नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2026: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार को आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि देश में LPG, PNG, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि घरेलू LPG वितरण में तकनीकी सुधार के चलते पारदर्शिता और दक्षता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकार के मुताबिक, अब करीब 94 प्रतिशत घरेलू LPG सिलेंडर “डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड” के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह सिस्टम न केवल वितरण प्रक्रिया को सुरक्षित बनाता है, बल्कि फर्जी डिलीवरी और लीकेज जैसी समस्याओं को भी काफी हद तक खत्म करता है।
ऑथेंटिकेशन कोड सिस्टम: कैसे बदल रहा है LPG डिलीवरी मॉडल
पिछले कुछ वर्षों में LPG वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए कई डिजिटल सुधार किए गए हैं। डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस सिस्टम के तहत जब उपभोक्ता LPG सिलेंडर बुक करता है, तो उसे एक यूनिक कोड भेजा जाता है। डिलीवरी के समय यह कोड साझा करने पर ही सिलेंडर हैंडओवर होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि:
- सिलेंडर सही ग्राहक तक ही पहुंचे
- फर्जी डिलीवरी की गुंजाइश कम हो
- सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जा सके
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन में भी लागू किया जा सकता है।
रिकॉर्ड बुकिंग और डिलीवरी: सप्लाई चेन पर पूरा नियंत्रण
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है। केवल एक दिन में लगभग 45 लाख LPG बुकिंग दर्ज की गईं, जबकि इसके मुकाबले 51 लाख सिलेंडर की डिलीवरी की गई।
इससे यह संकेत मिलता है कि न केवल मांग पूरी की जा रही है, बल्कि बैकलॉग को भी तेजी से खत्म किया जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी वितरक (distributor) के पास “ड्राई-आउट” यानी स्टॉक खत्म होने की स्थिति नहीं आई।
यह स्थिति खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कमर्शियल LPG पर असर, लेकिन स्थिति नियंत्रण में
जहां घरेलू LPG की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है, वहीं कमर्शियल LPG सेगमेंट पर कुछ असर जरूर पड़ा है। सरकार के अनुसार, इसे अब लगभग 70 प्रतिशत स्तर तक बहाल कर दिया गया है।
अप्रैल महीने के आंकड़े बताते हैं कि:
- करीब 1.31 लाख टन कमर्शियल LPG की बिक्री हुई
- यह लगभग 69 लाख 19 किलो वाले सिलेंडरों के बराबर है
- एक दिन में 8,199 टन कमर्शियल LPG की खपत दर्ज की गई
इसके अलावा छोटे 5 किलो वाले सिलेंडरों की मांग भी बढ़ी है। 23 मार्च के बाद से अब तक 20 लाख से ज्यादा 5 किलो सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जो छोटे व्यापारियों और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है।
Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) की भूमिका: उद्योगों को राहत
ईंधन सप्लाई को बनाए रखने के लिए सरकार ने केवल घरेलू उपभोक्ताओं पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि उद्योगों को भी राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। DPIIT ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए नियमों में अस्थायी बदलाव और छूट प्रदान की है।
संयुक्त सचिव निधि केसारवानी के अनुसार, सरकार ने Petroleum and Explosives Safety Organisation (PESO) के तहत कई त्वरित फैसले लिए हैं, जिनका उद्देश्य ईंधन और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
इन उपायों में लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज करना, स्टोरेज नियमों में ढील देना और कस्टम ड्यूटी में छूट देना शामिल है।
CNG और बायोगैस इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी
सरकार ने गैस आधारित ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मार्च के अंत से अब तक:
- 467 आवेदन CNG और CBG स्टेशनों के लिए प्रोसेस किए गए
- आवेदन प्रक्रिया का समय घटाकर 10 दिन से कम किया गया
- 157 फाइनल लाइसेंस और 38 प्री-अप्रूवल जारी किए गए
यह संकेत देता है कि सरकार दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रही है।
स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स में राहत: अंतिम छोर तक सप्लाई सुनिश्चित
सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार ने स्टोरेज नियमों में भी अस्थायी छूट दी है।
- केरोसीन के लिए स्टोरेज सीमा बढ़ाकर 2,500 लीटर की गई
- PDS के तहत एक बार के लिए 5,000 लीटर तक की अनुमति दी गई
इसके अलावा, अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे उर्वरक और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को फायदा मिलेगा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत: उत्पादन नहीं रुकेगा
ऊर्जा संकट का असर उद्योगों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने कई सेक्टर-विशिष्ट कदम उठाए हैं।
- बॉयलर एक्ट के तहत प्रमाणपत्रों को 3 महीने का अस्थायी विस्तार
- इंडक्शन कुकटॉप के लिए Quality Control Order की समयसीमा बढ़ाई गई
- पेंट उद्योग के लिए LPG आवंटन बढ़ाकर 70% किया गया
टायर और केमिकल सेक्टर के लिए भी कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटाई गई है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी।
गुजरात के मोरबी जैसे इंडस्ट्रियल हब पर खास ध्यान
मोरबी, जो देश का प्रमुख सिरेमिक हब है, वहां गैस सप्लाई और कीमतों को लेकर विशेष कदम उठाए गए हैं। पहले यहां की करीब 80% यूनिट्स LPG या प्रोपेन पर निर्भर थीं।
सरकार ने PNG सप्लाई को पिछले 6 महीनों के औसत के 80% स्तर तक सुनिश्चित किया है, जिससे उत्पादन गतिविधियां बाधित न हों।
लंबी अवधि की रणनीति: दूरदराज इलाकों तक गैस पहुंचाने की तैयारी
सरकार अब उन क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है जहां पाइपलाइन नेटवर्क नहीं पहुंचा है। इसके लिए:
- District Pressure Regulating Skids (DPRS) के नए दिशा-निर्देश
- LNG के लिए क्रायोजेनिक सिलेंडर के उपयोग को बढ़ावा
इन उपायों से भविष्य में गैस सप्लाई का दायरा और व्यापक होगा।
निष्कर्ष: संकट के बीच मजबूत सप्लाई मैनेजमेंट का उदाहरण
पश्चिम एशिया संकट जैसे वैश्विक दबाव के बावजूद भारत ने जिस तरह से अपनी ईंधन सप्लाई को स्थिर रखा है, वह एक मजबूत प्रशासनिक और नीतिगत समन्वय का उदाहरण है।
डिजिटल ऑथेंटिकेशन, तेज लाइसेंसिंग, स्टोरेज में छूट और उद्योगों को राहत—इन सभी उपायों ने मिलकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो न केवल वर्तमान संकट से निपटने में सक्षम है, बल्कि भविष्य के लिए भी मजबूत आधार प्रदान करता है।
सरकार का यह दावा कि “कोई ड्राई-आउट नहीं हुआ” और 94% LPG डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड से हो रही है, यह दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, कुशल और लचीली हो चुकी है।
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