देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को आखिरकार रद्द कर दिया गया। पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने बड़ा फैसला लेते हुए परीक्षा को कैंसिल करने की घोषणा कर दी। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
लेकिन यह मामला सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है। इस फैसले का असर सीधे लाखों छात्रों की जेब, सरकार के खजाने और पूरे शिक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता पर पड़ा है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस पूरे विवाद से करीब ₹500 करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ा है, जबकि छात्रों को अकेले ₹100 करोड़ से ज्यादा का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यह सिर्फ एक एग्जाम कैंसिल नहीं हुआ, बल्कि लाखों परिवारों की मेहनत, मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव फिर से बढ़ गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर के हजारों केंद्रों पर आयोजित की गई थी। परीक्षा खत्म होने के कुछ घंटों बाद ही सोशल मीडिया पर कथित प्रश्नपत्र वायरल होने लगे। कई राज्यों से पेपर लीक और संगठित नकल की शिकायतें सामने आईं।
इसके बाद विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अभिभावकों ने परीक्षा रद्द करने की मांग शुरू कर दी। बढ़ते दबाव और शुरुआती जांच में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद NTA ने आखिरकार परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
यह फैसला लाखों छात्रों के लिए झटका बनकर आया क्योंकि अधिकांश उम्मीदवार पिछले दो-तीन साल से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
₹368 करोड़ की रजिस्ट्रेशन फीस पर सवाल
NEET परीक्षा के लिए इस साल जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस ₹1700 निर्धारित की गई थी। वहीं OBC-NCL और EWS वर्ग के छात्रों के लिए यह फीस ₹1600 रखी गई थी। SC/ST उम्मीदवारों को ₹1000 फीस देनी थी जबकि विदेशी छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस ₹9500 तय की गई थी।
अगर 23 लाख छात्रों के आधार पर औसत फीस ₹1600 मानी जाए, तो कुल रजिस्ट्रेशन फीस करीब ₹368 करोड़ बैठती है।
अब क्योंकि परीक्षा दोबारा आयोजित होगी और छात्रों से दोबारा फीस नहीं ली जाएगी, ऐसे में परीक्षा के आयोजन पर आने वाला अतिरिक्त खर्च सरकार और NTA को उठाना पड़ेगा।
परीक्षा आयोजन में सेंटर बुकिंग, सुरक्षा व्यवस्था, पेपर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, डिजिटल मॉनिटरिंग, स्टाफ और इनविजिलेटर पेमेंट के साथ-साथ सर्वर और डेटा मैनेजमेंट जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को अब दोबारा तैयार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय दबाव आएगा।
छात्रों की जेब पर ₹100 करोड़ से ज्यादा का बोझ
सरकार दोबारा फीस न ले, फिर भी सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को ही उठाना पड़ेगा।
NEET जैसी परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्र अपने शहर से दूसरे जिलों या राज्यों में परीक्षा देने जाते हैं। इस दौरान उन्हें ट्रेन, बस या फ्लाइट टिकट पर खर्च करना पड़ता है। कई छात्रों और अभिभावकों को होटल या लॉज में रुकना पड़ता है। इसके अलावा खाने-पीने और लोकल ट्रांसपोर्ट पर भी अच्छी-खासी रकम खर्च होती है।
अगर प्रति छात्र औसतन ₹500 का खर्च भी माना जाए, तो 23 लाख छात्रों का कुल खर्च करीब ₹115 करोड़ बैठता है।
अब दोबारा परीक्षा होने पर छात्रों को यही खर्च फिर से करना पड़ेगा। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके लिए यह रकम बहुत बड़ी होती है। ग्रामीण इलाकों और निम्न आय वर्ग के छात्रों पर इसका असर और ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
मानसिक दबाव भी बना बड़ी चिंता
NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि करोड़ों छात्रों के करियर का सवाल होता है। कई छात्र 12-14 घंटे पढ़ाई कर सालों तैयारी करते हैं।
परीक्षा रद्द होने के बाद अब छात्रों पर तैयारी का दबाव फिर बढ़ेगा। लंबे समय तक पढ़ाई करने के कारण मानसिक थकान पहले से ही बनी हुई थी और अब अनिश्चितता ने तनाव को और बढ़ा दिया है। रिजल्ट और एडमिशन प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है, जिससे ड्रॉप लेने वाले छात्रों की चिंता भी बढ़ गई है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता छात्रों में एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी बढ़ा सकती है।
कोटा के छात्रों में भारी नाराजगी
राजस्थान का कोटा देश का सबसे बड़ा मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग हब माना जाता है। यहां लाखों छात्र NEET की तैयारी करते हैं।
कोटा में तैयारी कर रहे छात्र कुलदीप गौतम ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के नाम पर छात्रों के साथ बेहद सख्ती की जाती है, लेकिन पेपर की गोपनीयता बचाने में एजेंसियां पूरी तरह विफल साबित हुई हैं।
उन्होंने कहा कि:
“छात्रों से मंगलसूत्र तक उतरवा लिए जाते हैं, लेकिन पेपर फिर भी लीक हो जाता है।”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार को घेरा
NEET पेपर लीक विवाद अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। कई विपक्षी दलों ने सरकार और NTA पर गंभीर सवाल उठाए हैं। NSUI समेत कई छात्र संगठनों ने मांग की है कि NTA को भंग किया जाए, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। विपक्ष का आरोप है कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं देश की परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा खत्म कर रही हैं।
क्या NTA की विश्वसनीयता खतरे में है?
पिछले कुछ वर्षों में कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। ऐसे में अब NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सुरक्षा मजबूत करनी होगी। प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक बनाना होगा। परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही तय करनी होगी और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है। अगर बार-बार ऐसी घटनाएं होती रहीं तो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
दोबारा परीक्षा कब होगी?
फिलहाल NTA ने नई परीक्षा तारीख की घोषणा नहीं की है। माना जा रहा है कि दोबारा परीक्षा अगले कुछ हफ्तों में आयोजित की जा सकती है। हालांकि इससे मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में देरी हो सकती है। काउंसलिंग, कॉलेज सत्र और शैक्षणिक कैलेंडर पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
NEET भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। इसमें हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाएं सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, छात्रों के भविष्य, आर्थिक बोझ और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन जाती हैं। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक परीक्षा विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है।
Also Read:


