अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) 3.48% दर्ज की गई है। सरकार द्वारा जारी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक आम लोगों को महंगाई के मोर्चे पर मिली-जुली राहत मिली है। जहां आलू और प्याज जैसी जरूरी सब्जियों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, वहीं टमाटर, सोने-चांदी के गहने और फूलगोभी जैसी चीजों ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया।
खास बात यह रही कि चांदी की ज्वेलरी की महंगाई दर 144% के ऊपर पहुंच गई, जबकि टमाटर की कीमतों में भी तेज उछाल बना रहा।
देश में कितनी रही खुदरा महंगाई?
अप्रैल 2026 में ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (आधार वर्ष 2024) पर आधारित सालाना खुदरा महंगाई दर 3.48% दर्ज की गई। अगर ग्रामीण और शहरी इलाकों के हिसाब से देखें, तो ग्रामीण महंगाई दर 3.74% रही, जबकि शहरी महंगाई दर 3.16% दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्तर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टॉलरेंस बैंड के भीतर माना जा रहा है। हालांकि खाद्य वस्तुओं और कीमती धातुओं में बढ़ती कीमतें चिंता बढ़ा रही हैं।
खाने-पीने की चीजों की महंगाई कितनी रही?
कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के अनुसार अप्रैल 2026 में खाद्य महंगाई दर 4.20% दर्ज की गई। इसमें ग्रामीण खाद्य महंगाई 4.26% रही, जबकि शहरी खाद्य महंगाई 4.10% दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि सब्जियों और कुछ कृषि उत्पादों में उतार-चढ़ाव की वजह से फूड इंफ्लेशन अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं माना जा सकता।
हाउसिंग महंगाई की क्या स्थिति रही?
अप्रैल 2026 में हाउसिंग सेक्टर की महंगाई दर 2.15% दर्ज की गई। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 2.65% और शहरी क्षेत्रों में 1.96% की वृद्धि दर्ज हुई। रिपोर्ट के मुताबिक आवास क्षेत्र में महंगाई फिलहाल अपेक्षाकृत नियंत्रित बनी हुई है।
अप्रैल 2026 में कौन सी चीजें सबसे ज्यादा सस्ती हुईं?
महंगाई आंकड़ों के अनुसार कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में राहत देखने को मिली। सबसे ज्यादा गिरावट आलू और प्याज में दर्ज की गई।
अप्रैल में सबसे ज्यादा सस्ती हुई चीजें
| वस्तु | मार्च 2026 | अप्रैल 2026 |
|---|---|---|
| आलू | -19.03% | -23.69% |
| प्याज | -27.78% | -17.67% |
| मोटर कार और जीप | -6.91% | -7.12% |
| मटर और चना | -7.88% | -6.75% |
| एयर कंडीशनर (AC) | -5.81% | -5.06% |
विशेषज्ञों का कहना है कि आलू और प्याज की सप्लाई बेहतर होने से कीमतों में राहत देखने को मिली।
किन चीजों ने सबसे ज्यादा बढ़ाया खर्च?
जहां कुछ वस्तुएं सस्ती हुईं, वहीं कई चीजों की कीमतों में भारी उछाल भी दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा महंगाई चांदी की ज्वेलरी में देखने को मिली।
अप्रैल में सबसे ज्यादा महंगी हुई चीजें
| वस्तु | मार्च 2026 | अप्रैल 2026 |
|---|---|---|
| चांदी की ज्वेलरी | 148.42% | 144.34% |
| नारियल (कोपरा) | 45.54% | 44.55% |
| सोना/हीरा/प्लेटिनम ज्वेलरी | 45.88% | 40.72% |
| टमाटर | 36.00% | 35.28% |
| फूलगोभी | 34.16% | 25.58% |
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की तेजी, पश्चिम एशिया तनाव और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती रुचि की वजह से सोना और चांदी लगातार महंगे बने हुए हैं।
टमाटर फिर क्यों हुआ महंगा?
टमाटर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की वजह सप्लाई चेन में दिक्कत, गर्मी का असर और कुछ राज्यों में उत्पादन घटने को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सब्जियों की सप्लाई प्रभावित होने से आने वाले हफ्तों में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
सोने-चांदी के गहनों में इतनी तेजी क्यों?
वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं। इसी वजह से सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुएं लगातार महंगी हो रही हैं। भारत जैसे बड़े ज्वेलरी बाजार में इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।
क्या महंगाई अभी नियंत्रण में है?
विशेषज्ञों का मानना है कि कुल खुदरा महंगाई 4% के आसपास रहना राहत की बात है। लेकिन खाद्य महंगाई, ऊर्जा कीमतें, सोना-चांदी और वैश्विक तनाव अभी भी जोखिम बने हुए हैं। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है और पश्चिम एशिया संकट बढ़ता है, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर फिर दबाव बढ़ सकता है।
RBI के लिए क्या संकेत?
खुदरा महंगाई अभी RBI के लक्ष्य दायरे के भीतर है। इससे रिजर्व बैंक को फिलहाल ब्याज दरों पर ज्यादा आक्रामक कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ सकती। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य कीमतों, वैश्विक ऊर्जा संकट और रुपये की कमजोरी पर RBI की नजर बनी रहेगी।
आम लोगों पर क्या असर?
आम लोगों को फिलहाल मिली-जुली स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ आलू, प्याज और कुछ दालें सस्ती हुई हैं। दूसरी तरफ टमाटर, गहने और कुछ सब्जियां महंगी होने से घरेलू बजट पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून, तेल कीमतें और वैश्विक हालात महंगाई की दिशा तय करेंगे।
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