पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में दूसरी बार देशवासियों से अपील की है। उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने, विदेशी मुद्रा का गैर-जरूरी खर्च कम करने और ज्यादा टिकाऊ जीवनशैली अपनाने को कहा है। इसी क्रम में उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को भी एक उपयोगी विकल्प बताया।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद अब IT इंडस्ट्री में भी हलचल तेज हो गई है। आईटी कर्मचारियों की संस्था NITES ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर IT और ITES सेक्टर में फिर से “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
वहीं, Sridhar Vembu ने कहा है कि उनकी कंपनी पहले से ही इस दिशा में काम कर रही है और अब दोबारा घर से काम के विकल्प पर विचार किया जाएगा।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव इस दशक के सबसे बड़े संकटों में से एक बन चुके हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुई परिस्थितियां इस दशक के बड़े संकटों में से एक हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भी देश किसी बड़े संकट से गुजरा है, तब नागरिकों ने जिम्मेदारी निभाई है। अब फिर से उसी भावना के साथ आगे आने की जरूरत है।
उन्होंने लोगों से ईंधन की खपत कम करने, अनावश्यक यात्रा से बचने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और डिजिटल माध्यमों को अपनाने की अपील की।
IT इंडस्ट्री ने क्यों उठाई Work From Home की मांग?
प्रधानमंत्री की अपील के तुरंत बाद आईटी कर्मचारियों की संस्था NITES सक्रिय हो गई। संस्था ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की कि IT और ITES सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम को फिर से प्रोत्साहित किया जाए ताकि ईंधन की खपत कम हो, ट्रैफिक दबाव घटे और कर्मचारियों की यात्रा लागत कम हो सके।
NITES का कहना है कि अगर लाखों कर्मचारी रोजाना ऑफिस जाने के बजाय घर से काम करें तो पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, विदेशी मुद्रा पर दबाव कम पड़ेगा और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
श्रीधर वेम्बु ने क्या कहा?
I hope all of us heed the Prime Minister's appeal.
As a company, we adopted
Work From Office fully in recent months, but we will revisit Work From Home now.
We have adopted natural farming in our farm and we are also actively looking for ways to cut diesel use. pic.twitter.com/slcddnPXSU
— Sridhar Vembu (@svembu) May 11, 2026 Sridhar Vembu ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी कंपनी पहले भी इस दिशा में काम कर चुकी है। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हम सभी प्रधानमंत्री की अपील पर ध्यान देंगे।”
वेम्बु ने बताया कि उनकी कंपनी ने हाल के महीनों में पूरी तरह वर्क फ्रॉम ऑफिस मॉडल अपनाया था, लेकिन अब फिर से वर्क फ्रॉम होम विकल्प पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने खेत में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और डीजल के उपयोग को कम करने के उपाय तलाश रहे हैं।
Work From Home से क्या फायदे हो सकते हैं?
IT industry body NITES writes to the Ministry of Labour and Employment seeking a mandatory work from home advisory for the IT and ITES sector, backing PM Modi's call for fuel conservation and reduction of unnecessary travel, as accessed by #ETNow#NITES #WorkFromHome #ITSector… pic.twitter.com/GfVFYvUTyH
— ET NOW (@ETNOWlive) May 11, 2026 विशेषज्ञों के मुताबिक बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने से कई फायदे हो सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा ईंधन बचत का माना जा रहा है। रोजाना लाखों कर्मचारी निजी वाहनों से ऑफिस जाते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ती है, ट्रैफिक जाम बढ़ता है और प्रदूषण में इजाफा होता है।
अगर कुछ प्रतिशत कर्मचारी भी घर से काम करें तो तेल आयात पर दबाव कम हो सकता है, विदेशी मुद्रा बच सकती है और कंपनियों की परिचालन लागत भी घट सकती है।
क्या फिर लौट सकता है कोविड वाला Work From Home मॉडल?
कोविड महामारी के दौरान भारत की बड़ी IT कंपनियों ने लंबे समय तक वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाया था। हालांकि बाद में कंपनियों ने कर्मचारियों को ऑफिस बुलाना शुरू किया और “वर्क फ्रॉम ऑफिस” मॉडल को प्राथमिकता दी।
लेकिन अब बढ़ते ईंधन खर्च, पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई चेन दबाव की वजह से फिर से हाइब्रिड और रिमोट मॉडल पर चर्चा तेज हो गई है।
पीएम मोदी की अपील का बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी केवल अस्थायी उपायों की बात नहीं कर रहे, बल्कि देश को कम आयात निर्भरता, जिम्मेदार उपभोग और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाने का संदेश दे रहे हैं।
यही वजह है कि तेल बचत, सोना खरीद कम करने, विदेश यात्रा घटाने और वर्क फ्रॉम होम जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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