दिल्ली से लखनऊ और वाराणसी की यात्रा आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकती है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी Delhi-Varanasi Bullet Train Corridor को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। इस हाई-स्पीड रेल परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से लखनऊ की यात्रा सिर्फ लगभग 2 घंटे में पूरी हो सकेगी। वहीं दिल्ली से वाराणसी तक का सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होने का अनुमान है।
रेल मंत्री ने क्या कहा?
VIDEO | CII Summit: Railway Minister Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) says, "New bullet train corridors will mean flying will be out, 99 per cent it will be dominated by Railways, examples in Japan, China, Korea."
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/uRzltoGyCm
— Press Trust of India (@PTI_News) May 11, 2026 CII Annual Business Summit 2026 को संबोधित करते हुए रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलावों में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली से लखनऊ की यात्रा करीब 2 घंटे में और दिल्ली से वाराणसी की यात्रा 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकेगी। रेल मंत्री के मुताबिक यह प्रोजेक्ट उत्तर भारत की आर्थिक संरचना को भी बदल देगा।
अभी कितना समय लगता है?
फिलहाल दिल्ली से लखनऊ के बीच सबसे तेज ट्रेनें वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस हैं। इन ट्रेनों को यह दूरी तय करने में लगभग 6 घंटे 25 मिनट से 6 घंटे 50 मिनट तक का समय लगता है। बुलेट ट्रेन आने के बाद यह समय घटकर लगभग एक-तिहाई रह जाएगा।
किन शहरों को होगा फायदा?
यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लखनऊ होते हुए वाराणसी तक जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ सकती हैं। रेल मंत्री ने कहा कि वाराणसी-लखनऊ और वाराणसी-पटना क्षेत्र एक बड़े “इकोनॉमिक जोन” के रूप में विकसित हो सकते हैं।
एयरलाइंस को मिलेगी चुनौती?
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आने वाले समय में कई रूट्स पर लोग फ्लाइट की बजाय बुलेट ट्रेन को प्राथमिकता दे सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबई से पुणे यात्रा सिर्फ 28 मिनट, पुणे से हैदराबाद लगभग 1 घंटा 55 मिनट और हैदराबाद से बेंगलुरु करीब 2 घंटे में पूरी हो सकती है। उनके मुताबिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनने के बाद कई सेक्टरों में रेलवे का दबदबा बढ़ जाएगा।
बजट 2026-27 में हुई थी घोषणा
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बजट 2026-27 में की थी। सरकार ने देशभर में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है।
इन परियोजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी National High Speed Rail Corporation Limited (NHSRCL) को दी गई है।
DPR में हो रहे बदलाव
रेलवे बोर्ड ने NHSRCL को पहले से तैयार Detailed Project Reports यानी DPR में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि नई तकनीक, तेज निर्माण प्रक्रिया और आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए।
संसद की समिति ने क्या सलाह दी?
रेलवे की स्टैंडिंग कमेटी ने सरकार को सलाह दी है कि जमीन अधिग्रहण, कानूनी मंजूरियां और पर्यावरण क्लीयरेंस जैसे काम परियोजना मंजूरी से पहले पूरे कर लिए जाएं। कमेटी का मानना है कि इससे प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे, लागत नियंत्रण में रहेगी और वित्तीय रूप से परियोजनाएं ज्यादा लाभकारी बनेंगी।
भारत में कितना बदल सकता है रेल नेटवर्क?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना सफल रहती है तो उत्तर भारत में यात्रा का तरीका बदल सकता है, बिजनेस ट्रैवल तेज हो सकता है और बड़े शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा पर्यटन, रियल एस्टेट, होटल इंडस्ट्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बुलेट ट्रेन परियोजनाओं की सबसे बड़ी चुनौतियां जमीन अधिग्रहण, भारी लागत और लंबी निर्माण प्रक्रिया हैं। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर पहले से काम जारी है और उसी के अनुभव के आधार पर नए कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
Also Read:


