Anant Ambani Vantara: भारत के सबसे चर्चित बिजनेस परिवारों में से एक अंबानी परिवार से जुड़ी एक ऐसी जगह है, जो अपनी विशालता और वन्यजीव संरक्षण के लिए दुनिया का ध्यान खींच चुकी है। गुजरात के जामनगर में स्थित ‘वंतारा’ (Vantara) करीब 3,500 एकड़ में फैला एक विशाल वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास केंद्र है। इसकी शुरुआत अनंत अंबानी की पहल के तौर पर हुई और यहां घायल, संकटग्रस्त और लुप्तप्राय जानवरों के बचाव, इलाज और पुनर्वास पर फोकस किया जाता है।
वंतारा को आम चिड़ियाघर से अलग माना जाता है। यहां केवल जानवरों को प्रदर्शित करने के बजाय उनके रेस्क्यू, मेडिकल ट्रीटमेंट, पुनर्वास और संरक्षण की व्यवस्था की गई है। यही वजह है कि यह परियोजना देश-विदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जामनगर में कहां बना है वंतारा?

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल परिसर के आसपास विकसित किया गया वंतारा एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। जामनगर पश्चिमी भारत का ऐसा इलाका है, जहां रिलायंस की बड़ी रिफाइनरी भी स्थित है।
वंतारा का उद्देश्य ऐसे जानवरों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है, जिन्हें चोट लगी हो, जो बीमार हों या जिन्हें किसी कारण से बचाव और विशेष देखभाल की जरूरत हो।
इस परियोजना से जुड़े प्रमुख संस्थानों में राधे कृष्ण मंदिर एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट और ग्रीन्स जूलॉजिकल, रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर शामिल हैं।
वंतारा में कौन-कौन से जानवर हैं?
वंतारा में बड़ी संख्या में विभिन्न प्रजातियों के जानवरों को रखा और उनका इलाज किया जाता है। यहां हाथियों के अलावा बड़ी बिल्लियों, मगरमच्छ, अजगर और कई अन्य वन्यजीवों के लिए भी विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं।
जानवरों की देखभाल के लिए यहां आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाएं, उपचार केंद्र और अलग-अलग प्रजातियों की जरूरत के हिसाब से बनाए गए बड़े एनक्लोजर मौजूद हैं।
वंतारा की खासियत यह है कि यहां आने वाले कई जानवर रेस्क्यू किए गए या विशेष देखभाल की जरूरत वाले होते हैं।
वंतारा की शुरुआत कब हुई?

वंतारा परियोजना से जुड़े संरक्षण प्रयास कई वर्षों से चल रहे हैं। हाथियों की देखभाल के लिए राधे कृष्ण मंदिर एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट की शुरुआत पहले हुई, जबकि ग्रीन्स जूलॉजिकल, रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर को बाद में विकसित किया गया।
इन संस्थानों को एक बड़े वन्यजीव संरक्षण मॉडल के तौर पर विकसित किया गया, जिसमें रेस्क्यू से लेकर इलाज और पुनर्वास तक की व्यवस्था शामिल है।
वंतारा बनाने में कितना पैसा खर्च हुआ?
वंतारा को विकसित करने में हुए खर्च को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कई रिपोर्टों में इस पूरे वन्यजीव संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत करीब ₹1,200 करोड़ से ₹2,000 करोड़ के बीच बताई गई है।
वहीं, इसकी देखरेख और संचालन पर हर साल भी बड़ी रकम खर्च होने का अनुमान लगाया जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक वार्षिक ऑपरेटिंग कॉस्ट करीब ₹130 करोड़ से ₹200 करोड़ तक हो सकती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स में बताए गए अनुमान हैं और इन्हें वंतारा की आधिकारिक वित्तीय घोषणा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या आम लोग वंतारा घूम सकते हैं?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि अगर वंतारा इतना बड़ा है तो क्या आम लोग यहां घूमने जा सकते हैं?
दरअसल, वंतारा को सामान्य पब्लिक चिड़ियाघर की तरह संचालित नहीं किया जाता। यहां आम पर्यटकों के लिए नियमित टिकटिंग व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे पारंपरिक चिड़ियाघर समझना सही नहीं होगा।
इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, बचाव और पुनर्वास है, न कि पर्यटकों के लिए मनोरंजन स्थल उपलब्ध कराना।
अनंत अंबानी का क्या है कनेक्शन?
वंतारा को रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े अनंत अंबानी की प्रमुख वन्यजीव संरक्षण पहलों में से एक माना जाता है। अनंत अंबानी लंबे समय से जानवरों और उनके संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी रुचि जाहिर करते रहे हैं।
इस परियोजना के जरिए उनका लक्ष्य संकट में पड़े वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण देना और उनके इलाज तथा पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था तैयार करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं वंतारा का दौरा
वंतारा को लेकर उस समय भी काफी चर्चा हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामनगर स्थित इस वन्यजीव संरक्षण केंद्र का दौरा किया था। इसके बाद वंतारा की तस्वीरें और यहां मौजूद सुविधाएं सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहीं।
वंतारा क्यों है खास?
- करीब 3,500 एकड़ में फैला विशाल परिसर
- घायल और संकटग्रस्त जानवरों के रेस्क्यू और पुनर्वास पर जोर
- हाथियों के लिए विशेष संरक्षण सुविधाएं
- आधुनिक पशु चिकित्सा और उपचार व्यवस्था
- बड़ी संख्या में विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों की देखभाल
- आम चिड़ियाघरों से अलग संरक्षण-केंद्रित मॉडल
- परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये के निवेश की मीडिया रिपोर्ट्स
कुल मिलाकर, जामनगर का वंतारा सिर्फ एक बड़ा निजी चिड़ियाघर नहीं है, बल्कि इसे वन्यजीव बचाव और पुनर्वास के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित किया गया है। अनंत अंबानी की इस पहल में घायल और संकटग्रस्त जानवरों को बचाने, उनका इलाज करने और उन्हें बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर खास जोर दिया गया है।


