नई दिल्ली | 21 अप्रैल 2026 भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात (Seafood Exports) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। Marine Products Export Development Authority (MPEDA) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल समुद्री निर्यात ₹72,325.82 करोड़ (लगभग 8.28 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है, जो भारत की वैश्विक समुद्री व्यापार में मजबूत होती स्थिति को दर्शाता है।
कुल निर्यात मात्रा भी बढ़कर 19.32 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में स्थिर वृद्धि का संकेत देती है। इस रिकॉर्ड प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा योगदान फ्रोज़न श्रिम्प (Frozen Shrimp) का रहा है, जिसने अकेले ही पूरे सेक्टर की कमाई का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा संभाला।
फ्रोज़न श्रिम्प बना भारत के समुद्री निर्यात की रीढ़
भारत के समुद्री निर्यात में सबसे अहम भूमिका हमेशा से श्रिम्प की रही है, और FY26 में भी यही ट्रेंड जारी रहा। फ्रोज़न श्रिम्प का कुल निर्यात मूल्य ₹47,973.13 करोड़ (5.51 अरब डॉलर) तक पहुंच गया।
यह न सिर्फ सबसे बड़ा उत्पाद खंड रहा, बल्कि पूरे सेक्टर की ग्रोथ को भी दिशा देने वाला मुख्य कारक साबित हुआ। श्रिम्प निर्यात में 4.6% की मात्रा वृद्धि और 6.35% की मूल्य वृद्धि दर्ज की गई, जो स्थिर वैश्विक मांग का संकेत देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की श्रिम्प इंडस्ट्री ने पिछले कुछ वर्षों में गुणवत्ता, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड्स में काफी सुधार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी पकड़ मजबूत हुई है।
अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार, लेकिन मांग में गिरावट
भारत के समुद्री उत्पादों के लिए अमेरिका अभी भी सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट बना हुआ है। FY26 में अमेरिका ने लगभग 2.32 अरब डॉलर मूल्य का भारतीय समुद्री उत्पाद आयात किया।
हालांकि, इस बाजार में गिरावट भी दर्ज की गई है। अमेरिका को होने वाले निर्यात में:
- मात्रा में लगभग 19.8% की गिरावट
- मूल्य में 14.5% की गिरावट
यह गिरावट मुख्य रूप से टैरिफ नीतियों और ट्रेड रिलेशन में बदलाव के कारण मानी जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे देशों से भी भारत को चुनौती मिल रही है।
चीन और यूरोप बने नए ग्रोथ इंजन
जहां अमेरिका में गिरावट देखी गई, वहीं चीन और यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के लिए मजबूत ग्रोथ मार्केट के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
चीन को होने वाले निर्यात में:
- मूल्य में 22.7% की वृद्धि
- मात्रा में 20.1% की वृद्धि
वहीं यूरोपीय संघ को निर्यात में:
- मूल्य में 37.9% की वृद्धि
- मात्रा में 35.2% की वृद्धि
यह संकेत देता है कि भारत अब केवल एक बाजार पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपने एक्सपोर्ट बेस को विविध (diversify) कर रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशिया और जापान में भी मजबूत मांग
दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों ने भी भारतीय समुद्री उत्पादों की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है। इस क्षेत्र में 36% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
जापान के बाजार में भी 6.55% की बढ़ोतरी हुई है, जो स्थिर और भरोसेमंद मांग को दर्शाता है।
हालांकि पश्चिम एशिया (West Asia) में हल्की गिरावट देखने को मिली है, जिसका कारण क्षेत्रीय अस्थिरता और लॉजिस्टिक्स चुनौतियां मानी जा रही हैं।
फ्रोज़न फिश, स्क्विड और कट्टलफिश में भी बढ़ोतरी
केवल श्रिम्प ही नहीं, बल्कि अन्य समुद्री उत्पादों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया है। फ्रोज़न फिश, स्क्विड और कट्टलफिश जैसे उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इसके अलावा:
- ड्राई सीफूड प्रोडक्ट्स में सुधार
- लाइव मरीन प्रोडक्ट्स में ग्रोथ
- फिशमील और फिश ऑयल एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी
हालांकि, चिल्ड (chilled) प्रोडक्ट्स में गिरावट देखी गई, जो लॉजिस्टिक्स और शेल्फ लाइफ से जुड़ी चुनौतियों को दर्शाता है।
भारत के 5 बड़े पोर्ट बने एक्सपोर्ट की रीढ़
भारत के समुद्री निर्यात का बड़ा हिस्सा देश के प्रमुख बंदरगाहों के माध्यम से होता है। FY26 में पांच प्रमुख पोर्ट्स ने लगभग 64% एक्सपोर्ट वैल्यू संभाली।
इनमें शामिल हैं:
- विशाखापत्तनम (Visakhapatnam)
- जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT)
- कोच्चि (Kochi)
- कोलकाता (Kolkata)
- चेन्नई (Chennai)
ये पोर्ट न केवल एक्सपोर्ट की मात्रा बढ़ा रहे हैं, बल्कि सप्लाई चेन को भी मजबूत बना रहे हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिकॉर्ड?
भारत के समुद्री निर्यात का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह कई बड़े संकेत देता है:
पहला, यह भारत की कृषि और समुद्री अर्थव्यवस्था में बढ़ती ताकत को दर्शाता है। लाखों मछुआरों और प्रोसेसिंग यूनिट्स की आय इस सेक्टर से जुड़ी है।
दूसरा, यह ग्लोबल मार्केट में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करता है, खासकर एशिया और यूरोप में।
तीसरा, यह सरकार की “Make in India” और एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी की सफलता को भी दर्शाता है।
चुनौतियां भी बरकरार
हालांकि आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं:
- अमेरिका में टैरिफ और मांग में गिरावट
- लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
- क्लाइमेट चेंज का समुद्री उत्पादन पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन चुनौतियों को समय रहते हल किया गया तो भारत का समुद्री निर्यात आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ सकता है।
निष्कर्ष: भारत बना वैश्विक समुद्री बाजार का मजबूत खिलाड़ी
FY26 में भारत के समुद्री निर्यात ने यह साबित कर दिया है कि देश अब वैश्विक सीफूड मार्केट में एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है।
₹72,000 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड निर्यात, बढ़ते नए बाजार, और मजबूत प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन इस सेक्टर की लंबी अवधि की मजबूती का संकेत देते हैं।
विशेष रूप से फ्रोज़न श्रिम्प की भूमिका आने वाले वर्षों में भी भारत के एक्सपोर्ट ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार बनी रह सकती है।
Disclaimer
यह लेख ANI और MPEDA द्वारा जारी आधिकारिक डेटा पर आधारित विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है, जिसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।
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