भारत में सोना और चांदी खरीदना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद घरेलू सर्राफा बाजार में भारी उछाल देखने को मिला है। बुधवार को सोने की कीमत में एक ही दिन में ₹8,550 की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चांदी ₹20,500 उछल गई। इस तेजी ने ज्वेलरी कारोबारियों से लेकर निवेशकों और आम ग्राहकों तक सभी को चौंका दिया है।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना अब ₹1,65,350 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। वहीं चांदी का भाव ₹2,97,500 प्रति किलोग्राम हो गया। यह भारतीय बाजार में अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।
यह तेजी केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की वजह से नहीं आई है। इसके पीछे सरकार की नई आयात शुल्क नीति, कमजोर रुपया, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
सरकार ने क्यों बढ़ाया आयात शुल्क?
केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। प्लैटिनम पर भी शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। नए शुल्क बुधवार से लागू हो चुके हैं।
सरकार का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी मुद्रा पर दबाव के बीच गैर-जरूरी आयात को सीमित करना जरूरी है। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और हर साल भारी मात्रा में सोने का आयात करता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में लोगों से अपील की थी कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए ईंधन की बचत करें, विदेश यात्रा टालें और कुछ समय तक सोने की खरीदारी कम करें। इसके तुरंत बाद आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला सामने आया।
आखिर सोने-चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी छलांग क्यों आई?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस तेजी के पीछे केवल टैक्स नहीं बल्कि कई फैक्टर एक साथ जिम्मेदार हैं।
1. आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब सरकार आयात शुल्क बढ़ाती है तो सीधे खरीद लागत बढ़ जाती है। इसका असर तुरंत घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।
2. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
डॉलर के मुकाबले रुपया 95.80 तक फिसल गया। चूंकि सोने का अंतरराष्ट्रीय कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए कमजोर रुपया भारत में कीमतों को और महंगा बना देता है।
3. पश्चिम एशिया संकट
ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भागते हैं और सोना हमेशा से “सेफ हेवन” माना जाता है।
4. निवेश मांग में तेजी
बीते कुछ महीनों में गोल्ड ETF, डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड की मांग तेजी से बढ़ी है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक सोने में पैसा डाल रहे हैं।
ज्वेलरी बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
दिल्ली, मुंबई, जयपुर, सूरत और कोलकाता जैसे बड़े सर्राफा बाजारों में कारोबारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं क्योंकि नया आयात शुल्क अब धीरे-धीरे नई खरीद लागत में दिखाई देगा।
ज्वेलर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती शादी सीजन की मांग को संभालना होगी। कई ग्राहक अभी खरीदारी टाल सकते हैं, लेकिन जिनकी शादियां तय हैं उन्हें मजबूरी में ऊंचे दाम पर खरीद करनी पड़ सकती है।
कुछ कारोबारियों का मानना है कि अत्यधिक शुल्क बढ़ने से तस्करी का जोखिम भी बढ़ सकता है। भारत में पहले भी जब गोल्ड ड्यूटी ऊंची हुई थी तब अवैध आयात के मामलों में तेजी देखी गई थी।
क्या आम ग्राहकों की मांग घटेगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती झटका जरूर लगेगा, लेकिन भारत में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरत भी है। शादी-ब्याह, त्योहार और पारंपरिक निवेश के कारण मांग पूरी तरह खत्म नहीं होती।
हालांकि छोटे शहरों और मध्यम वर्गीय परिवारों में खरीदारी का पैटर्न बदल सकता है। लोग भारी ज्वेलरी की जगह हल्के डिजाइन, 18 कैरेट गोल्ड या गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की ओर जा सकते हैं।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख (जिंस) हरीश वी. के मुताबिक आयात शुल्क बढ़ने से स्थानीय कीमतों में तेजी आना तय था। उन्होंने कहा कि अल्पकाल में भौतिक मांग प्रभावित हो सकती है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोना अभी भी मजबूत सुरक्षित निवेश बना रहेगा।
वहीं रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने चेतावनी दी है कि आयात शुल्क बढ़ाने से आयात पूरी तरह नहीं रुकता, बल्कि कीमतें और महंगी हो जाती हैं। परिषद का मानना है कि अगर सरकार चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना चाहती है तो मात्रात्मक नियंत्रण ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
वैश्विक बाजार में क्या हो रहा है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना हल्की गिरावट के साथ 4700 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी में तेजी बनी हुई है। हालांकि भारतीय बाजार में रुपया कमजोर होने और आयात शुल्क बढ़ने के कारण घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय गिरावट का असर नहीं दिखा।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर के ऊपर जाती हैं, तो सोने में नई तेजी आ सकती है।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घबराहट में भारी खरीदारी करने से बचना चाहिए। अगर निवेश के नजरिए से खरीदारी करनी है तो SIP मॉडल, गोल्ड ETF या चरणबद्ध निवेश बेहतर रणनीति हो सकती है।
जिन लोगों की निकट भविष्य में शादी या जरूरी खरीदारी है, उनके लिए कीमतें और बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है। ऐसे में बाजार पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
आने वाले दिनों में क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ हफ्तों में भारतीय सर्राफा बाजार बेहद संवेदनशील रहने वाला है। इन फैक्टर्स पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी:
- पश्चिम एशिया की स्थिति
- डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख
- भारत में फेस्टिव और वेडिंग डिमांड
अगर वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ और रुपया दबाव में रहा, तो सोना और चांदी दोनों नए रिकॉर्ड स्तर छू सकते हैं।
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