भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि निवेश, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का बड़ा हिस्सा माना जाता है। लेकिन अब सरकार द्वारा सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद एक बार फिर गोल्ड स्मगलिंग यानी सोने की तस्करी का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। उद्योग जगत और जांच एजेंसियों को आशंका है कि आने वाले महीनों में अवैध सोना कारोबार फिर से जोर पकड़ सकता है।
सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) बढ़ाकर प्रभावी आयात शुल्क 6% से 15% कर दिया है। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अब घरेलू बाजार में सोना काफी महंगा हो जाएगा, जिससे तस्करों को भारी मुनाफे का मौका मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ टैक्स बचाकर एक किलो सोने की तस्करी पर करीब 23 लाख रुपये तक का अवैध फायदा कमाया जा सकता है। यही वजह है कि दुबई, सिंगापुर और खाड़ी देशों से होने वाली तस्करी फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों बढ़ाई गई सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता देश है। देश अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। ऐसे में जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और डॉलर मजबूत होता है, तब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने लगता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने सोने के आयात पर लगभग 71.98 अरब डॉलर खर्च किए। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है। सरकार की चिंता यह है कि लगातार बढ़ता गोल्ड इम्पोर्ट चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों पर दबाव डाल सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव, ईरान संकट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। यही कारण है कि सरकार अब सोने के आयात को महंगा बनाकर इसकी मांग कम करना चाहती है ताकि डॉलर की बचत हो सके।
2024 में ड्यूटी घटाने से क्या हुआ था?
सरकार ने 2024 में सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी थी। उस समय सरकार का मकसद गोल्ड स्मगलिंग को कम करना था। ड्यूटी घटने के बाद भारत और दुबई जैसे देशों के बीच कीमतों का अंतर कम हो गया था, जिससे तस्करी में गिरावट देखने को मिली।
ज्वेलरी उद्योग का कहना था कि कम ड्यूटी के कारण वैध आयात बढ़ा और अवैध कारोबार पर कुछ हद तक लगाम लगी। लेकिन अब जब ड्यूटी फिर बढ़ा दी गई है, तो वही पुरानी समस्या वापस लौट सकती है।
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने भी चिंता जताते हुए कहा कि बढ़ी हुई ड्यूटी से तस्करी का जोखिम फिर बढ़ सकता है और उद्योग के लिए कारोबार मुश्किल हो जाएगा।
10 ग्राम सोने पर कितना बढ़ गया टैक्स?
अभी घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1,64,035 मानी जा रही है। नई ड्यूटी व्यवस्था लागू होने के बाद टैक्स का असर काफी बड़ा हो गया है।
| व्यवस्था | प्रति 10 ग्राम ड्यूटी | कुल अनुमानित कीमत |
|---|---|---|
| पुरानी व्यवस्था (6%) | करीब ₹9,285 | ₹1,64,035 |
| नई व्यवस्था (15%) | करीब ₹23,212 | ₹1,77,962 |
यानी सिर्फ टैक्स बढ़ने से प्रति 10 ग्राम सोने पर लगभग ₹14,000 का अतिरिक्त बोझ आ गया है। अगर इसे 1 किलो पर देखें तो यह अंतर लगभग ₹14 लाख से ज्यादा बैठता है।
फिर ₹23 लाख का फायदा कैसे?
असल खेल यहीं से शुरू होता है।
अगर कोई कारोबारी वैध तरीके से 1 किलो सोना भारत लाता है तो उसे करीब 15% इम्पोर्ट ड्यूटी और संबंधित टैक्स देना होगा। मौजूदा कीमतों के हिसाब से यह रकम लगभग ₹23 लाख से ज्यादा बैठती है।
लेकिन अगर वही सोना अवैध तरीके से भारत लाया जाए और टैक्स न दिया जाए, तो पूरा पैसा सीधे मुनाफे में बदल सकता है। यही वजह है कि तस्करों के लिए गोल्ड स्मगलिंग बेहद आकर्षक कारोबार बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत और दुबई जैसे बाजारों के बीच कीमत का अंतर बढ़ेगा, तस्करी का नेटवर्क उतना ही सक्रिय होगा।
किन देशों से सबसे ज्यादा होती है तस्करी?
भारत में आने वाला अवैध सोना मुख्य रूप से इन देशों से आता है:
- दुबई (UAE)
- सिंगापुर
- थाईलैंड
- बैंकॉक
- सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश
- कुछ अफ्रीकी देश
इन देशों में टैक्स कम होने और सोना सस्ता मिलने के कारण तस्कर वहां से गोल्ड खरीदते हैं और भारत में ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
कई मामलों में तस्कर सीधे भारत नहीं आते बल्कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के रास्ते एंट्री करते हैं ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
भारत में कौन से एयरपोर्ट हैं सबसे संवेदनशील?
जांच एजेंसियों के मुताबिक मुंबई एयरपोर्ट, दिल्ली एयरपोर्ट, केरल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सोने की तस्करी के बड़े केंद्र माने जाते हैं।
खासकर खाड़ी देशों से आने वाली फ्लाइट्स पर कस्टम विभाग की निगरानी काफी बढ़ाई जाती है। महाराष्ट्र अकेले कई राज्यों के मुकाबले ज्यादा गोल्ड सीजर दर्ज करता है।
तस्कर कैसे छिपाते हैं सोना?
सोने की तस्करी अब सिर्फ बैग में बिस्किट छिपाने तक सीमित नहीं रही। तस्कर बेहद हाई-टेक और जोखिम भरे तरीके अपनाने लगे हैं।
1. गोल्ड पेस्ट तकनीक
सोने को केमिकल प्रक्रिया से पेस्ट में बदला जाता है। बाद में उसे कैप्सूल में भरकर निगल लिया जाता है या शरीर के अंदर छिपाया जाता है।
2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में छिपाना
मिक्सर, आयरन, म्यूजिक सिस्टम, मोबाइल बैटरी, वैक्यूम क्लीनर जैसे उपकरणों में सोना फिट कर दिया जाता है।
3. जूतों और बेल्ट में छिपाना
जूते के सोल, बेल्ट, बैग की लाइनिंग और ट्रॉली के पहियों में सोना छिपाया जाता है।
4. हेयर विग और कपड़ों के बटन
कुछ मामलों में तस्कर विग, जैकेट, बटन और खाने के सामान तक का इस्तेमाल करते पाए गए हैं।
कितने मामले सामने आए?
वित्त वर्ष 2024-25 में सरकारी एजेंसियों ने गोल्ड स्मगलिंग के 3005 मामले दर्ज किए। इस दौरान लगभग 2.6 मीट्रिक टन सोना जब्त किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि पकड़ा गया सोना वास्तविक तस्करी का केवल छोटा हिस्सा होता है। असली अवैध कारोबार इससे कहीं बड़ा हो सकता है।
क्या कहता है कानून?
भारत में गोल्ड स्मगलिंग को गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत:
- सोना जब्त किया जा सकता है
- भारी जुर्माना लगाया जा सकता है
- आरोपी को जेल भेजा जा सकता है
हालांकि विदेश से लौटने वाले भारतीय यात्रियों को निर्धारित सीमा तक रियायती शुल्क पर सोना लाने की अनुमति है।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
कस्टम ड्यूटी बढ़ने का असर सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर आम ग्राहकों और ज्वेलरी बाजार पर भी पड़ेगा।
1. ज्वेलरी महंगी होगी
नई खरीदारी के लिए ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
2. शादी सीजन प्रभावित हो सकता है
ऊंचे दामों के कारण लोग खरीदारी टाल सकते हैं।
3. हल्के गहनों की मांग बढ़ेगी
भारी ज्वेलरी की जगह लोग कम वजन वाले डिजाइन पसंद कर सकते हैं।
4. पुराने गहने एक्सचेंज का ट्रेंड बढ़ेगा
नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय लोग पुराने गहने बदलकर नया बनवाना पसंद कर सकते हैं।
5. नकद लेनदेन बढ़ने का खतरा
उद्योग को डर है कि ऊंचे टैक्स के कारण कुछ कारोबार अनौपचारिक चैनलों की तरफ जा सकता है।
पीएम मोदी ने क्यों की थी सोना न खरीदने की अपील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से अपील की थी कि वे कुछ समय तक सोने की खरीद कम करें।
भारत का गोल्ड इम्पोर्ट लगातार बढ़ रहा है:
| वित्त वर्ष | गोल्ड इम्पोर्ट |
|---|---|
| 2022-23 | करीब 35 अरब डॉलर |
| 2023-24 | 45.54 अरब डॉलर |
| 2024-25 | 58 अरब डॉलर |
| 2025-26 | 71.98 अरब डॉलर |
यह तेजी सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुकी है क्योंकि इसका असर डॉलर रिजर्व और चालू खाता घाटे पर पड़ता है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और भारत में ड्यूटी लंबे समय तक 15% रहती है, तो आने वाले महीनों में गोल्ड स्मगलिंग के मामले बढ़ सकते हैं।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती होगी विदेशी मुद्रा बचाना, अवैध तस्करी पर नियंत्रण रखना अगर तस्करी बढ़ती है, तो सरकार को एयरपोर्ट निगरानी, कस्टम इंटेलिजेंस और सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना पड़ सकता है।
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