JLR Layoffs: टाटा मोटर्स की लग्जरी कार कंपनी Jaguar Land Rover बढ़ती लागत, कमजोर बिक्री और अमेरिकी टैरिफ के दबाव से जूझ रही है। कंपनी अगले दो साल में करीब 2.3 अरब डॉलर की बचत करने की योजना बना रही है। इसी के तहत लगभग 4,000 नौकरियों में कटौती की जा सकती है।
टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली Jaguar Land Rover (JLR) अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी में है। कंपनी अगले दो साल में करीब 4,000 नौकरियों में कटौती कर सकती है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब कंपनी बढ़ती लागत, कमजोर बिक्री और अमेरिका की टैरिफ नीतियों के कारण दबाव का सामना कर रही है।
ब्रिटेन की प्रमुख कार कंपनियों में शामिल JLR की ओर से सोमवार को रिडंडेंसी प्रोग्राम की घोषणा किए जाने की संभावना जताई गई है। The Times की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार देर रात कर्मचारियों को संभावित छंटनी कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई थी।
वहीं, Bloomberg के अनुसार, कंपनी ने एक बयान में बताया कि वह Voluntary Redundancy Programme शुरू कर रही है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा।
दो साल में 2.3 अरब डॉलर बचाने का लक्ष्य
JLR अपनी लागत कम करने और कारोबार को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले दो साल में करीब 2.3 अरब डॉलर की बचत करना है।
कंपनी वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में जारी अनिश्चितता को देखते हुए अपने ब्रेक-ईवन पॉइंट को घटाकर करीब 3 लाख वाहनों तक लाना चाहती है। इसके साथ ही JLR अपने कारोबार के संचालन को सरल बनाने पर भी फोकस कर रही है।
कंपनी के लिए लागत घटाना इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि कमजोर मांग और बढ़ते खर्च का असर उसके वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई दे रहा है।
ब्रिटेन में 33,000 लोगों को रोजगार देती है JLR
Jaguar Land Rover ब्रिटेन में करीब 33,000 लोगों को रोजगार देती है। कंपनी का मालिकाना हक टाटा मोटर्स की पैसेंजर व्हीकल्स यूनिट के पास है।
हालिया तिमाही में JLR के प्रदर्शन पर भी दबाव देखने को मिला। कंपनी का रेवेन्यू करीब 10 फीसदी घटा, जबकि प्रॉफिट बिफोर टैक्स में लगभग 69 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर करीब 10.9 करोड़ पाउंड रह गया।
ऐसे में कंपनी की ओर से लागत कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों में कर्मचारियों की संख्या घटाना भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक कारों पर भी बढ़ रहा फोकस
JLR दूसरी ओर अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल पोर्टफोलियो को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक Range Rover हाल ही में बिक्री के लिए पेश की गई है।
यह मॉडल दुनिया की महंगी इलेक्ट्रिक SUVs में शामिल है। कंपनी को उम्मीद है कि लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग उसके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और वैश्विक ऑटो सेक्टर में अनिश्चितता के बीच कंपनी के सामने लागत और मुनाफे को संतुलित रखने की चुनौती बनी हुई है।
Volkswagen में भी हजारों नौकरियों पर संकट
ऑटोमोबाइल सेक्टर में कर्मचारियों की संख्या घटाने का दबाव सिर्फ JLR तक सीमित नहीं है। जर्मनी की Volkswagen भी बड़े स्तर पर नौकरियों में कटौती की योजना पर आगे बढ़ रही है।
कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने Future Plan 2030 नाम की बदलाव योजना को मंजूरी दी है। इस योजना में कई बड़े बदलाव शामिल हैं। इनमें दुनियाभर में करीब 50,000 अतिरिक्त नौकरियों को खत्म करना, 2035 तक व्हीकल मॉडल लाइनअप को लगभग आधा करना और 2027 से 2031 के बीच कैपिटल खर्च में करीब 16 फीसदी की कमी जैसे कदम शामिल हैं।
Volkswagen में करीब 50,000 नौकरियों में कटौती को लेकर पहले ही सहमति बन चुकी थी और प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी। अब कंपनी की नई योजना के तहत दुनियाभर में अतिरिक्त नौकरियों को कम करने की दिशा में भी मंजूरी मिल गई है।
भारत में भी Volkswagen Group कर रहा बदलाव
Volkswagen Group की भारतीय यूनिट भी अपने कारोबार में बदलाव कर रही है। कंपनी ने तीन साल की रीस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया शुरू की थी, जिसका असर उसकी वर्कफोर्स पर पड़ने की संभावना है।
Skoda Auto Volkswagen India Private Limited ने 2025 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अब कंपनी 2027 तक इस रीस्ट्रक्चरिंग को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी की करीब 12 फीसदी वर्कफोर्स कम हो सकती है।
ऑटो सेक्टर में लागत घटाने की होड़
JLR और Volkswagen के फैसले बताते हैं कि दुनिया की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां इस समय लागत कम करने और अपने कारोबार को ज्यादा कुशल बनाने पर जोर दे रही हैं।
कमजोर मांग, इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ता निवेश, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, सप्लाई चेन की चुनौतियां और अलग-अलग देशों की टैरिफ नीतियां कंपनियों पर दबाव बढ़ा रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में ऑटो सेक्टर में रीस्ट्रक्चरिंग और वर्कफोर्स में बदलाव का सिलसिला जारी रह सकता है।


