भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं बल्कि करोड़ों किसानों की कमाई, देश की संस्कृति और विदेशी व्यापार का बड़ा हिस्सा बन चुका है। गर्मियों की शुरुआत होते ही बाजारों में दशहरी, लंगड़ा, अल्फांसो, चौसा, तोतापुरी और केसर जैसे आमों की बहार आ जाती है। देश के अलग-अलग राज्यों में उगने वाले आमों का स्वाद, रंग और खुशबू भी अलग होती है। यही वजह है कि भारतीय आमों की मांग अब सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है। यहां की जलवायु और मिट्टी आम की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक करोड़ों किसान आम की बागवानी से जुड़े हुए हैं। आम की खेती से न केवल किसानों की आय बढ़ती है बल्कि इससे जुड़ी प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और एक्सपोर्ट सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा आम किस राज्य में पैदा होता है? आंकड़े बताते हैं कि एक राज्य ऐसा है जहां अकेले पूरे देश का हर चौथा आम उगाया जाता है।
यूपी बना देश का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य
वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा आम उत्पादन करने वाला राज्य रहा। राज्य में इस दौरान करीब 61.47 लाख टन आम का उत्पादन हुआ। पूरे देश के कुल आम उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी 26.56 फीसदी रही। इसका मतलब है कि भारत में उगने वाला हर चौथा आम अकेले उत्तर प्रदेश से आता है।
उत्तर प्रदेश में मलिहाबाद का दशहरी आम दुनियाभर में मशहूर है। इसके अलावा चौसा और लंगड़ा किस्म की भी काफी मांग रहती है। राज्य में बड़ी संख्या में किसान आम की खेती पर निर्भर हैं और यहां से देशभर में बड़े पैमाने पर सप्लाई होती है।
दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश आम उत्पादन में दूसरे स्थान पर रहा। यहां 49.86 लाख टन आम का उत्पादन हुआ और राष्ट्रीय उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 21.55 फीसदी रही। दक्षिण भारत में तोतापुरी और बंगनपल्ली जैसी किस्मों की काफी मांग रहती है। यहां का आम जूस और पल्प इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
बिहार और कर्नाटक भी टॉप राज्यों में शामिल
बिहार 15.85 लाख टन उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर रहा। राज्य के जर्दालू आम की विदेशों तक मांग रहती है। वहीं कर्नाटक 15.75 लाख टन उत्पादन के साथ चौथे नंबर पर रहा। यहां अल्फांसो और बादामी जैसी किस्में काफी लोकप्रिय हैं।
गुजरात, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और तमिलनाडु भी बड़े आम उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। गुजरात का केसर आम और पश्चिम बंगाल का हिमसागर आम देशभर में पसंद किया जाता है।
ये हैं देश के 20 सबसे बड़े आम उत्पादक राज्य
| राज्य | उत्पादन (000 टन) | हिस्सेदारी (%) |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 6,147.24 | 26.56 |
| आंध्र प्रदेश | 4,986.43 | 21.55 |
| बिहार | 1,585.54 | 6.85 |
| कर्नाटक | 1,575.45 | 6.81 |
| गुजरात | 1,272.64 | 5.50 |
| पश्चिम बंगाल | 1,080.26 | 4.67 |
| तेलंगाना | 1,052.20 | 4.55 |
| तमिलनाडु | 1,016.06 | 4.39 |
| मध्य प्रदेश | 951.70 | 4.11 |
| ओडिशा | 930.66 | 4.02 |
| महाराष्ट्र | 513.02 | 2.22 |
| छत्तीसगढ़ | 470.98 | 2.04 |
| झारखंड | 454.05 | 1.96 |
| केरल | 433.74 | 1.87 |
| पंजाब | 185.52 | 0.80 |
| उत्तराखंड | 113.90 | 0.49 |
| हरियाणा | 92.86 | 0.40 |
| असम | 66.10 | 0.29 |
| राजस्थान | 63.01 | 0.27 |
| त्रिपुरा | 51.37 | 0.22 |
विदेशों में बढ़ रही भारतीय आमों की मांग
भारतीय आमों की मिठास अब विदेशों तक पहुंच चुकी है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से करीब 544 करोड़ रुपये के आमों का निर्यात किया गया। संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर भारतीय आमों के बड़े खरीदार रहे।
खाड़ी देशों में भारतीय आमों की खास मांग देखने को मिलती है। वहां रहने वाले भारतीयों के अलावा विदेशी लोग भी भारतीय आम के स्वाद को काफी पसंद करते हैं। खासकर अल्फांसो, केसर और दशहरी जैसी किस्में विदेशों में प्रीमियम कीमत पर बिकती हैं।
प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को भी मिलता है फायदा
आम का इस्तेमाल सिर्फ फल के रूप में ही नहीं होता। इससे जूस, पल्प, आइसक्रीम, कैंडी, जैम, अचार और मिठाइयां भी बनाई जाती हैं। भारत में कई बड़ी फूड कंपनियां आम आधारित उत्पादों का कारोबार करती हैं। इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलता है और कृषि आधारित उद्योगों को भी मजबूती मिलती है।
किसानों की कमाई का बड़ा जरिया बना आम
विशेषज्ञों का कहना है कि आम की बागवानी किसानों के लिए नकदी फसल की तरह काम करती है। कई राज्यों में किसान पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी की तरफ बढ़ रहे हैं क्योंकि इससे बेहतर मुनाफा मिलता है। सरकार भी फल उत्पादन और एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है।
भारत में आम की बढ़ती मांग और निर्यात को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और तेजी से बढ़ सकता है। यही वजह है कि आम अब सिर्फ फलों का राजा नहीं बल्कि भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का भी अहम हिस्सा बन चुका है।
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