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Reading: भारत का रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, लेकिन चीनी युआन ने रचा इतिहास; आखिर ड्रैगन ने डॉलर को कैसे साधा?
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भारत का रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, लेकिन चीनी युआन ने रचा इतिहास; आखिर ड्रैगन ने डॉलर को कैसे साधा?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/27 at 11:39 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
china-yuan-vs-indian-rupee-dollar-strength-explained
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भारतीय रुपये पर इस समय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया हाल में 96.97 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी तरफ चीन की मुद्रा युआन (Chinese Yuan) ने तीन साल का सबसे मजबूत स्तर छू लिया है। ऐसे समय में जब दुनिया की ज्यादातर करेंसी अमेरिकी डॉलर के दबाव में कमजोर पड़ रही हैं, चीन का युआन मजबूत होना ग्लोबल मार्केट में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

Contents
रिकॉर्ड निचले स्तर पर क्यों पहुंचा भारतीय रुपया?दूसरी तरफ क्यों मजबूत हो रहा है चीनी युआन?क्या होता है चीन का “डेली फिक्सिंग सिस्टम”?फरवरी 2023 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर पहुंचा युआनआखिर चीन डॉलर को कैसे “साध” लेता है?1. सख्त केंद्रीय नियंत्रण2. विशाल विदेशी मुद्रा भंडार3. निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था4. कैपिटल कंट्रोलक्या भारत भी चीन जैसा मॉडल अपना सकता है?ग्लोबल बैंकों ने युआन पर क्या कहा?भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?आगे क्या रहेगा नजर रखने वाला बड़ा फैक्टर?

विदेशी निवेशकों की निकासी, महंगा कच्चा तेल, पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर इंडेक्स की मजबूती जैसे कारणों ने भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ाया है। वहीं चीन ने अपने सेंट्रल बैंक के जरिए करेंसी पर जिस तरह का कंट्रोल बनाया हुआ है, उसने युआन को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखा है।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर क्यों पहुंचा भारतीय रुपया?

भारतीय मुद्रा में कमजोरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे पहला कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और जब तेल महंगा होता है तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इससे रुपये पर दबाव आता है।

इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह बनी हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स मजबूत होने पर निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की ओर शिफ्ट करते हैं। इसका असर भारतीय मुद्रा पर सीधा पड़ता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को स्थिर करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें ब्याज दरों में संभावित बदलाव, करेंसी स्वैप व्यवस्था को बढ़ाना और विदेशी मुद्रा भंडार के बेहतर इस्तेमाल जैसे उपाय शामिल हैं।

दूसरी तरफ क्यों मजबूत हो रहा है चीनी युआन?

जहां भारतीय रुपया बाजार आधारित उतार-चढ़ाव का ज्यादा सामना करता है, वहीं चीन का मॉडल काफी अलग है। चीन की करेंसी पूरी तरह फ्री-फ्लोटिंग नहीं है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) हर दिन युआन के लिए एक रेफरेंस रेट या “सेंट्रल पैरिटी” तय करता है।

यानी बाजार खुलने से पहले चीन का सेंट्रल बैंक यह तय कर देता है कि डॉलर के मुकाबले युआन किस स्तर के आसपास ट्रेड करेगा। इसके बाद युआन को केवल सीमित दायरे में ऊपर या नीचे जाने की अनुमति होती है।

यही वजह है कि चीन अचानक होने वाली भारी गिरावट या तेज उछाल को काफी हद तक नियंत्रित कर लेता है।

क्या होता है चीन का “डेली फिक्सिंग सिस्टम”?

चीन का सेंट्रल बैंक रोजाना डॉलर-युआन के लिए एक मिडपॉइंट तय करता है। बाजार में युआन इसी स्तर के आसपास ट्रेड करता है और उसे केवल लगभग 2% ऊपर या नीचे जाने की अनुमति होती है।

इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि: बाजार में अत्यधिक घबराहट कम होती है, विदेशी निवेशकों को स्थिरता का संकेत मिलता है, अचानक करेंसी क्रैश की संभावना घटती है, सरकार एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा को भी नियंत्रित कर पाती है यानी चीन पूरी तरह बाजार के भरोसे अपनी मुद्रा को नहीं छोड़ता।

फरवरी 2023 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर पहुंचा युआन

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने हाल में युआन की डेली फिक्सिंग 6.8349 प्रति डॉलर तय की, जो फरवरी 2023 के बाद सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है।

बाजार में ऑनशोर युआन करीब 6.80 प्रति डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा। पिछले कुछ हफ्तों में ग्लोबल बैंक और ब्रोकरेज हाउस भी युआन को लेकर ज्यादा सकारात्मक नजर आ रहे हैं।

आखिर चीन डॉलर को कैसे “साध” लेता है?

चीन की रणनीति कई स्तरों पर काम करती है।

1. सख्त केंद्रीय नियंत्रण

PBoC सीधे बाजार को संकेत देता है कि करेंसी किस रेंज में रहनी चाहिए। इससे सट्टेबाजी सीमित रहती है।

2. विशाल विदेशी मुद्रा भंडार

चीन के पास दुनिया के सबसे बड़े फॉरेक्स रिजर्व में से एक है। जरूरत पड़ने पर वह डॉलर बेचकर युआन को सपोर्ट कर सकता है।

3. निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था

चीन अपनी करेंसी को इस तरह मैनेज करता है कि एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धी बने रहें। बहुत ज्यादा मजबूत युआन भी चीन नहीं चाहता।

4. कैपिटल कंट्रोल

चीन में पूंजी का आवागमन भारत और पश्चिमी देशों की तुलना में ज्यादा नियंत्रित है। इससे अचानक बड़े पैमाने पर डॉलर आउटफ्लो की संभावना कम रहती है।

क्या भारत भी चीन जैसा मॉडल अपना सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए चीन जैसा सख्त मॉडल अपनाना आसान नहीं है। भारत एक अधिक खुली और बाजार आधारित अर्थव्यवस्था है। यहां विदेशी निवेश का प्रवाह और आउटफ्लो अपेक्षाकृत स्वतंत्र है।

हालांकि RBI समय-समय पर डॉलर बेचकर और लिक्विडिटी मैनेज करके रुपये को सपोर्ट जरूर करता है। लेकिन भारत पूरी तरह नियंत्रित करेंसी व्यवस्था की ओर नहीं जाना चाहता क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

ग्लोबल बैंकों ने युआन पर क्या कहा?

बैंक ऑफ अमेरिका ने अनुमान लगाया है कि 2026 के अंत तक चीनी युआन मजबूत होकर 6.70 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।

वहीं गोल्डमैन सैक्स ने भी अपना आउटलुक अपग्रेड करते हुए कहा है कि:

  • 3 महीने में युआन 6.80 तक जा सकता है
  • 6 महीने में 6.70 तक मजबूत हो सकता है
  • 12 महीने में 6.50 का स्तर भी संभव है

इन अनुमानों से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान फिलहाल चीनी मुद्रा को लेकर सकारात्मक नजरिया रख रहे हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर रुपया लगातार कमजोर रहता है तो: पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, आयात लागत बढ़ेगी, महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, विदेशी शिक्षा और यात्रा महंगी होगी, कंपनियों का डॉलर आधारित कर्ज महंगा पड़ेगा. हालांकि आईटी और एक्सपोर्ट सेक्टर की कुछ कंपनियों को कमजोर रुपये से फायदा भी मिल सकता है क्योंकि उनकी डॉलर में कमाई बढ़ जाती है।

आगे क्या रहेगा नजर रखने वाला बड़ा फैक्टर?

अब बाजार की नजर तीन बड़ी चीजों पर रहेगी: पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, RBI और PBoC के अगले कदम अगर कच्चे तेल में तेजी जारी रहती है और डॉलर मजबूत बना रहता है तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। वहीं चीन अपने नियंत्रित मॉडल के जरिए युआन को स्थिर रखने की कोशिश जारी रख सकता है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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