टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट (Trent Ltd) को लेकर शेयर बाजार में बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। जूडियो (Zudio), वेस्टसाइड (Westside) और जारा (Zara) जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स को मैनेज करने वाली यह कंपनी अब बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) से बाहर हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में आई गिरावट इसकी सबसे बड़ी वजह बनी है।
बीएसई शुक्रवार को अपने छमाही इंडेक्स रिव्यू की घोषणा करेगा। माना जा रहा है कि इस समीक्षा में ट्रेंट को 30 शेयरों वाले सेंसेक्स से हटाया जा सकता है। उसकी जगह हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco Industries) या श्रीराम फाइनेंस (Shriram Finance) में से किसी एक को शामिल किया जा सकता है।
हालांकि गुरुवार के कारोबार में ट्रेंट के शेयरों में हल्की तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 0.63% की बढ़त के साथ 4124.30 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। लेकिन पिछले एक साल में कंपनी के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ट्रेंट का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 6259 रुपये रहा था, जो पिछले साल 30 जून को बना था। इसके बाद से शेयर में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
क्यों सेंसेक्स से बाहर हो सकती है ट्रेंट?
ब्रोकरेज फर्म नुवामा ऑल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च (Nuvama Alternative & Quantitative Research) की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेंट का फ्री-फ्लोट मार्केट कैप अब सेंसेक्स के दूसरे शेयरों की तुलना में कमजोर हो गया है।
सेंसेक्स में किसी कंपनी को शामिल करने या हटाने के लिए केवल कुल मार्केट कैप नहीं देखा जाता, बल्कि फ्री-फ्लोट मार्केट कैप को ज्यादा महत्व दिया जाता है। यानी बाजार में सार्वजनिक रूप से ट्रेड होने वाले शेयरों का कुल मूल्य।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया गिरावट के कारण ट्रेंट अब सेंसेक्स में बने रहने की पात्रता खो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह बदलाव 19 जून 2026 से प्रभावी हो सकता है।
कौन ले सकता है ट्रेंट की जगह?
रिपोर्ट के अनुसार हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और श्रीराम फाइनेंस इस रेस में सबसे आगे हैं।
हालांकि फ्री-फ्लोट मार्केट कैप के मामले में फिलहाल श्रीराम फाइनेंस आगे दिखाई दे रही है, लेकिन हिंडाल्को की इंडेक्स में एंट्री की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी का बड़ा मार्केट साइज और मेटल सेक्टर में मजबूत मौजूदगी है।
कंपनियों का मार्केट कैप
| कंपनी | मार्केट कैप |
|---|---|
| ट्रेंट | ₹1,46,638.58 करोड़ |
| श्रीराम फाइनेंस | ₹2,15,331.05 करोड़ |
| हिंडाल्को इंडस्ट्रीज | ₹2,45,790.40 करोड़ |
यह समीक्षा 30 अप्रैल 2026 तक के मार्केट कैप डेटा के आधार पर की जा रही है।
सेंसेक्स में बदलाव का शेयरों पर क्या असर पड़ता है?
किसी कंपनी का सेंसेक्स में शामिल होना उसके लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे:
- कंपनी की बाजार में विश्वसनीयता बढ़ती है
- विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है
- इंडेक्स फंड्स और ETF से निवेश आता है
- ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेजी देखने को मिलती है
वहीं सेंसेक्स से बाहर होने पर किसी शेयर में शॉर्ट टर्म दबाव भी देखने को मिल सकता है क्योंकि कई इंडेक्स फंड्स उस शेयर में अपनी हिस्सेदारी कम करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रेंट सेंसेक्स से बाहर होती है तो शुरुआती दिनों में शेयर पर दबाव रह सकता है। हालांकि कंपनी का रिटेल बिजनेस अभी भी मजबूत माना जा रहा है।
ट्रेंट के शेयरों में क्यों आई गिरावट?
पिछले कुछ महीनों में ट्रेंट के शेयरों में भारी मुनाफावसूली देखने को मिली है। कंपनी के शेयरों ने पिछले वर्षों में शानदार रिटर्न दिया था, जिसके बाद वैल्यूएशन काफी महंगे हो गए थे।
इसके अलावा:
- रिटेल सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ना
- उपभोक्ता खर्च में नरमी
- ऊंचे वैल्यूएशन पर बिकवाली
- विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली
जैसे कारणों ने भी शेयर पर दबाव बनाया है।
हालांकि कई ब्रोकरेज फर्म अब भी ट्रेंट के लॉन्ग टर्म बिजनेस मॉडल को मजबूत मानती हैं क्योंकि जूडियो ब्रांड तेजी से विस्तार कर रहा है और कंपनी लगातार नए स्टोर खोल रही है।
बाजार की नजर शुक्रवार के रिव्यू पर
अब निवेशकों की नजर बीएसई के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हुई है। अगर हिंडाल्को या श्रीराम फाइनेंस को सेंसेक्स में जगह मिलती है तो इन शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडेक्स बदलाव का असर शॉर्ट टर्म में ज्यादा दिखता है, जबकि लंबी अवधि में कंपनी की कमाई, बिजनेस ग्रोथ और सेक्टर आउटलुक ज्यादा महत्वपूर्ण रहते हैं।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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