भारत में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर तेजी से काम हो रहा है और अब अरबपति कारोबारी Anil Agarwal के वेदांता समूह की कंपनी Runaya Metsource Ltd ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने कोबाल्ट, कैडमियम, कॉपर समेत कई महत्वपूर्ण धातुओं के उत्पादन को बढ़ाने का फैसला लिया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार चीन पर निर्भरता कम करने और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बैटरी, रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे सेक्टरों के लिए जरूरी धातुओं की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में क्रिटिकल मिनरल्स भारत की औद्योगिक और रणनीतिक ताकत तय करेंगे।
राजस्थान में बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
वेदांता समूह की कंपनी Runaya राजस्थान स्थित जिंक इंडस्ट्रियल पार्क में अपनी क्षमता का विस्तार कर रही है। कंपनी के मुताबिक इन सुविधाओं की स्थापित क्षमता 70,000 टन प्रति वर्ष से अधिक है।
Runaya औद्योगिक अवशेषों और सेकेंडरी रिसोर्सेज को प्रोसेस करके उनसे महत्वपूर्ण धातुएं निकालती है। इसमें कोबाल्ट, कैडमियम, कॉपर और अन्य बेस मेटल शामिल हैं, जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
कंपनी का कहना है कि यह विस्तार सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे भारत में एक क्लस्टर-आधारित मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भी विकसित होगा। इसके जरिए स्थानीय उद्योगों को सप्लाई चेन मजबूत करने और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये क्रिटिकल मेटल्स?
आज दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज सिस्टम और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन सभी सेक्टरों में कोबाल्ट, कॉपर और कैडमियम जैसी धातुओं की अहम भूमिका होती है।
इन सेक्टरों में होता है इस्तेमाल
| धातु | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| कोबाल्ट | EV बैटरी, ऊर्जा भंडारण |
| कॉपर | पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक वायरिंग |
| कैडमियम | इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एप्लिकेशन |
| बेस मेटल्स | औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर उपयोग |
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दशक में EV और डेटा सेंटर की मांग बढ़ने से इन धातुओं की वैश्विक खपत कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे में भारत घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है।
चीन के फैसले के बाद बढ़ी भारत की चिंता
साल 2025 में चीन द्वारा कुछ महत्वपूर्ण मिनरल्स और रेयर मेटल्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ गई थी। दरअसल, चीन लंबे समय से क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन में सबसे बड़ा खिलाड़ी रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी से लेकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग तक कई उद्योग चीनी सप्लाई पर निर्भर हैं।
इसी वजह से भारत सरकार अब “Critical Minerals Mission” के तहत घरेलू उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीक लाने और निजी कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
Runaya का यह विस्तार उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वेदांता डीमर्जर के बाद बढ़ी गतिविधियां
हाल ही में Vedanta Limited का डीमर्जर पूरा हुआ है। कंपनी पांच हिस्सों में बंटी थी और नई कंपनियों के शेयर निवेशकों के डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
अब बाजार की नजर इन कंपनियों की लिस्टिंग और भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर है। ऐसे समय में Runaya का यह विस्तार वेदांता समूह के मेटल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आक्रामक विस्तार की ओर संकेत देता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में एनर्जी ट्रांजिशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बढ़ने से क्रिटिकल मेटल्स सेक्टर में आने वाले वर्षों में भारी निवेश देखने को मिल सकता है।
कंपनी ने क्या कहा?
Runaya के मैनेजिंग डायरेक्टर Naivedya Agarwal ने कहा कि कंपनी भारत के क्रिटिकल मिनरल्स मिशन को आगे बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड सर्कुलर प्लेटफॉर्म बना रही है।
उन्होंने कहा:
“हम जरूरी धातुओं की रिकवरी के लिए एक इंटीग्रेटेड सर्कुलर प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं। मौजूदा ऑपरेशन्स और नई क्षमता के जरिए हम एक बड़े पैमाने का वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रहे हैं।”
कंपनी का दावा है कि यह मॉडल सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा और भारत की ऊर्जा एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।
उन्नत तकनीक से होगा उत्पादन
Runaya सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही है। इस प्रक्रिया के जरिए औद्योगिक अवशेषों से मूल्यवान धातुओं की रिकवरी की जाती है।
यह तकनीक पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे वेस्ट मैटेरियल का दोबारा उपयोग संभव होता है और माइनिंग पर दबाव कम पड़ता है।
ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल इंडस्ट्री की दिशा में यह मॉडल आने वाले समय में भारत के लिए अहम साबित हो सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत अभी भी कई महत्वपूर्ण मिनरल्स के लिए आयात पर निर्भर है। अगर घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ता है तो: EV सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बैटरी निर्माण लागत कम हो सकती है, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा, विदेशी निर्भरता घटेगी, रोजगार और निवेश बढ़ेगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में क्रिटिकल मिनरल्स “नया तेल” साबित हो सकते हैं। ऐसे में जो देश सप्लाई चेन पर पकड़ बनाएंगे, वही भविष्य की इंडस्ट्रियल इकोनॉमी में आगे रहेंगे।
Also Read:


