नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और दक्षिण कोरिया ने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने का फैसला किया। Lee Jae Myung और Narendra Modi के बीच हुई बातचीत में खासतौर पर वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने पर जोर दिया गया।
वेस्ट एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
West Asia में जारी संघर्ष का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिख रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए:
- भारत और दक्षिण कोरिया ने ऊर्जा संसाधनों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सहमति जताई
- नेफ्था जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की सप्लाई बनाए रखने पर जोर
- वैश्विक अस्थिरता के बीच संयुक्त रणनीति तैयार करने का निर्णय
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार
राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा कि दोनों देश अपनी-अपनी ताकतों को मिलाकर कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे:
शिपबिल्डिंग सेक्टर
- कोरियाई तकनीक + भारत की नीतिगत सहायता
- भारत में शिपबिल्डिंग सुविधाओं का निर्माण
- नए ऑर्डर और उत्पादन को बढ़ावा
फाइनेंशियल सेक्टर
- वित्तीय सेवाओं में सहयोग के लिए MoU
- कोरियाई कंपनियों को भारतीय बाजार में एंट्री
- फिनटेक और रेगुलेटरी डेटा शेयरिंग
AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- भारत की AI टैलेंट + कोरिया की टेक इंफ्रास्ट्रक्चर
- “डिजिटल ब्रिज” फ्रेमवर्क के तहत सहयोग
- भविष्य की टेक्नोलॉजी में संयुक्त निवेश
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
दोनों देशों ने मौजूदा व्यापार समझौते को अपग्रेड करने पर भी सहमति जताई:
- CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को आधुनिक बनाने पर जोर
- नए ग्लोबल ट्रेड नियमों के अनुसार बदलाव
- निवेश और व्यापार को आसान बनाने की दिशा में कदम
इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन कमेटी का गठन
India-South Korea Industrial Cooperation Committee के गठन की घोषणा की गई:
- यह दोनों देशों के बीच पहला मंत्रीस्तरीय आर्थिक प्लेटफॉर्म होगा
- ट्रेड, निवेश और प्रमुख उद्योगों पर फोकस
- दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा
वैश्विक शांति में भारत की भूमिका की सराहना
Lee Jae Myung ने कहा:
- कोरिया प्रायद्वीप में भारत के समर्थन की सराहना
- क्षेत्रीय और वैश्विक शांति में भारत की भूमिका अहम
- भविष्य में भी भारत से “रचनात्मक भूमिका” की उम्मीद
महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग
दोनों देशों ने आगे इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही:
- क्रिटिकल मिनरल्स
- न्यूक्लियर एनर्जी
- क्लीन एनर्जी
- सप्लाई चेन रेजिलिएंस
निष्कर्ष
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह नई पहल सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता और विकास का एक मजबूत मॉडल पेश करती है। West Asia में जारी तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर दोनों देशों का फोकस आने वाले समय में वैश्विक बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
यह साझेदारी भविष्य में टेक्नोलॉजी, व्यापार और कूटनीति—तीनों मोर्चों पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का संकेत देती है।
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