नई दिल्ली: देश में LPG (रसोई गैस) की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz के जरिए होने वाली शिपमेंट में बाधा का सीधा असर भारत पर दिखाई देने लगा है।
भारत अपनी कुल LPG जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट घरेलू स्तर पर बड़ी समस्या बन जाती है। हालिया घटनाक्रम ने यही दिखाया है कि अंतरराष्ट्रीय संकट किस तरह देश की रोजमर्रा की जरूरतों को प्रभावित कर सकता है।
सप्लाई चेन पर दबाव कैसे बढ़ा
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है। कई टैंकरों की आवाजाही धीमी हुई है और कुछ शिपमेंट में देरी की खबरें हैं। इसका असर सीधे भारत आने वाली LPG खेप पर पड़ा है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि होर्मुज मार्ग में किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक गैस और तेल सप्लाई को प्रभावित करती है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
होटल और छोटे कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित

इस संकट का सबसे ज्यादा असर खाने-पीने के कारोबार पर पड़ा है। कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे रेस्टोरेंट और ढाबों की लागत बढ़ गई है।
कई छोटे कारोबारियों ने बताया कि उन्हें मेन्यू के दाम बढ़ाने पड़े हैं, जबकि कुछ जगहों पर कामकाज सीमित करना पड़ा है।
Kerala जैसे राज्यों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां कुछ छोटे होटल अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। इससे स्थानीय स्तर पर खाने की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है।
बेंगलुरु में ऑटो चालकों की स्थिति
Bengaluru में LPG संकट का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। ऑटो चालकों को गैस भरवाने के लिए कई घंटों तक लाइन में लगना पड़ रहा है।
कई पेट्रोल पंपों पर “नो स्टॉक” की स्थिति बन गई है। कुछ स्थानों पर कतारें एक किलोमीटर तक लंबी बताई जा रही हैं।
ऑटो चालकों का कहना है कि उनका आधा दिन गैस के इंतजार में निकल जाता है, जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। दूसरी तरफ यात्रियों को भी ऑटो मिलने में परेशानी हो रही है और इंतजार का समय बढ़ गया है।
कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी
सप्लाई कम होने के साथ-साथ कीमतों में भी उछाल आया है। बेंगलुरु में ऑटो LPG की कीमतें 120 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की बात सामने आई है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। यह बढ़ती लागत आखिरकार आम उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है।
ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें
जहां कमी होती है, वहां अनियमितताएं भी बढ़ने लगती हैं। कुछ इलाकों से ब्लैक मार्केटिंग और अवैध रिफिलिंग की शिकायतें मिली हैं।
प्रशासन ने इस पर सख्ती शुरू की है। निगरानी बढ़ाई गई है और छापेमारी की जा रही है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
सरकार और तेल कंपनियों के प्रयास
स्थिति को संभालने के लिए सरकार और तेल कंपनियां लगातार प्रयास कर रही हैं।
Indian Oil Corporation ने कुछ राज्यों में सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की है। इसके अलावा नए स्रोतों से LPG आयात पर भी काम किया जा रहा है।
हालांकि, फिलहाल मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है, जिससे स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
लोग विकल्प तलाश रहे हैं
गैस की कमी के कारण शहरी क्षेत्रों में लोग वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। इंडक्शन कुकर और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ी है।
यह बदलाव दिखाता है कि लोग स्थिति के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि यह हर वर्ग के लिए आसान नहीं है।
व्यापक असर और आगे की चुनौती
LPG संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी अस्थिरता सीधे घरेलू बाजार को प्रभावित करती है।
अगर स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर महंगाई, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की जिंदगी पर और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
देश में LPG की मौजूदा स्थिति एक चेतावनी की तरह है। सप्लाई चेन को मजबूत करना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देना अब जरूरी हो गया है।
फिलहाल सरकार हालात को संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई सामान्य होगी और होर्मुज जैसे अहम मार्गों पर स्थिरता लौटेगी।
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