घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। सुबह वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते निवेशकों ने जमकर खरीदारी की और बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 550 अंकों तक उछल गया। वहीं निफ्टी50 भी 23,800 के स्तर के ऊपर पहुंच गया था। लेकिन दिन चढ़ने के साथ बाजार की चाल बदल गई और आईटी तथा एफएमसीजी सेक्टर में बिकवाली बढ़ने से बाजार की शुरुआती बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 135.03 अंक यानी 0.18 फीसदी की गिरावट के साथ 75,183.36 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 लगभग सपाट बंद हुआ और 4.3 अंक की मामूली गिरावट के साथ 23,654.70 अंक पर आ गया।
हालांकि शेयर बाजार की कमजोरी के बीच विदेशी मुद्रा बाजार से राहत भरी खबर आई। लगातार नौ कारोबारी सत्रों से दबाव झेल रहा भारतीय रुपया आखिरकार मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 96.20 के स्तर पर बंद हुआ। माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के हस्तक्षेप और डॉलर में नरमी के कारण रुपये को सहारा मिला।
सुबह की तेजी आखिर क्यों टिक नहीं पाई?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों से मिले मजबूत संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा था। लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली तेज हो गई।
विशेष रूप से आईटी सेक्टर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता का असर दिखा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार में अभी भी संशय बना हुआ है। इससे टेक कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा। इसके अलावा एफएमसीजी शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
सेंसेक्स के इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव फाइनेंशियल और आईटी शेयरों में देखने को मिला।गिरावट वाले प्रमुख शेयर: बजाज फाइनेंस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल.
बजाज फाइनेंस में सबसे ज्यादा 1.64 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसे आईटी दिग्गजों में भी एक फीसदी से ज्यादा कमजोरी रही।
इन शेयरों ने संभाला बाजार
हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ सेक्टरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और मेटल शेयरों में मजबूती रही। तेजी वाले प्रमुख शेयर: इंडिगो, ट्रेंट, बीईएल, अडानी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो.
विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है। सरकार के बड़े प्रोजेक्ट्स और निजी निवेश बढ़ने की उम्मीद से इन सेक्टरों को सपोर्ट मिल रहा है।
ब्रॉडर मार्केट में क्या रहा हाल?
मुख्य सूचकांकों में कमजोरी के बावजूद ब्रॉडर मार्केट ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.04 फीसदी गिरा, निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.63 फीसदी चढ़ा.
यह संकेत देता है कि निवेशकों की रुचि अभी भी छोटे और मझोले शेयरों में बनी हुई है। कई निवेशक बड़ी कंपनियों की बजाय हाई ग्रोथ वाले स्मॉलकैप शेयरों में अवसर तलाश रहे हैं।
सेक्टरवार बाजार का प्रदर्शन
अगर सेक्टरवार प्रदर्शन देखें तो बाजार में साफ बंटवारा नजर आया।
गिरावट वाले सेक्टर
- निफ्टी आईटी
- निफ्टी एफएमसीजी
- निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज
तेजी वाले सेक्टर
- निफ्टी रियल्टी
- निफ्टी सीमेंट
रियल एस्टेट और सीमेंट सेक्टर में तेजी को इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों और निर्माण क्षेत्र में मांग बढ़ने से जोड़कर देखा जा रहा है।
नौ दिन बाद मजबूत हुआ रुपया
शेयर बाजार में कमजोरी के बीच रुपये की मजबूती निवेशकों के लिए राहत की बात रही। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया डॉलर के मुकाबले 96.82 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। लेकिन गुरुवार को इसमें सुधार देखने को मिला और यह करीब 0.60 फीसदी मजबूत होकर 96.20 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार: RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया, कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई, विदेशी निवेशकों की बिकवाली कुछ कम हुई. इन कारणों से रुपये को सपोर्ट मिला।
ईरान युद्ध का असर अभी भी जारी
विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारतीय बाजारों और रुपये दोनों पर दिख रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में करीब 6 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत का आयात बिल बढ़ता है और इसका सीधा दबाव रुपये पर पड़ता है।
अगर आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो: कच्चा तेल और महंगा हो सकता है, महंगाई बढ़ सकती है, विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो सकती है. ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है।
निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। वैश्विक संकेत, अमेरिकी ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और कॉर्पोरेट आय में सुधार भारतीय बाजार को लंबी अवधि में सपोर्ट दे सकते हैं।
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