ सकती है कंपनी की ग्रोथ?
1. बढ़ती उम्र और स्क्रीन टाइम
मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासतौर पर मायोपिया, ड्राई आई और मोतियाबिंद के मामलों में तेजी देखी जा रही है।
2. प्रीमियम सर्जरी की मांग
लोग अब बेहतर आई-केयर और एडवांस सर्जरी पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। कंपनी मोतियाबिंद और रिफ्रैक्टिव सर्जरी जैसे हाई-वैल्यू सेगमेंट में मजबूत मौजूदगी रखती है।
3. अतिरिक्त कमाई के स्रोत
कंपनी सिर्फ हॉस्पिटल सर्विस तक सीमित नहीं है। ऑप्टिकल्स, चश्मे और फार्मा प्रोडक्ट्स की बिक्री भी इसकी आय बढ़ाने में मदद कर रही है।
4. ब्रांड और डॉक्टर नेटवर्क
आई-केयर सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ी चीज होती है। कंपनी के पास अनुभवी डॉक्टरों का बड़ा नेटवर्क और मजबूत ब्रांड वैल्यू है, जिससे मरीजों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
हालांकि ब्रोकरेज रिपोर्ट कंपनी को लेकर सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए। हेल्थकेयर सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, विस्तार की तेज रफ्तार से लागत बढ़ सकती है, नए सेंटर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करें तो मार्जिन प्रभावित हो सकता है, बाजार में उतार-चढ़ाव का असर स्टॉक पर पड़ सकता है
इसके अलावा, हेल्थकेयर सेक्टर में रेगुलेटरी बदलाव और डॉक्टर रिटेंशन भी महत्वपूर्ण फैक्टर रहते हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों की नजर क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में हेल्थकेयर और खासकर आई-केयर सेक्टर अभी लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी है। बढ़ती आय, स्वास्थ्य जागरूकता और निजी स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भविष्य में इस सेक्टर को मजबूत बना सकती है।
अगर कंपनी अपनी विस्तार रणनीति और मार्जिन ग्रोथ को बनाए रखती है, तो आने वाले वर्षों में यह हेल्थकेयर सेक्टर का मजबूत कंपाउंडिंग स्टॉक बन सकता है।
हालांकि किसी भी निवेश से पहले निवेशकों को अपने जोखिम प्रोफाइल और वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए।
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है, इसे निवेश सलाह न माना जाए।)
Also Read:


