सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) का एक अहम फैसला सामने आया है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में ट्रिब्यूनल ने एक ऐसे व्यक्ति के पक्ष में बड़ा आदेश दिया है जिसकी सड़क हादसे में टांग काटनी पड़ी थी। ट्रिब्यूनल ने वाहन मालिक को करीब ₹47.78 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रिब्यूनल ने सिर्फ मेडिकल दिव्यांगता नहीं बल्कि पीड़ित की “कार्यात्मक दिव्यांगता” यानी काम करने की क्षमता पर पड़े असर को आधार बनाया। अदालत ने माना कि भले ही मेडिकल प्रमाणपत्र में 50 फीसदी स्थायी दिव्यांगता बताई गई हो, लेकिन पेशे से ड्राइवर रहे व्यक्ति के लिए यह प्रभाव लगभग पूरी तरह आजीविका खत्म होने जैसा है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 1 अक्टूबर 2020 की है। मीरा रोड निवासी 42 वर्षीय परेश बाबूराव नाइक उस दिन अपनी मोटरसाइकिल से मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर जा रहे थे। इसी दौरान गलत दिशा से आ रहे एक ऑटो ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद नाइक सड़क पर गिर गए। तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार टेम्पो का पहिया उनकी दाहिनी टांग पर चढ़ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए कई सर्जरी कीं, लेकिन चोट ज्यादा गंभीर होने की वजह से उनकी दाहिनी टांग घुटने के नीचे से काटनी पड़ी। इस हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
ड्राइवर की नौकरी भी छिन गई
परेश नाइक पेशे से ड्राइवर थे। टांग कटने के बाद उनके लिए पहले की तरह वाहन चलाना संभव नहीं रहा। चलने-फिरने में भी उन्हें गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र में उन्हें 50 फीसदी स्थायी दिव्यांग बताया गया था, लेकिन ट्रिब्यूनल ने माना कि व्यावहारिक रूप से यह दिव्यांगता कहीं ज्यादा गंभीर है।
क्योंकि:
- उनका पेशा ड्राइविंग था
- दुर्घटना के बाद उनकी कमाई लगभग खत्म हो गई
- सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया
- भविष्य की आय पर स्थायी असर पड़ा
इसी आधार पर अदालत ने इसे “100 फीसदी कार्यात्मक दिव्यांगता” माना।
मामला पहुंचा MACT
उचित मुआवजा नहीं मिलने के बाद परेश नाइक ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ठाणे का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल सदस्य आर वी मोहिते ने टेम्पो मालिक सोमनाथ सुरेश गोले को दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार माना। महत्वपूर्ण बात यह रही कि टेम्पो मालिक को समन भेजे जाने के बावजूद वह ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करते हुए फैसला सुनाया।
कैसे तय हुआ ₹47.78 लाख का मुआवजा?
ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तय करते समय सिर्फ मेडिकल खर्च नहीं बल्कि पीड़ित के पूरे भविष्य को ध्यान में रखा।
मुआवजे में शामिल रकम:
| मद | राशि |
|---|---|
| भविष्य की आय का नुकसान | ₹28.80 लाख |
| भविष्य की संभावनाओं का नुकसान | ₹11.52 लाख |
| चिकित्सा खर्च | करीब ₹4.76 लाख |
| अन्य मद | बाकी राशि |
कुल मिलाकर ट्रिब्यूनल ने ₹47.78 लाख का मुआवजा तय किया। इसके साथ ही अदालत ने याचिका दायर होने की तारीख से 9 फीसदी सालाना ब्याज देने का भी आदेश दिया।
ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति की दिव्यांगता का असर सिर्फ मेडिकल प्रतिशत से नहीं मापा जा सकता। अगर दुर्घटना के बाद व्यक्ति अपनी जीविका कमाने में असमर्थ हो जाता है, तो अदालत को उसके पेशे और जीवन पर पड़े वास्तविक प्रभाव को देखना चाहिए।
ट्रिब्यूनल ने माना कि:
“दिव्यांग प्रमाणपत्र में 50 फीसदी स्थायी दिव्यांगता दिखाई गई थी, लेकिन ड्राइवर के रूप में काम करने वाले व्यक्ति के लिए इसका असर लगभग पूर्ण कार्यात्मक दिव्यांगता जैसा है।”
यह टिप्पणी भविष्य के मोटर दुर्घटना मामलों में भी महत्वपूर्ण मिसाल मानी जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है जो हादसे के बाद स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं। लेकिन कई मामलों में पीड़ितों को उचित मुआवजा नहीं मिलता, बीमा कंपनियां कम भुगतान करती हैं, मेडिकल दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर दावे घटा दिए जाते हैं ऐसे में ठाणे MACT का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें अदालत ने “मानवीय और व्यावहारिक प्रभाव” को प्राथमिकता दी।
मोटर वाहन मालिकों के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला वाहन मालिकों के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। अगर किसी वाहन की वजह से:
- गंभीर दुर्घटना होती है
- व्यक्ति स्थायी रूप से घायल होता है
- पीड़ित को उचित राहत नहीं मिलती
तो वाहन मालिक को कानूनी रूप से भारी मुआवजा देना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन और वाहन बीमा अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
सड़क हादसों को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?
भारत दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक हर साल लाखों लोग सड़क हादसों में घायल होते हैं और बड़ी संख्या स्थायी दिव्यांगता का शिकार बनती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- गलत दिशा में वाहन चलाना
- ओवरस्पीडिंग
- लापरवाही से ड्राइविंग
- हाईवे सुरक्षा की कमी
ऐसी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह हैं।
क्यों चर्चा में है यह मामला?
यह मामला सिर्फ एक मुआवजा आदेश नहीं बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था के उस नजरिए को दिखाता है जिसमें अदालतें अब पीड़ित के वास्तविक जीवन पर पड़े असर को ज्यादा गंभीरता से देखने लगी हैं। ट्रिब्यूनल का यह फैसला उन हजारों सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए भी अहम माना जा रहा है जो लंबे समय से उचित मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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