भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें लंबे समय से आम लोगों की चिंता का विषय रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। ऐसे समय में सरकार और तेल कंपनियां ऐसे विकल्पों की तलाश कर रही हैं जो न केवल ईंधन को सस्ता बना सकें बल्कि देश की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम करें। इसी दिशा में इथेनॉल आधारित ईंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है।
देश में अब E85 पेट्रोल की शुरुआत हो चुकी है, जिसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी कम रखी गई है। दिल्ली में जहां सामान्य पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, वहीं E85 पेट्रोल 82.12 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध कराया जा रहा है। यानी उपभोक्ताओं को प्रति लीटर करीब 20 रुपये की सीधी बचत मिल सकती है। हालांकि यह ईंधन फिलहाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध है।
E85 पेट्रोल क्या है और यह सामान्य पेट्रोल से कितना अलग है?
E85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है जिसमें 80 से 85 प्रतिशत तक इथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल का होता है। भारत में वर्तमान समय में ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। E20 का उपयोग अधिकांश नई गाड़ियों में किया जा सकता है, लेकिन E85 केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) के लिए तैयार किया गया है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं जो 100 प्रतिशत पेट्रोल से लेकर 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर आसानी से चल सकते हैं। सामान्य पेट्रोल इंजन में E85 का उपयोग तकनीकी समस्याएं पैदा कर सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि वाहन निर्माता द्वारा इसकी अनुमति दी गई हो।
इथेनॉल एक जैविक ईंधन है जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses), मक्का और अधिशेष या खराब अनाज से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाने से पेट्रोलियम उत्पादों की खपत कम होती है और पर्यावरणीय लाभ भी प्राप्त होते हैं।
देश का पहला सार्वजनिक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग पॉइंट शुरू
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने देश में E85 ईंधन की सार्वजनिक बिक्री की शुरुआत की है। पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर यह ईंधन उपलब्ध कराया गया है।
दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर देश का पहला सार्वजनिक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग पॉइंट शुरू किया गया है। तेल कंपनियों का मानना है कि जैसे-जैसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे E85 ईंधन की उपलब्धता भी देशभर में बढ़ाई जाएगी।
सरकार और तेल कंपनियों की योजना आने वाले वर्षों में हजारों पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल आधारित ईंधन उपलब्ध कराने की है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिल सकें।
₹102 के मुकाबले ₹82 का पेट्रोल कैसे मिल रहा है?
E85 पेट्रोल की कम कीमत के पीछे सबसे बड़ा कारण इसका घरेलू उत्पादन है। भारत अपने कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। विदेशी बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने पर भारत का आयात बिल भी बढ़ जाता है।
इसके विपरीत इथेनॉल का उत्पादन देश के भीतर किया जाता है। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने के कारण इसकी आपूर्ति स्थानीय स्तर पर संभव है। यही वजह है कि E85 पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम रखी जा सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इथेनॉल उत्पादन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ता है तो भविष्य में भारत की ईंधन लागत और विदेशी मुद्रा खर्च दोनों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
सरकार इथेनॉल पर इतना जोर क्यों दे रही है?
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से Ethanol Blended Petrol (EBP) Programme को तेजी से आगे बढ़ा रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण में कमी लाना है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। देश हर साल लाखों करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा खर्च केवल तेल आयात पर करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कच्चा तेल आयात बिल 10.92 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहा।
ऐसे में इथेनॉल जैसे घरेलू विकल्प ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाना तथा फ्लेक्स-फ्यूल आधारित परिवहन प्रणाली को विस्तार देना है।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है इथेनॉल?
इथेनॉल कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ देश के किसानों को मिल रहा है। पहले गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों की अधिक पैदावार होने पर किसानों और चीनी मिलों को कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ता था।
अब अतिरिक्त गन्ने, शीरे और मक्का का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी फसल के लिए अतिरिक्त बाजार मिला है और उनकी आय में वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल उद्योग के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है। नई डिस्टिलरी और बायो-रिफाइनरी स्थापित होने से रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।
विदेशी मुद्रा बचत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले लगभग एक दशक में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण भारत को 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।
जब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है तो उतनी मात्रा में कच्चे तेल की जरूरत कम हो जाती है। इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता घटती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि इथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग बड़े स्तर पर बढ़ता है तो भविष्य में भारत वैश्विक तेल संकटों के प्रभाव से काफी हद तक बच सकता है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में बढ़ रहा निवेश
इथेनॉल आधारित ईंधन के विस्तार का असर ऑटोमोबाइल उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। कई वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित नए मॉडल विकसित कर रही हैं।
मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियां इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। आने वाले वर्षों में और अधिक वाहन निर्माता फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले मॉडल बाजार में उतार सकते हैं।
इससे ऑटो कंपोनेंट उद्योग, ग्रीन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। सरकार भी ऐसे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत समर्थन दे रही है।
ब्राजील मॉडल से क्या सीख रहा है भारत?
इथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था की बात हो तो ब्राजील दुनिया का सबसे सफल उदाहरण माना जाता है। वहां बड़ी मात्रा में गन्ने से इथेनॉल तैयार किया जाता है और अधिकांश वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित हैं।
ब्राजील में E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल का उपयोग भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। वहां के उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार पेट्रोल या इथेनॉल का चयन कर सकते हैं।
भारत भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि भारत का मॉडल पूरी तरह ब्राजील जैसा नहीं है, लेकिन ऊर्जा आत्मनिर्भरता और कृषि आधारित ईंधन उत्पादन के मामले में दोनों देशों के लक्ष्य काफी हद तक समान हैं।
क्या भविष्य में और सस्ता हो सकता है पेट्रोल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ती है तो भविष्य में ईंधन लागत में और कमी संभव है।
सरकार की योजना अधिक इथेनॉल पंप स्थापित करने, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने और जैव ईंधन उत्पादन क्षमता बढ़ाने की है। यदि ये योजनाएं सफल रहती हैं तो आने वाले वर्षों में भारत का ईंधन बाजार पूरी तरह बदल सकता है।
फिलहाल E85 पेट्रोल की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे उपभोक्ताओं को सस्ता विकल्प मिलेगा, किसानों की आय बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा सकेगा।


