दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सख्त टैक्स नियमों के बीच दुबई भारतीय कारोबारियों के लिए सबसे भरोसेमंद वैश्विक बिजनेस हब बनकर उभरा है। यही वजह है कि भारत के बड़े ज्वैलर्स, रिटेल कारोबारी, टेक कंपनियां और लॉजिस्टिक्स फर्म तेजी से दुबई की ओर रुख कर रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक दुबई में सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़कर 84,088 पहुंच गई है। यह संख्या सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारतीय उद्योगपति अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि वैश्विक विस्तार के लिए स्थिर और सुरक्षित प्लेटफॉर्म तलाश रहे हैं।
दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार, केवल 2026 की पहली तिमाही में ही 3,995 नई भारतीय कंपनियां दुबई में शामिल हुईं। इसके साथ भारत दुबई का सबसे बड़ा विदेशी व्यापारिक समुदाय बन गया है। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब कई देशों में कारोबारी माहौल महंगाई, युद्ध और सप्लाई चेन संकट की वजह से प्रभावित है।
आखिर दुबई में ऐसा क्या है जो भारतीय कारोबारियों को आकर्षित कर रहा?
दुबई पिछले कुछ वर्षों में केवल पर्यटन केंद्र नहीं रहा, बल्कि उसने खुद को एक ग्लोबल बिजनेस गेटवे के रूप में विकसित किया है। भारतीय कंपनियों के लिए यहां कई ऐसी सुविधाएं हैं जो उन्हें दूसरे देशों की तुलना में अधिक सुरक्षित और लाभकारी लगती हैं।
सबसे बड़ी वजह है टैक्स और नियामकीय स्पष्टता। यूएई में लंबे समय तक कॉर्पोरेट टैक्स बेहद कम रहा और अब भी कई फ्री जोन कंपनियों को टैक्स राहत मिलती है। इसके अलावा बिजनेस शुरू करने की प्रक्रिया काफी तेज और डिजिटल है। भारतीय कंपनियों को वहां लाइसेंस, बैंकिंग और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट आसानी से मिल जाता है।
दूसरी बड़ी वजह है भौगोलिक स्थिति। दुबई एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच ऐसा केंद्र है जहां से दुनिया के बड़े बाजारों तक तेज पहुंच संभव है। यही कारण है कि भारतीय निर्यातक और ट्रेडिंग कंपनियां दुबई को अपने इंटरनेशनल ऑपरेशन का बेस बना रही हैं।
दुनिया के 45 देशों से क्यों घट रहा भरोसा?
वैश्विक स्तर पर कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता, ऊंची ब्याज दरें, मुद्रा संकट और व्यापारिक प्रतिबंधों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यूरोप में मंदी का डर, अमेरिका में लगातार सख्त वित्तीय नीतियां और पश्चिम एशिया में तनाव ने कंपनियों को सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है।
ऐसे माहौल में दुबई ने खुद को “स्थिर और बिजनेस-फ्रेंडली” विकल्प के रूप में पेश किया है। वहां की सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्री जोन, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इकोनॉमी में निवेश कर रही है। यही वजह है कि कई भारतीय कंपनियां अब सिंगापुर, हांगकांग और कुछ यूरोपीय बाजारों की बजाय दुबई को प्राथमिकता देने लगी हैं।
दुबई चैंबर्स के प्रमुख ने क्या कहा?
दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष और सीईओ महामहिम मोहम्मद अली राशिद लूताह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक माहौल में कंपनियां ऐसे बाजारों को प्राथमिकता दे रही हैं जहां स्थिरता, स्पष्टता और दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं मौजूद हों।
उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि उन्हें दुबई के बिजनेस मॉडल और वहां की नीतियों पर भरोसा है। दुबई सरकार कंपनियों को ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रही है जिससे वे आत्मविश्वास के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर सकें।
भारत के सबसे बड़े ज्वैलर्स भी क्यों कर रहे दुबई पर भरोसा?
जॉयअलुक्कास ग्रुप के चेयरमैन डॉ. जॉय अलुक्कास ने कहा कि यूएई ने पिछले 39 वर्षों में उनके वैश्विक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हर संकट के समय यूएई सरकार ने व्यापारिक समुदाय का पूरा समर्थन किया।
उनके मुताबिक दुबई की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थिरता, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई नीतियां हैं। ज्वेलरी कारोबार जैसे सेक्टर में जहां सोने की कीमतों और वैश्विक मांग में लगातार उतार-चढ़ाव रहता है, वहां स्थिर बिजनेस माहौल बेहद महत्वपूर्ण होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के बड़े ज्वैलर्स के दुबई में विस्तार का एक बड़ा कारण गोल्ड ट्रेड का मजबूत इकोसिस्टम भी है। दुबई को लंबे समय से “City of Gold” कहा जाता है और यहां सोने के आयात-निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं काफी आसान हैं।
भारतीय कारोबारियों को दुबई से क्या बड़ा फायदा मिल रहा?
1. आसान ग्लोबल एक्सपोर्ट
दुबई से कंपनियां मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप तक आसानी से सामान भेज सकती हैं।
2. मजबूत बैंकिंग सिस्टम
यूएई की बैंकिंग व्यवस्था को दुनिया की सबसे स्थिर व्यवस्थाओं में गिना जाता है।
3. कम टैक्स और फ्री जोन
कई सेक्टरों में टैक्स राहत और 100% विदेशी स्वामित्व की अनुमति कंपनियों को आकर्षित करती है।
4. तेज लॉजिस्टिक्स
दुबई के पोर्ट और एयर कार्गो नेटवर्क दुनिया के सबसे तेज नेटवर्क में शामिल हैं।
5. भारतीय समुदाय की मजबूत मौजूदगी
दुबई में बड़ी भारतीय आबादी होने से व्यापार और नेटवर्किंग आसान हो जाती है।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन ने कैसे बढ़ाया भरोसा?
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद दुबई ने सप्लाई चेन को प्रभावित नहीं होने दिया। दुबई सरकार ने मार्च 2026 में 1 अरब AED का आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया जिससे कारोबारियों को नकदी और परिचालन संबंधी राहत मिली।
इसके अलावा खोरफक्कन और फुजैरा जैसे वैकल्पिक बंदरगाहों के जरिए माल की आवाजाही जारी रखी गई। दुबई-ओमान ग्रीन कॉरिडोर ने भी व्यापार को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब दुनिया के कई हिस्सों में सप्लाई चेन बाधित हो रही थी, तब दुबई ने खुद को “reliable logistics hub” के रूप में स्थापित किया।
भारतीय स्टार्टअप और टेक कंपनियां भी पीछे नहीं
अब केवल पारंपरिक कारोबारी ही नहीं, बल्कि भारतीय स्टार्टअप और फिनटेक कंपनियां भी दुबई में तेजी से विस्तार कर रही हैं। AI, फिनटेक, ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट सेक्टर की कई भारतीय कंपनियों ने दुबई में अपने क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित किए हैं।
दुबई इंटरनेशनल चैंबर मुंबई और बेंगलुरु में अपने कार्यालयों के जरिए भारतीय कंपनियों को वहां कारोबार शुरू करने में सहायता दे रहा है। इससे नई कंपनियों के लिए दुबई में प्रवेश और आसान हो गया है।
भारत-दुबई व्यापार संबंध क्यों हो रहे मजबूत?
भारत और यूएई के बीच CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) लागू होने के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत हुए हैं। इससे कई उत्पादों पर शुल्क कम हुए और व्यापार प्रक्रिया आसान बनी।
भारत अब यूएई का प्रमुख व्यापारिक साझेदार बन चुका है। पेट्रोलियम, जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में तेजी आई है।
क्या आने वाले समय में और बढ़ेगी भारतीय कंपनियों की संख्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक आर्थिक माहौल इसी तरह अनिश्चित बना रहा तो अगले कुछ वर्षों में दुबई में भारतीय कंपनियों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, रिटेल और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की कंपनियां दुबई को अपना इंटरनेशनल बेस बना सकती हैं।
दुबई की नीति स्पष्ट है — विदेशी निवेश आकर्षित करना और खुद को दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस हब्स में शामिल करना। भारतीय कंपनियां फिलहाल इस अवसर का सबसे ज्यादा फायदा उठाती दिख रही हैं।
निष्कर्ष
84 हजार से ज्यादा भारतीय कंपनियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि दुबई अब केवल एक व्यापारिक शहर नहीं, बल्कि भारतीय कारोबारियों के लिए वैश्विक विस्तार का सबसे भरोसेमंद मंच बन चुका है। स्थिर नीतियां, मजबूत लॉजिस्टिक्स, टैक्स लाभ और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर ने इसे ऐसे समय में सुरक्षित विकल्प बना दिया है जब दुनिया के कई बड़े बाजार अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। भारतीय कारोबारियों का बढ़ता भरोसा आने वाले वर्षों में भारत-दुबई आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।
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