हर बड़ा कारोबारी किसी बड़े बिजनेस आइडिया के साथ ही शुरुआत करे, यह जरूरी नहीं है। कई बार छोटी-सी दुकान, सीमित पूंजी और कारोबार में मिली एक ठोकर जिंदगी की दिशा बदल देती है। केरल के कारोबारी एमपी अहमद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी वह इलायची, काली मिर्च और नारियल की सप्लाई करके अपना कारोबार चलाते थे। आज उनका नाम देश-विदेश में मशहूर ज्वेलरी ब्रांड मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।
रिपोर्ट्स में कंपनी का कारोबार करीब 27,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। मसालों के व्यापार से शुरू हुआ उनका सफर सोने और हीरे के आभूषणों की दुनिया तक कैसे पहुंचा? आइए जानते हैं एमपी अहमद की सफलता की दिलचस्प कहानी और उनके बिजनेस मॉडल की खास बातें।
20 साल की उम्र में शुरू किया कारोबार
एमपी अहमद का जन्म केरल के एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां व्यापार और जमीन-जायदाद से जुड़ी गतिविधियां पहले से मौजूद थीं। कारोबारी माहौल में पले-बढ़े अहमद ने वर्ष 1979 में, महज 20 साल की उम्र में अपना व्यवसाय शुरू किया। उस समय उनका कारोबार ज्वेलरी से नहीं, बल्कि मसालों और कृषि उत्पादों की सप्लाई से जुड़ा था।
वह केरल के कोझिकोड में खुदरा कारोबारियों को इलायची, काली मिर्च और नारियल की सप्लाई करते थे। शुरुआत में यह कारोबार ठीक चला, लेकिन जल्द ही उन्हें महसूस हुआ कि केवल सामान खरीदने और बेचने के कारोबार में आगे बढ़ने की सीमाएं हैं। वह ऐसा व्यवसाय खड़ा करना चाहते थे, जिसकी अपनी पहचान हो और जिसे एक मजबूत ब्रांड के रूप में विकसित किया जा सके।
मुंबई के कारोबारी से मिली जिंदगी बदलने वाली सीख
एमपी अहमद की कारोबारी यात्रा में एक घटना का खास महत्व बताया जाता है। शुरुआती दिनों में मुंबई के एक कारोबारी के पास उनका काफी पैसा बकाया था। भुगतान में परेशानी आने के कारण अहमद के लिए अपना कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा था।
इसी दौरान उन्हें ब्रांड की अहमियत समझ में आई। बताया जाता है कि संबंधित कारोबारी ने अपना ब्रांड बेचकर बकाया चुकाने की बात कही। इस घटना ने अहमद को सोचने पर मजबूर कर दिया कि किसी उत्पाद की कीमत केवल उसकी खरीद और बिक्री से तय नहीं होती, बल्कि उसकी पहचान और बाजार में बनी प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण होती है।
यहीं से उनकी कारोबारी सोच में बदलाव आया। उन्होंने महसूस किया कि लंबे समय तक टिकने वाले व्यवसाय के लिए ग्राहकों का भरोसा, गुणवत्ता और ब्रांड की पहचान बेहद जरूरी हैं। इसके बाद उन्होंने मसालों के कारोबार से आगे बढ़कर एक नए क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया।
प्रॉपर्टी बेचकर जुटाई कारोबार की पूंजी
ज्वेलरी का व्यवसाय शुरू करने के लिए अनुभव के साथ-साथ पर्याप्त पूंजी की भी जरूरत थी। एमपी अहमद के पास शुरुआत में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश करने के लिए पर्याप्त रकम नहीं थी। ऐसे में उन्होंने संपत्ति बेचकर पूंजी जुटाने का रास्ता चुना।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब 50 लाख रुपये की पूंजी जुटाई और ज्वेलरी कारोबार में उतरने की तैयारी की। यह उनके लिए एक बड़ा जोखिम था, क्योंकि वह जिस उद्योग में कदम रख रहे थे, उसमें ग्राहकों का भरोसा और उत्पाद की गुणवत्ता सबसे ज्यादा मायने रखते थे।
1993 में 440 वर्ग फुट की दुकान से हुई शुरुआत
वर्ष 1993 में एमपी अहमद ने केरल के कोझिकोड में ज्वेलरी कारोबार की शुरुआत की। उन्होंने लगभग 440 वर्ग फुट की छोटी-सी दुकान से अपना सफर आगे बढ़ाया। इसी पहल ने आगे चलकर मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की नींव रखी।
शुरुआत में उनका लक्ष्य केवल एक दुकान चलाना नहीं था। वह ऐसा कारोबार बनाना चाहते थे, जो ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण आभूषण उपलब्ध कराए और धीरे-धीरे दूसरे शहरों तथा बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ाए।
ज्वेलरी उद्योग में प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद थी। ऐसे में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कंपनी को उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, ग्राहकों के अनुभव और भरोसे पर ध्यान देना था। अहमद ने कारोबार को इसी दिशा में आगे बढ़ाया।
खुद ज्वेलरी बनवाने और गुणवत्ता पर दिया जोर
मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की शुरुआती कारोबारी रणनीति में आभूषणों की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया पर ध्यान देना महत्वपूर्ण रहा। कंपनी ने सोने की खरीद के बाद कारीगरों के जरिए ज्वेलरी तैयार करने और उसे ग्राहकों तक पहुंचाने के मॉडल पर काम किया।
आकर्षक डिजाइन और अलग-अलग पसंद के ग्राहकों के लिए कलेक्शन तैयार करने से कारोबार को आगे बढ़ने में मदद मिली। शुरुआती सफलता के बाद कंपनी ने केरल के अन्य शहरों में भी अपने स्टोर खोले। तिरूर और थलास्सेरी जैसे बाजारों में विस्तार ने कंपनी को स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर दिया।
गुणवत्ता और शुद्धता के मामले में ग्राहकों का भरोसा बनाना भी कंपनी की रणनीति का हिस्सा रहा। भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS की हॉलमार्किंग व्यवस्था के तहत आभूषणों की शुद्धता की पहचान को महत्व मिलने से ग्राहकों के लिए खरीदारी के समय भरोसे का एक अतिरिक्त आधार तैयार हुआ।
हालांकि, किसी भी ज्वेलरी ब्रांड की सफलता केवल उत्पाद बेचने पर निर्भर नहीं करती। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, इन्वेंट्री का प्रबंधन, ग्राहकों की बदलती पसंद और कारोबार की लागत जैसे पहलुओं को संभालना भी उतना ही जरूरी होता है।
2001 में विदेश पहुंचा कारोबार
भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के बाद मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर रुख किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी ने वर्ष 2001 में खाड़ी क्षेत्र में अपना पहला विदेशी स्टोर खोला।
खाड़ी देशों में भारतीय मूल के ग्राहकों की बड़ी आबादी और सोने के आभूषणों के प्रति मजबूत मांग ने ज्वेलरी कारोबार के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराए। कंपनी ने इस बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाई और धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी विस्तार किया।
वर्ष 2011 में कंपनी ने रियाद में अपना 50वां स्टोर खोला। इसके बाद स्टोर नेटवर्क में विस्तार की रफ्तार बढ़ी। वर्ष 2013 तक कंपनी की मौजूदगी सात देशों में बताई गई, जहां उसके 100 से अधिक आउटलेट थे।
इसके बाद कंपनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार को आगे बढ़ाया। वर्ष 2017 में दुबई में 200वें स्टोर की शुरुआत और जनवरी 2018 में छह देशों में एक साथ 11 स्टोर खोलने जैसी गतिविधियों ने उसके विस्तार की रणनीति को दर्शाया। वर्ष 2019 में कंपनी ने अमेरिका के शिकागो में भी अपने स्टोर खोले।
27,000 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार तक कैसे पहुंची कंपनी?
मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की कहानी केवल एक छोटी दुकान से बड़े कारोबार तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह बताती है कि किसी व्यवसाय को लंबे समय तक आगे बढ़ाने के लिए ब्रांड की पहचान, उत्पादों की गुणवत्ता और नए बाजारों में विस्तार की रणनीति कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
कंपनी ने भारत के साथ-साथ मध्य पूर्व और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। इसके साथ ही उसने सोने के आभूषणों के अलावा हीरे और दूसरे प्रकार के ज्वेलरी कलेक्शन पर भी ध्यान दिया। अलग-अलग बाजारों के ग्राहकों की पसंद के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराना भी कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण रहा।
उपलब्ध रिपोर्टों में कंपनी के 14 देशों में 445 से अधिक स्टोर और करीब 27,000 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों को संबंधित वित्तीय वर्ष और कंपनी के आधिकारिक विवरण के संदर्भ में देखना जरूरी है। कारोबार के आकार, राजस्व और मुनाफे में अंतर होता है, इसलिए 27,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को कंपनी का शुद्ध मुनाफा नहीं समझना चाहिए।
एमपी अहमद की कहानी से क्या सीख मिलती है?
एमपी अहमद की कारोबारी यात्रा से छोटे उद्यमियों को कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। पहला, व्यवसाय की शुरुआत छोटी होने का मतलब यह नहीं है कि उसका भविष्य भी सीमित रहेगा। सही रणनीति और लगातार प्रयास से स्थानीय कारोबार को बड़े ब्रांड में बदला जा सकता है।
दूसरा, केवल उत्पाद खरीदने और बेचने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाना लंबे समय में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकता है। तीसरा, कारोबार में आने वाली मुश्किलें नई दिशा तलाशने का अवसर भी बन सकती हैं। अहमद के मामले में ब्रांड की अहमियत समझने का अनुभव उनके व्यवसाय की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
चौथा, विस्तार के साथ गुणवत्ता और ग्राहक के भरोसे को बनाए रखना जरूरी है। नए शहरों और देशों में स्टोर खोलना तभी टिकाऊ साबित होता है, जब कंपनी अपने उत्पादों और सेवाओं के स्तर को बनाए रख सके।
आज मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की पहचान अंतरराष्ट्रीय ज्वेलरी बाजार में एक बड़े भारतीय ब्रांड के रूप में है। इलायची, काली मिर्च और नारियल की सप्लाई से शुरू हुआ एमपी अहमद का सफर दिखाता है कि कारोबारी सफलता के लिए केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि बाजार की समझ, ब्रांड निर्माण और लंबी अवधि की सोच भी अहम भूमिका निभाती है।
Source: उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की विकास यात्रा पर आधारित।
डिस्क्लेमर: इस लेख में कारोबार से जुड़े आंकड़े विभिन्न रिपोर्टों में बताए गए विवरणों पर आधारित हैं। इन्हें कंपनी के नवीनतम आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के रूप में न माना जाए।


