भारत के जूलरी सेक्टर में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सोने और चांदी पर सरकार द्वारा इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद जूलरी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई है। लगातार तीसरे कारोबारी दिन निवेशकों ने जूलरी स्टॉक्स से दूरी बनाई, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों के मार्केट कैप में करीब ₹60,000 करोड़ की गिरावट आ गई।
सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। बाजार को डर है कि इससे सोने की मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर देश है और यहां जूलरी इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा शादी-ब्याह और निवेश आधारित खरीदारी पर निर्भर करता है। ऐसे में ड्यूटी बढ़ने और प्रधानमंत्री की अपील ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में जूलरी कंपनियों की बिक्री, मार्जिन और स्टोर फुटफॉल पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि पिछले तीन दिनों में कई जूलरी शेयर 20% तक टूट गए।
क्यों टूटा जूलरी सेक्टर?
जूलरी कंपनियों में गिरावट के पीछे दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला कारण सरकार द्वारा सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाना है। नई व्यवस्था के तहत बेसिक कस्टम ड्यूटी और AIDC मिलाकर प्रभावी टैक्स 15% तक पहुंच गया है। इससे घरेलू बाजार में सोना काफी महंगा हो जाएगा।
दूसरा बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील रही। प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए लोगों से कुछ समय तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। बाजार ने इसे गोल्ड डिमांड पर संभावित दबाव के संकेत के तौर पर लिया। इन दोनों घटनाओं का असर सबसे ज्यादा जूलरी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।
सबसे ज्यादा टूटे कल्याण जूलर्स के शेयर
इस गिरावट में सबसे बड़ा नुकसान कल्याण जूलर्स को हुआ है। कंपनी का शेयर बुधवार को करीब 6% टूटकर ₹340.10 तक पहुंच गया, जो इसका 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि:
- पिछले तीन दिनों में शेयर लगभग 20% टूट चुका है।
- शेयर अपने 52-वीक हाई से करीब 45% नीचे आ चुका है।
- 24 जुलाई 2025 को यह शेयर ₹617.30 तक गया था।
बाजार को डर है कि अगर सोने की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो मिडिल क्लास और शादी आधारित खरीदारी प्रभावित हो सकती है। इसका असर सीधे कल्याण जूलर्स जैसी कंपनियों की बिक्री पर पड़ सकता है।
टाइटन पर भी दबाव
टाटा ग्रुप की जूलरी कंपनी टाइटन भी बिकवाली से नहीं बच सकी। कंपनी के शेयरों में पिछले तीन दिनों में लगभग 12% की गिरावट आई है।
बुधवार के कारोबार में शेयर ₹4,043.95 पर खुला, कारोबार के दौरान ₹3,987.55 तक फिसला, 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर ₹4,601.10 रहा है हालांकि टाइटन को अपेक्षाकृत मजबूत ब्रांड और प्रीमियम ग्राहक आधार का फायदा मिल सकता है, लेकिन निवेशकों को चिंता है कि ऊंचे सोने के दाम पूरे सेक्टर की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
दूसरे जूलरी स्टॉक्स का क्या हाल?
सिर्फ कल्याण जूलर्स और टाइटन ही नहीं, बल्कि लगभग पूरा जूलरी सेक्टर दबाव में दिखाई दिया।
प्रमुख शेयरों में गिरावट:
| कंपनी | हालिया गिरावट |
|---|---|
| Kalyan Jewellers | लगभग 20% (3 दिन में) |
| Titan | लगभग 12% |
| Senco Gold | लगभग 18% |
| Thangamayil Jewellery | करीब 6% |
| PN Gadgil Jewellers | 1% से ज्यादा |
बाजार में यह डर तेजी से बढ़ रहा है कि ऊंचे सोने के दाम उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को प्रभावित करेंगे।
सरकार ने ड्यूटी क्यों बढ़ाई?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है। इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा हो, डॉलर मजबूत हो, और वैश्विक संकट बढ़ रहा हो, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने गोल्ड इम्पोर्ट पर लगभग 71.98 अरब डॉलर खर्च किए। सरकार का मानना है कि अगर गोल्ड इम्पोर्ट को नियंत्रित नहीं किया गया, तो विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सोने की मांग कम करने की कोशिश की है।
क्या सच में सोने की मांग घट सकती है?
विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है।
मांग घटने के पक्ष में तर्क:
- ऊंची कीमतें खरीदारी घटा सकती हैं
- शादी सीजन में ग्राहक हल्के गहने खरीद सकते हैं
- निवेशक डिजिटल गोल्ड या ETF की तरफ जा सकते हैं
मांग मजबूत रहने के पक्ष में तर्क:
- भारत में सोना सांस्कृतिक जरूरत है
- शादी और त्योहारों में खरीदारी पूरी तरह रुकना मुश्किल
- महंगाई और वैश्विक संकट में लोग सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं
हालांकि अल्पकाल में बाजार sentiment नकारात्मक बना हुआ है।
जूलरी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या?
विश्लेषकों के मुताबिक सेक्टर के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं:
1. Demand Slowdown
अगर ग्राहक खरीदारी टालते हैं तो बिक्री पर असर पड़ेगा।
2. Inventory Cost
महंगे सोने के कारण कंपनियों की inventory cost बढ़ेगी।
3. Margin Pressure
अगर कंपनियां पूरी कीमत ग्राहकों पर डालती हैं तो demand घट सकती है, और अगर खुद absorb करती हैं तो margin घट सकता है।
क्या बढ़ सकती है गोल्ड स्मगलिंग?
उद्योग जगत को डर है कि ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी के कारण गोल्ड स्मगलिंग फिर बढ़ सकती है। जब भारत और दुबई जैसे बाजारों के बीच कीमतों का अंतर बढ़ता है, तब तस्करों को टैक्स बचाकर भारी मुनाफा कमाने का मौका मिलता है। अनुमान है कि 1 किलो सोने की तस्करी पर करीब ₹23 लाख तक का फायदा हो सकता है। अगर अवैध सोना बाजार में बढ़ता है, तो organized jewellery कंपनियों के लिए competition और मुश्किल हो सकता है।
आम ग्राहकों पर क्या असर होगा?
1. ज्वेलरी महंगी होगी
नई ड्यूटी के बाद ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
2. हल्के गहनों का ट्रेंड बढ़ सकता है
लोग कम वजन वाले डिजाइन चुन सकते हैं।
3. पुराने गहनों का एक्सचेंज बढ़ सकता है
नई खरीदारी के बजाय पुराने गहनों को बदलने का चलन बढ़ सकता है।
4. शोरूम फुटफॉल घट सकता है
जूलर्स को डर है कि ग्राहक कुछ समय तक खरीदारी टाल सकते हैं।
बाजार आगे क्या देख रहा है?
अब निवेशकों की नजर तीन चीजों पर रहेगी सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, सरकार की अगली नीति, त्योहार और शादी सीजन की मांग अगर अगले कुछ महीनों में गोल्ड डिमांड उम्मीद से ज्यादा कमजोर दिखती है, तो जूलरी स्टॉक्स में और दबाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर खरीदारी मजबूत बनी रहती है, तो यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है।
Why It Matters
जूलरी सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार और रिटेल खपत से गहराई से जुड़ा हुआ है। लाखों लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर ऊंची ड्यूटी और महंगे सोने के कारण मांग कमजोर पड़ती है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे जेम्स एंड ज्वेलरी इकोसिस्टम पर दिखाई दे सकता है।
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